By Malay Ojha | Published: 07 June 2026 | 02:00 PM
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सरकार के विचाराधीन एक प्रस्ताव के अनुसार भविष्य में प्रश्न तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों को यह तक नहीं बताया जाएगा कि उनके द्वारा बनाए गए प्रश्न आखिर किस परीक्षा में उपयोग किए जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि इससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार एजेंसी एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रही है जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ केवल प्रश्न तैयार करेंगे, लेकिन उन्हें परीक्षा का नाम नहीं बताया जाएगा। उनके द्वारा तैयार प्रश्नों को एक बड़े केंद्रीय भंडार में जमा किया जाएगा। बाद में इसी संग्रह से अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किया जाएगा। इससे अंतिम प्रश्नपत्र की जानकारी बेहद सीमित लोगों तक ही पहुंचेगी।
कम लोगों को होगी अंतिम प्रश्नपत्र की जानकारी
प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है। अधिकारियों का मानना है कि जितने कम लोगों को अंतिम प्रश्नपत्र की जानकारी होगी, लीक की संभावना उतनी ही कम होगी। यही कारण है कि पूरे सिस्टम को नए सिरे से डिजाइन करने पर विचार किया जा रहा है।
जांच के बाद सामने आई नई चिंताएं
यह प्रस्ताव उस बड़े पेपर लीक मामले के बाद चर्चा में आया है जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी ने परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इनमें अनुवाद कार्य से जुड़े लोग और विषय विशेषज्ञ भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की शुरुआती प्रक्रिया में ही गोपनीयता भंग हुई थी।
विशेषज्ञों की भूमिका में होगा बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था लागू होने पर विषय विशेषज्ञ किसी विशेष परीक्षा के लिए प्रश्न तैयार नहीं करेंगे। उनकी जिम्मेदारी केवल गुणवत्तापूर्ण प्रश्न तैयार करने तक सीमित रहेगी। इसके बाद एजेंसी अलग स्तर पर इन प्रश्नों का चयन कर प्रश्नपत्र तैयार करेगी। इससे किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी जानकारी नहीं होगी।
हजारों प्रश्नों का बनेगा केंद्रीय भंडार
अधिकारियों के अनुसार भविष्य में विभिन्न विषयों के हजारों प्रश्नों का विशाल संग्रह तैयार किया जा सकता है। आवश्यकता के अनुसार इसी संग्रह से अलग-अलग परीक्षाओं के लिए प्रश्न चुने जाएंगे। इससे प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बन सकती है।
सिस्टम की खामियों पर फोकस
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि पेपर लीक केवल कागज या प्रश्नपत्र की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की संरचना से जुड़ा विषय है। इसलिए सुरक्षा बढ़ाने के लिए केवल निगरानी ही नहीं बल्कि सिस्टम के ढांचे में बदलाव भी जरूरी है। इसी सोच के तहत नए मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
आने वाले वर्षों की परीक्षाओं पर नजर
हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल लागू होता है तो देश की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बढ़ सकती हैं। लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार इस प्रस्ताव को कब और किस रूप में मंजूरी देती है।
छात्रों का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने छात्रों का भरोसा प्रभावित किया है। ऐसे में नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करना भी होगा। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो यह देश की परीक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।



