By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 | 02:06 PM
विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और शोध स्तर की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। खास बात यह है कि पढ़ाई से लेकर रहने और यात्रा तक का अधिकांश खर्च सरकार वहन करती है।
देश के कई प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक कारणों से विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा नहीं कर पाते। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य योग्य विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें बेहतर अवसरों तक पहुंचाना है।
किन छात्रों को मिलता है योजना का लाभ
यह योजना मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों, भूमिहीन कृषि मजदूरों तथा पारंपरिक कारीगर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है। सरकार का प्रयास है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्र भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों तक पहुंच सकें।
पढ़ाई का लगभग पूरा खर्च उठाती है सरकार
राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत विद्यार्थियों को व्यापक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसमें विश्वविद्यालय की फीस, आवास और भोजन के लिए भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, वीजा शुल्क तथा विदेश आने-जाने का हवाई यात्रा व्यय भी शामिल होता है। इससे छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव काफी कम हो जाता है।
मेधावी छात्रों को मिलता है बड़ा अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने से विद्यार्थियों को वैश्विक अनुभव, आधुनिक शोध सुविधाएं और बेहतर रोजगार के अवसर मिलते हैं। ऐसे में यह योजना उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है जो अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बनती है।
आय सीमा को लेकर क्या हैं नियम
योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने आय संबंधी शर्तें निर्धारित की हैं। अनुसूचित जाति, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदाय, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर परिवारों के आवेदकों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय आठ लाख रुपये से कम होनी चाहिए। वहीं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है।
आयु सीमा का भी रखना होगा ध्यान
आवेदन करने वाले उम्मीदवार की आयु निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। सामान्यतः आवेदन के समय आवेदक की उम्र 35 वर्ष से कम होना आवश्यक है। इसके अलावा उम्मीदवार को अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े सभी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होते हैं।
विदेशी विश्वविद्यालय से प्रवेश जरूरी
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्र को किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर या शोध कार्यक्रम के लिए प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त होना चाहिए। बिना प्रवेश प्रस्ताव के आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती। आमतौर पर प्रतिष्ठित और बेहतर रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्राथमिकता मिलती है।
आवेदन प्रक्रिया कैसे पूरी करें
राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए आवेदन संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से किया जाता है। पात्र छात्र निर्धारित पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही रूप में अपलोड करना आवश्यक होता है।
आवेदन से पहले इन बातों की करें जांच
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आवेदन करने से पहले छात्र पात्रता शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन की अंतिम तिथि की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। छोटी सी गलती भी आवेदन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए आधिकारिक दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
हजारों छात्रों के लिए बन रही उम्मीद
राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना उन छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता देती है बल्कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान करती है।



