Friday, June 12, 2026
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जेईई में शानदार रैंक भी नहीं बचाएगी सीट! आईआईटी रुड़की ने 75% नियम पर दिया बड़ा फैसला

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 07:50 PM

जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम आने और जोसा काउंसलिंग शुरू होने के बीच लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। आईआईटी रुड़की ने साफ कर दिया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिले के लिए बारहवीं में 75 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता बरकरार रहेगी। यानी जेईई में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद निर्धारित अंक नहीं होने पर अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं मिल सकेगा।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बारहवीं के अंकों में कथित गड़बड़ियों को लेकर बहस चल रही है। इसी बीच यह मांग उठ रही थी कि इस वर्ष 75 प्रतिशत अंकों की शर्त में छूट दी जाए। हालांकि आईआईटी रुड़की ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस नियम में किसी प्रकार की ढील संभव नहीं है।

जोसा काउंसलिंग के बीच आया बड़ा बयान
जेईई एडवांस्ड का परिणाम घोषित होने के बाद देशभर के अभ्यर्थी जोसा काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। इसी दौरान आईआईटी रुड़की का बयान सामने आया है, जिसने उन छात्रों की चिंता बढ़ा दी है जिनके बारहवीं में 75 प्रतिशत से कम अंक आए हैं।

कई छात्रों की उम्मीदों को लगा झटका
ऐसे हजारों छात्र हैं जिन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन बारहवीं परीक्षा में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर सके। इन छात्रों को उम्मीद थी कि इस वर्ष विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नियम में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन संस्थान ने ऐसी संभावना से इनकार कर दिया है।

मूल्यांकन प्रणाली को लेकर क्यों मचा विवाद?
इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नई ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत किया था। परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अंक कम मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

छात्रों ने उठाए कई सवाल
कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां धुंधली मिलने की शिकायत की, जबकि कुछ ने उत्तरों के बावजूद अंक नहीं मिलने का दावा किया। कई मामलों में मूल्यांकन में असंगति के आरोप भी लगाए गए हैं।

पुनर्मूल्यांकन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन
परिणाम घोषित होने के बाद हजारों छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन और पुनः जांच के लिए आवेदन किया है। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो 75 प्रतिशत अंक की सीमा से थोड़ा नीचे रह गए हैं और अब अपने अंकों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।

प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
इन छात्रों का मानना है कि यदि पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ते हैं तो वे आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की पात्रता हासिल कर सकते हैं। यही वजह है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पर पूरे देश के छात्रों की नजर बनी हुई है।

आईआईटी रुड़की ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी से बातचीत में संस्थान ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया में देश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों के छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में किसी एक वर्ष के लिए पात्रता मानदंड बदलना उचित नहीं होगा।

पहले भी छात्र गंवा चुके हैं सीटें
संस्थान का कहना है कि 75 प्रतिशत अंकों का नियम पहले से लागू है और इसकी जानकारी समय रहते जारी कर दी गई थी। पिछले वर्षों में भी कई छात्रों को केवल इसी पात्रता शर्त के कारण प्रतिष्ठित संस्थानों में सीट नहीं मिल सकी थी।

फिर भी छात्रों को दी गई उम्मीद
हालांकि संस्थान ने यह भी कहा है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ लगातार संपर्क में है और जिन छात्रों ने मूल्यांकन को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं, उनके मामलों पर नजर रखी जा रही है।

जांच प्रक्रिया पर रहेगा फोकस
संस्थान ने संकेत दिया है कि यदि किसी छात्र के साथ मूल्यांकन में वास्तविक त्रुटि हुई है तो संबंधित प्रक्रिया के जरिए उसका समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी। लेकिन पात्रता नियम में बदलाव की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती।

केंद्र सरकार भी कर रही है निगरानी
मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने भी मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है। समिति छात्रों की शिकायतों और मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।

आगे क्या होगा?
अब लाखों छात्रों की नजर पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। यदि अंकों में बदलाव होता है तो कई छात्रों की प्रवेश पात्रता प्रभावित हो सकती है। लेकिन अभी के लिए एक बात स्पष्ट है कि आईआईटी में दाखिले के लिए 75 प्रतिशत अंकों की शर्त यथावत बनी रहेगी।

