Saturday, June 13, 2026
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331 पद खाली रह गए! आखिर क्या है Shorthand, जिसने उत्तर प्रदेश की इस बड़ी भर्ती में किसी को भी नहीं बनने दिया अधिकारी?

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 02:50 PM

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से जारी अपर निजी सचिव भर्ती परीक्षा का परिणाम इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि सैकड़ों पदों पर भर्ती के लिए आयोजित पूरी चयन प्रक्रिया के बाद भी एक भी अभ्यर्थी अंतिम चरण पार नहीं कर पाया। नतीजतन सभी 331 पद खाली रह गए। इस परिणाम ने न केवल प्रतियोगी छात्रों को चौंकाया है बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था में Shorthand (आशुलेखन) की भूमिका पर भी नई बहस शुरू कर दी है।

आयोग ने अपर निजी सचिव के 331 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की थी। लिखित परीक्षा और अन्य चरणों को पार करने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दौर में आशुलेखन परीक्षा देनी थी। लेकिन परिणाम सामने आने के बाद पता चला कि कोई भी उम्मीदवार निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सका। यही वजह है कि सभी पद रिक्त रह गए।

क्या होता है आशुलेखन?
आशुलेखन एक विशेष लेखन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति द्वारा बोले गए शब्दों को अत्यंत तेज गति से लिखना होता है। इसमें सामान्य शब्दों की जगह विशेष संकेत, चिन्ह और संक्षिप्त प्रतीकों का उपयोग किया जाता है। पुराने समय में जब भाषण रिकॉर्ड करने या ऑडियो को सुरक्षित रखने के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, तब यही तकनीक सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती थी।

केवल लेखन नहीं, एक विशेष दक्षता
कई लोगों को लगता है कि आशुलेखन केवल तेज लिखने की कला है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। इसमें ध्वनियों के आधार पर बनाए गए विशेष चिन्हों को याद रखना पड़ता है। अभ्यर्थी को सुनते ही तुरंत संकेतों में लिखना होता है और बाद में उसे सामान्य भाषा में टाइप भी करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में गति और शुद्धता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होती हैं।

क्यों मुश्किल मानी जाती है यह परीक्षा?
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अक्सर 80 से 100 शब्द प्रति मिनट या उससे अधिक गति से डिक्टेशन दिया जाता है। इतनी तेज रफ्तार पकड़ना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार आशुलेखन में दक्षता हासिल करने के लिए लंबे समय तक नियमित अभ्यास करना पड़ता है। यही कारण है कि कई उम्मीदवार लिखित परीक्षा और टंकण परीक्षा में सफल हो जाते हैं, लेकिन आशुलेखन चरण में पिछड़ जाते हैं।

बदलती तकनीक ने घटाई जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में तकनीक ने कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है। अब मोबाइल फोन, ऑडियो रिकॉर्डर, आवाज को लिखित रूप में बदलने वाले सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण उपलब्ध हैं। इन साधनों के कारण निजी क्षेत्र में आशुलेखन की मांग लगातार कम हुई है। अधिकांश युवा अब उन कौशलों पर ध्यान दे रहे हैं जिनकी रोजगार बाजार में अधिक आवश्यकता है।

फिर भी सरकारी नौकरियों में क्यों जरूरी है?
तकनीकी प्रगति के बावजूद कई सरकारी कार्यालयों में आज भी आशुलेखन जानने वाले कर्मचारियों की जरूरत बनी हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के भाषण, गोपनीय बैठकों के विवरण, महत्वपूर्ण दस्तावेजों और तत्काल डिक्टेशन को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित आशुलेखकों की भूमिका अहम मानी जाती है। यही कारण है कि निजी सचिव, अपर निजी सचिव और आशुलिपिक जैसे पदों पर भर्ती के दौरान यह योग्यता अनिवार्य रखी जाती है।

युवाओं के सामने नई चुनौती
भर्ती परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आशुलेखन अब प्रतियोगी परीक्षाओं का सबसे कठिन चरण बनता जा रहा है। एक ओर इसका दैनिक उपयोग कम होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नौकरियों में इसकी अनिवार्यता बनी हुई है। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने यह चुनौती है कि वे इस विशेष कौशल को सीखने में समय निवेश करें या अन्य आधुनिक कौशलों पर ध्यान केंद्रित करें।

क्या भविष्य में नियम बदल सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में सरकारी विभागों में भी डिजिटल रिकॉर्डिंग और आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग बढ़ता है तो आशुलेखन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार हो सकता है। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई संभावना दिखाई नहीं देती। मौजूदा व्यवस्था में यह कौशल अभी भी कई प्रतिष्ठित सरकारी पदों तक पहुंचने की महत्वपूर्ण सीढ़ी बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश की इस भर्ती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केवल लिखित परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं है। कुछ पदों के लिए विशेष दक्षताओं की आवश्यकता होती है और आशुलेखन उनमें सबसे महत्वपूर्ण कौशलों में से एक है। जो अभ्यर्थी सरकारी क्षेत्र में निजी सचिव या आशुलिपिक जैसे पदों का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह परिणाम एक बड़ा संदेश है कि इस कौशल को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।

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331 पद खाली रह गए! आखिर क्या है Shorthand, जिसने उत्तर प्रदेश की इस बड़ी भर्ती में किसी को भी नहीं बनने दिया अधिकारी?

