Monday, May 25, 2026
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नीट यूजी पेपर लीक का पूरा खेल! केरल से राजस्थान तक कैसे फैला प्रश्नपत्र, अब सीबीआई करेगी जांच

राजस्थान में सामने आए पेपर लीक मामले के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया है। तीन मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में देशभर से करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। अब मामले की जांच तेज हो चुकी है और कई गिरफ्तारियों के बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है।

जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले राजस्थान के चूरू जिले के एक युवक तक पहुंचा, जो फिलहाल केरल में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, सीकर में कंसल्टेंसी चलाने वाले राकेश मंडावरिया को अप्रैल महीने में ही प्रश्नों का कथित क्वेश्चन बैंक मिल गया था। बताया जा रहा है कि यही नेटवर्क बाद में कई राज्यों तक फैल गया।

सीकर से छात्रों तक पहुंचा कथित पेपर
जानकारी के अनुसार, राकेश मंडावरिया ने कथित प्रश्नपत्र अपने पीजी में रहने वाले छात्रों को उपलब्ध कराया। इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए यह सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, उत्तराखंड और बिहार तक यह नेटवर्क फैल चुका था।

व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बने बड़ा जरिया
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अलग-अलग राज्यों में छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब इन डिजिटल ग्रुप्स की पहचान कर रही है और चैट रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी आधार पर कई और नाम सामने आ सकते हैं।

पुलिस पूछताछ में खुलते गए कई नाम
नीट परीक्षा के बाद राकेश मंडावरिया ने खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पूछताछ के दौरान उसने चूरू के उस युवक का नाम बताया, जो केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने उससे पूछताछ की, जहां से मनीष नाम के शख्स का नाम सामने आया।

पेपर छपने से पहले लीक होने का दावा
राजस्थान एसओजी सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था। जांच में बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू मिलने का दावा किया जा रहा है। जयपुर से पकड़े गए मनीष को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

क्वेश्चन बैंक बनाकर छात्रों तक पहुंचाए गए सवाल
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर लीक सवालों को दूसरे सवालों के साथ मिलाकर एक पूरा क्वेश्चन बैंक तैयार किया था। इसी क्वेश्चन बैंक को छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर सवाल सबसे पहले कहां से बाहर आए।

छात्रों से रकम लेने की भी बात आई सामने
पूछताछ में कुछ छात्रों ने यह भी स्वीकार किया है कि कथित प्रश्नपत्र के बदले रकम दी गई थी। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि एक छात्र से कितनी राशि ली गई। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को दी गई थी।

अब सीबीआई करेगी पूरे नेटवर्क की जांच
राजस्थान पुलिस और एसओजी की शुरुआती जांच के बाद अब यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर आखिर कहां से लीक हुआ और किन-किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ था। माना जा रहा है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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नीट यूजी पेपर लीक का पूरा खेल! केरल से राजस्थान तक कैसे फैला प्रश्नपत्र, अब सीबीआई करेगी जांच

राजस्थान में सामने आए पेपर लीक मामले के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया है। तीन मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में देशभर से करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। अब मामले की जांच तेज हो चुकी है और कई गिरफ्तारियों के बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है।

जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले राजस्थान के चूरू जिले के एक युवक तक पहुंचा, जो फिलहाल केरल में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, सीकर में कंसल्टेंसी चलाने वाले राकेश मंडावरिया को अप्रैल महीने में ही प्रश्नों का कथित क्वेश्चन बैंक मिल गया था। बताया जा रहा है कि यही नेटवर्क बाद में कई राज्यों तक फैल गया।

सीकर से छात्रों तक पहुंचा कथित पेपर
जानकारी के अनुसार, राकेश मंडावरिया ने कथित प्रश्नपत्र अपने पीजी में रहने वाले छात्रों को उपलब्ध कराया। इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए यह सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, उत्तराखंड और बिहार तक यह नेटवर्क फैल चुका था।

व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बने बड़ा जरिया
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अलग-अलग राज्यों में छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब इन डिजिटल ग्रुप्स की पहचान कर रही है और चैट रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी आधार पर कई और नाम सामने आ सकते हैं।

पुलिस पूछताछ में खुलते गए कई नाम
नीट परीक्षा के बाद राकेश मंडावरिया ने खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पूछताछ के दौरान उसने चूरू के उस युवक का नाम बताया, जो केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने उससे पूछताछ की, जहां से मनीष नाम के शख्स का नाम सामने आया।

पेपर छपने से पहले लीक होने का दावा
राजस्थान एसओजी सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था। जांच में बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू मिलने का दावा किया जा रहा है। जयपुर से पकड़े गए मनीष को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

क्वेश्चन बैंक बनाकर छात्रों तक पहुंचाए गए सवाल
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर लीक सवालों को दूसरे सवालों के साथ मिलाकर एक पूरा क्वेश्चन बैंक तैयार किया था। इसी क्वेश्चन बैंक को छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर सवाल सबसे पहले कहां से बाहर आए।

छात्रों से रकम लेने की भी बात आई सामने
पूछताछ में कुछ छात्रों ने यह भी स्वीकार किया है कि कथित प्रश्नपत्र के बदले रकम दी गई थी। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि एक छात्र से कितनी राशि ली गई। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को दी गई थी।

अब सीबीआई करेगी पूरे नेटवर्क की जांच
राजस्थान पुलिस और एसओजी की शुरुआती जांच के बाद अब यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर आखिर कहां से लीक हुआ और किन-किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ था। माना जा रहा है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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