By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 09:41 AM
देश के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा बोर्ड सीबीएसई को नया नेतृत्व मिल गया है। केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड मूल्यांकन प्रणाली और परीक्षा सुधारों को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल के दिनों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग अब नए चेयरमैन के अनुभव और कार्यशैली पर नजर बनाए हुए हैं।
केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति ने प्रशांत सीताराम लोखंडे की नियुक्ति को मंजूरी दी है। उन्होंने राहुल सिंह का स्थान लिया है, जिन्हें कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक हलकों में लोखंडे को एक अनुभवी और परिणाम आधारित अधिकारी के रूप में देखा जाता है। उनकी नियुक्ति को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राहुल सिंह की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी
प्रशांत सीताराम लोखंडे भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2001 बैच के अधिकारी हैं। वे एजीएमयूटी कैडर से जुड़े रहे हैं और अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। अब उन्हें देश के करोड़ों विद्यार्थियों और लाखों शिक्षकों से जुड़े शिक्षा बोर्ड की कमान सौंपी गई है।
कौन हैं प्रशांत सीताराम लोखंडे?
प्रशांत लोखंडे का शैक्षणिक सफर भी काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया और बाद में प्रबंधन की पढ़ाई के जरिए अपनी विशेषज्ञता को और आगे बढ़ाया। यही कारण है कि उन्हें तकनीकी समझ और प्रशासनिक कौशल का बेहतरीन मिश्रण माना जाता है।
इंजीनियरिंग से शुरू हुआ सफर
सीबीएसई के नए चेयरमैन ने अपनी स्नातक शिक्षा यांत्रिक अभियांत्रिकी विषय में पूरी की। उन्होंने पुणे स्थित प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से अभियांत्रिकी की डिग्री हासिल की। यह विश्वविद्यालय देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है और यहां से पढ़कर निकले अनेक विद्यार्थी प्रशासन, उद्योग और शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे हैं।
तकनीकी शिक्षा ने दी मजबूत नींव
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने औद्योगिक अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उच्च अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रबंधन संस्थान से स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया। यह संस्थान बाद में भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के रूप में विकसित हुआ। देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में इसकी पहचान आज भी बेहद मजबूत मानी जाती है।
प्रबंधन की पढ़ाई ने बढ़ाई क्षमता
शिक्षा पूरी करने के बाद प्रशांत लोखंडे ने भारतीय प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। वर्ष 2001 में वे आईएएस अधिकारी बने और इसके बाद विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया। उन्होंने केंद्र सरकार और विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में कई अहम पदों पर काम किया है। यही अनुभव अब सीबीएसई के संचालन में उनके लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी और प्रबंधन पृष्ठभूमि वाले अधिकारी के रूप में लोखंडे बोर्ड में नई सोच लेकर आ सकते हैं। वर्तमान समय में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अहम माना जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
हाल के महीनों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था को लेकर कई राज्यों में विवाद और शिकायतें सामने आई थीं। मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी खामियों को लेकर शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा भी हुई थी। ऐसे माहौल में नए चेयरमैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसा कायम करने और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की होगी।
नए चेयरमैन के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
सीबीएसई देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल है और इसके तहत लाखों विद्यार्थी हर वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशांत लोखंडे की नियुक्ति केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय भी मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि उनके नेतृत्व में बोर्ड किस तरह के सुधारात्मक कदम उठाता है और छात्रों को किस प्रकार बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाता है।



