By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 | 07:49 PM
निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बीच पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि अब निजी स्कूल मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार जल्द ही ऐसा कानून लाने जा रही है, जिसके तहत फीस बढ़ोतरी की सीमा तय होगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद निजी स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में अधिकतम पांच प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक बढ़ोतरी करने वाले स्कूलों को जवाब देना होगा।
पंजाब सरकार का मानना है कि अनियंत्रित फीस वृद्धि के कारण बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखना जरूरी है।
अभिभावकों को लौटानी पड़ सकती है अतिरिक्त राशि
सरकार ने संकेत दिया है कि पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूली गई है, तो अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो लंबे समय से बढ़ती फीस को लेकर आवाज उठा रहे थे।
किताब और वर्दी को लेकर भी सख्ती
पंजाब सरकार ने केवल फीस तक ही अपने कदम सीमित नहीं रखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान से किताबें, कॉपियां या वर्दी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा।
स्कूलों को पहले से पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार सामान खरीद सकें।
नया कानून लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इस विषय पर व्यापक कानून तैयार कर रही है। प्रस्तावित कानून को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पहले अध्यादेश के माध्यम से कुछ प्रावधान लागू करने की तैयारी भी की जा रही है।
सरकार का दावा है कि यह कानून सभी प्रकार के निजी शैक्षणिक संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा।
हर साल होगा स्कूलों का लेखा-जोखा
नए नियमों के तहत निजी स्कूलों की वित्तीय गतिविधियों की नियमित जांच भी कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों का वार्षिक लेखा परीक्षण कराया जाएगा।
इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि फीस वृद्धि वास्तव में आवश्यक है या फिर केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से की जा रही है।
शिकायतों की होगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि फीस बढ़ोतरी से जुड़ी जो शिकायतें पहले से विभिन्न अधिकारियों के पास लंबित हैं, उनकी भी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब सरकार का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं बल्कि उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना भी है।
छात्रा की मौत के बाद तेज हुई बहस
हाल ही में अमृतसर में एक छात्रा की आत्महत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था और फीस वसूली के तरीकों को लेकर गंभीर सवाल उठे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी बच्चे को आर्थिक कारणों से मानसिक दबाव झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा संस्थानों को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।
बच्चों और अभिभावकों पर दबाव नहीं चलेगा
पंजाब सरकार के पास ऐसी कई शिकायतें पहुंची हैं जिनमें फीस बकाया होने पर विद्यार्थियों को परेशान करने, परीक्षा संबंधी दस्तावेज रोकने या अन्य प्रकार का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ऐसी प्रथाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है तो इसका सीधा लाभ लाखों अभिभावकों और विद्यार्थियों को मिलेगा। इससे निजी शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी पर अंकुश लगेगा।
अब सभी की नजर पंजाब सरकार द्वारा लाए जाने वाले नए कानून और उसके अंतिम स्वरूप पर टिकी हुई है।