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जेईई में शानदार रैंक भी नहीं बचाएगी सीट! आईआईटी रुड़की ने 75% नियम पर दिया बड़ा फैसला

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 07:50 PM

जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम आने और जोसा काउंसलिंग शुरू होने के बीच लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। आईआईटी रुड़की ने साफ कर दिया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिले के लिए बारहवीं में 75 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता बरकरार रहेगी। यानी जेईई में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद निर्धारित अंक नहीं होने पर अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं मिल सकेगा।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बारहवीं के अंकों में कथित गड़बड़ियों को लेकर बहस चल रही है। इसी बीच यह मांग उठ रही थी कि इस वर्ष 75 प्रतिशत अंकों की शर्त में छूट दी जाए। हालांकि आईआईटी रुड़की ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इस नियम में किसी प्रकार की ढील संभव नहीं है।

जोसा काउंसलिंग के बीच आया बड़ा बयान
जेईई एडवांस्ड का परिणाम घोषित होने के बाद देशभर के अभ्यर्थी जोसा काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। इसी दौरान आईआईटी रुड़की का बयान सामने आया है, जिसने उन छात्रों की चिंता बढ़ा दी है जिनके बारहवीं में 75 प्रतिशत से कम अंक आए हैं।

कई छात्रों की उम्मीदों को लगा झटका
ऐसे हजारों छात्र हैं जिन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन बारहवीं परीक्षा में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर सके। इन छात्रों को उम्मीद थी कि इस वर्ष विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नियम में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन संस्थान ने ऐसी संभावना से इनकार कर दिया है।

मूल्यांकन प्रणाली को लेकर क्यों मचा विवाद?
इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नई ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत किया था। परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अंक कम मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

छात्रों ने उठाए कई सवाल
कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां धुंधली मिलने की शिकायत की, जबकि कुछ ने उत्तरों के बावजूद अंक नहीं मिलने का दावा किया। कई मामलों में मूल्यांकन में असंगति के आरोप भी लगाए गए हैं।

पुनर्मूल्यांकन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन
परिणाम घोषित होने के बाद हजारों छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन और पुनः जांच के लिए आवेदन किया है। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो 75 प्रतिशत अंक की सीमा से थोड़ा नीचे रह गए हैं और अब अपने अंकों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।

प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
इन छात्रों का मानना है कि यदि पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ते हैं तो वे आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की पात्रता हासिल कर सकते हैं। यही वजह है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पर पूरे देश के छात्रों की नजर बनी हुई है।

आईआईटी रुड़की ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी से बातचीत में संस्थान ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया में देश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों के छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में किसी एक वर्ष के लिए पात्रता मानदंड बदलना उचित नहीं होगा।

पहले भी छात्र गंवा चुके हैं सीटें
संस्थान का कहना है कि 75 प्रतिशत अंकों का नियम पहले से लागू है और इसकी जानकारी समय रहते जारी कर दी गई थी। पिछले वर्षों में भी कई छात्रों को केवल इसी पात्रता शर्त के कारण प्रतिष्ठित संस्थानों में सीट नहीं मिल सकी थी।

फिर भी छात्रों को दी गई उम्मीद
हालांकि संस्थान ने यह भी कहा है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ लगातार संपर्क में है और जिन छात्रों ने मूल्यांकन को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं, उनके मामलों पर नजर रखी जा रही है।

जांच प्रक्रिया पर रहेगा फोकस
संस्थान ने संकेत दिया है कि यदि किसी छात्र के साथ मूल्यांकन में वास्तविक त्रुटि हुई है तो संबंधित प्रक्रिया के जरिए उसका समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी। लेकिन पात्रता नियम में बदलाव की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती।

केंद्र सरकार भी कर रही है निगरानी
मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने भी मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है। समिति छात्रों की शिकायतों और मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।

आगे क्या होगा?
अब लाखों छात्रों की नजर पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। यदि अंकों में बदलाव होता है तो कई छात्रों की प्रवेश पात्रता प्रभावित हो सकती है। लेकिन अभी के लिए एक बात स्पष्ट है कि आईआईटी में दाखिले के लिए 75 प्रतिशत अंकों की शर्त यथावत बनी रहेगी।

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