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 02:50 PM

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से जारी अपर निजी सचिव भर्ती परीक्षा का परिणाम इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि सैकड़ों पदों पर भर्ती के लिए आयोजित पूरी चयन प्रक्रिया के बाद भी एक भी अभ्यर्थी अंतिम चरण पार नहीं कर पाया। नतीजतन सभी 331 पद खाली रह गए। इस परिणाम ने न केवल प्रतियोगी छात्रों को चौंकाया है बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था में Shorthand (आशुलेखन) की भूमिका पर भी नई बहस शुरू कर दी है।

आयोग ने अपर निजी सचिव के 331 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की थी। लिखित परीक्षा और अन्य चरणों को पार करने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दौर में आशुलेखन परीक्षा देनी थी। लेकिन परिणाम सामने आने के बाद पता चला कि कोई भी उम्मीदवार निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सका। यही वजह है कि सभी पद रिक्त रह गए।

क्या होता है आशुलेखन?
आशुलेखन एक विशेष लेखन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति द्वारा बोले गए शब्दों को अत्यंत तेज गति से लिखना होता है। इसमें सामान्य शब्दों की जगह विशेष संकेत, चिन्ह और संक्षिप्त प्रतीकों का उपयोग किया जाता है। पुराने समय में जब भाषण रिकॉर्ड करने या ऑडियो को सुरक्षित रखने के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, तब यही तकनीक सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती थी।

केवल लेखन नहीं, एक विशेष दक्षता
कई लोगों को लगता है कि आशुलेखन केवल तेज लिखने की कला है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। इसमें ध्वनियों के आधार पर बनाए गए विशेष चिन्हों को याद रखना पड़ता है। अभ्यर्थी को सुनते ही तुरंत संकेतों में लिखना होता है और बाद में उसे सामान्य भाषा में टाइप भी करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में गति और शुद्धता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होती हैं।

क्यों मुश्किल मानी जाती है यह परीक्षा?
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अक्सर 80 से 100 शब्द प्रति मिनट या उससे अधिक गति से डिक्टेशन दिया जाता है। इतनी तेज रफ्तार पकड़ना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार आशुलेखन में दक्षता हासिल करने के लिए लंबे समय तक नियमित अभ्यास करना पड़ता है। यही कारण है कि कई उम्मीदवार लिखित परीक्षा और टंकण परीक्षा में सफल हो जाते हैं, लेकिन आशुलेखन चरण में पिछड़ जाते हैं।

बदलती तकनीक ने घटाई जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में तकनीक ने कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है। अब मोबाइल फोन, ऑडियो रिकॉर्डर, आवाज को लिखित रूप में बदलने वाले सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण उपलब्ध हैं। इन साधनों के कारण निजी क्षेत्र में आशुलेखन की मांग लगातार कम हुई है। अधिकांश युवा अब उन कौशलों पर ध्यान दे रहे हैं जिनकी रोजगार बाजार में अधिक आवश्यकता है।

फिर भी सरकारी नौकरियों में क्यों जरूरी है?
तकनीकी प्रगति के बावजूद कई सरकारी कार्यालयों में आज भी आशुलेखन जानने वाले कर्मचारियों की जरूरत बनी हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों के भाषण, गोपनीय बैठकों के विवरण, महत्वपूर्ण दस्तावेजों और तत्काल डिक्टेशन को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित आशुलेखकों की भूमिका अहम मानी जाती है। यही कारण है कि निजी सचिव, अपर निजी सचिव और आशुलिपिक जैसे पदों पर भर्ती के दौरान यह योग्यता अनिवार्य रखी जाती है।

युवाओं के सामने नई चुनौती
भर्ती परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आशुलेखन अब प्रतियोगी परीक्षाओं का सबसे कठिन चरण बनता जा रहा है। एक ओर इसका दैनिक उपयोग कम होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नौकरियों में इसकी अनिवार्यता बनी हुई है। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने यह चुनौती है कि वे इस विशेष कौशल को सीखने में समय निवेश करें या अन्य आधुनिक कौशलों पर ध्यान केंद्रित करें।

क्या भविष्य में नियम बदल सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में सरकारी विभागों में भी डिजिटल रिकॉर्डिंग और आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग बढ़ता है तो आशुलेखन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार हो सकता है। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई संभावना दिखाई नहीं देती। मौजूदा व्यवस्था में यह कौशल अभी भी कई प्रतिष्ठित सरकारी पदों तक पहुंचने की महत्वपूर्ण सीढ़ी बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश की इस भर्ती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केवल लिखित परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं है। कुछ पदों के लिए विशेष दक्षताओं की आवश्यकता होती है और आशुलेखन उनमें सबसे महत्वपूर्ण कौशलों में से एक है। जो अभ्यर्थी सरकारी क्षेत्र में निजी सचिव या आशुलिपिक जैसे पदों का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह परिणाम एक बड़ा संदेश है कि इस कौशल को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।

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