बिहार के बेगूसराय जिले के बीहट में 21 नवंबर 1979 को जन्मे Vikas Vaibhav आज देश के चर्चित आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं। तकनीकी शिक्षा से लेकर पुलिस सेवा और सामाजिक अभियानों तक उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय माना जाता है।
विकास वैभव ने शुरुआती पढ़ाई देश के अलग-अलग विद्यालयों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1997 से 2001 तक Indian Institute of Technology Kanpur से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। तकनीकी क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य होने के बावजूद उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना और वर्ष 2003 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो गए।
दानापुर और पटना में बदली पुलिसिंग की तस्वीर
अपने कैरियर की शुरुआत उन्होंने दानापुर में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में की। बाद में पटना में नगर पुलिस अधीक्षक रहते हुए लंबित मामलों के निपटारे और पारदर्शी पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया। कम्प्यूटरीकृत निगरानी व्यवस्था और पुलिस-पब्लिक संवाद के जरिए अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
‘मिनी चंबल’ कहे जाने वाले इलाके में अपराध पर लगाम
बगहा में पुलिस अधीक्षक रहते हुए विकास वैभव ने अपहरण और डकैत गिरोहों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया। उस समय यह इलाका अपराध के कारण “मिनी चंबल” के नाम से बदनाम था। उनके नेतृत्व में कई बड़े गिरोहों ने आत्मसमर्पण किया और अपहरण की घटनाओं में भारी कमी आई।
स्थानीय लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि बाद में एक चौराहे और सड़क का नाम भी उनके नाम पर रखा गया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाया बड़ा अभियान
रोहतास में पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में “ऑपरेशन विध्वंस” जैसे अभियान चलाए। सामुदायिक पुलिसिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए आदिवासी और वंचित समुदायों के बीच भरोसा कायम करने की कोशिश की गई।
उनके कार्यकाल में कई दुर्गम इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान संभव हो सका और कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। दशकों बाद रोहतासगढ़ किले पर गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसे बड़ी उपलब्धि माना गया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी में निभाई अहम भूमिका
राष्ट्रीय जांच एजेंसी में पुलिस अधीक्षक रहते हुए विकास वैभव ने कई बड़े आतंकी मामलों की जांच का नेतृत्व किया। इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े मामलों में उनकी टीम को महत्वपूर्ण सफलता मिली।
पटना गांधी मैदान सीरियल ब्लास्ट और महाबोधि मंदिर विस्फोट मामले की जांच में भी उनकी भूमिका अहम रही। कई आरोपियों को अदालत से सजा दिलाने में उनकी टीम सफल रही।
कानून के सामने नेताओं और रसूखदारों पर भी कार्रवाई
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में विकास वैभव अपनी सख्त प्रशासनिक शैली के लिए चर्चित रहे। उन्होंने कानून के मामले में आम नागरिक से लेकर बड़े नेताओं तक के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं किया।
उनके कार्यकाल में कई चर्चित मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित कराने में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया।
भागलपुर में शुरू किया संवाद आधारित पुलिसिंग मॉडल
भागलपुर क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक के रूप में उन्होंने जनता दरबार और लोक संवाद कार्यक्रमों की शुरुआत की। आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और थानों की जवाबदेही पर विशेष ध्यान दिया गया।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण पुलिस व्यवस्था में सुधार देखने को मिला। उनकी कार्यशैली को “संवादात्मक पुलिसिंग” का सफल मॉडल माना गया।
गृह विभाग और आतंकवाद निरोधी दस्ता में भी निभाई जिम्मेदारी
विकास वैभव ने आतंकवाद निरोधी दस्ता के पुलिस उपमहानिरीक्षक और गृह विभाग में विशेष सचिव जैसे अहम पदों पर भी काम किया। कोविड-19 प्रबंधन के दौरान भी उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। वर्ष 2019 में उन्हें आईआईटी कानपुर की ओर से “सत्येंद्र दुबे स्मृति सम्मान” दिया गया।
सोशल मीडिया और इतिहास विषयों पर भी लोकप्रिय
पुलिस सेवा के अलावा विकास वैभव भारतीय इतिहास, संस्कृति और विरासत से जुड़े विषयों पर भी सक्रिय रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनके लेख और व्याख्यान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं। इतिहास, प्रेरणादायक विचार और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच अलग पहचान दिलाई है।
‘प्रेरित करें बिहार’ अभियान से जोड़े लाखों लोग
मार्च 2021 में उन्होंने “आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार” अभियान की शुरुआत की। शिक्षा, समानता और उद्यमिता को केंद्र में रखकर शुरू हुआ यह अभियान तेजी से लोकप्रिय हुआ।
आज इस अभियान से लाखों लोग जुड़े हुए हैं और देश-विदेश में इसके सैकड़ों अध्याय सक्रिय हैं। युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने का काम यह अभियान कर रहा है।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर
अभियान के तहत युवा संवाद, स्टार्टअप सम्मेलन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए कई निशुल्क शिक्षा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक नेतृत्व तैयार करने की दिशा में भी यह अभियान लगातार काम कर रहा है।



