By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 | 02:26 PM
दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को लेकर परेशान माता-पिता के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 2026-27 से शुरू होने वाले अगले तीन शैक्षणिक वर्षों की फीस तय करने की प्रक्रिया के लिए नई समय-सीमा लागू कर दी है। इसके तहत हर स्कूल में शुल्क तय करने वाली समिति बनाना जरूरी होगा और नई फीस मंजूर होने तक स्कूल 1 अप्रैल 2025 को लागू शुल्क से ज्यादा रकम नहीं ले सकेंगे।
सरकार की ओर से जारी दिल्ली स्कूल शिक्षा (कठिनाइयों को दूर करना) आदेश, 2026 का मकसद फीस से जुड़े नए कानून को लागू करने में आ रही शुरुआती दिक्कतों को दूर करना है। यह आदेश दिल्ली राजपत्र में 1 फरवरी 2026 को प्रकाशित किया गया। सरकार के मुताबिक कानून दिसंबर 2025 में लागू हुआ था, जबकि उस समय तक चालू शैक्षणिक सत्र के लिए फीस से जुड़ी कई प्रक्रियाएं पहले ही पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में नए नियमों को उसी समय लागू करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल था।
नए आदेश के मुताबिक राजपत्र में आदेश प्रकाशित होने के 10 दिनों के भीतर हर स्कूल को स्कूल स्तर की शुल्क नियमन समिति बनानी होगी। हालांकि, जिन स्कूलों में 24 दिसंबर 2025 के पहले के आदेश के तहत यह समिति गठित की जा चुकी है, उन्हें दोबारा समिति बनाने की जरूरत नहीं होगी। पहले से बनी समितियों को नए आदेश के तहत मान्य माना जाएगा।
समिति में माता-पिता की भी होगी भूमिका
इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा यह है कि स्कूल की फीस तय करने की प्रक्रिया केवल स्कूल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी। कानून के तहत बनाई जाने वाली स्कूल स्तर की समिति में स्कूल प्रबंधन के साथ शिक्षक और माता-पिता के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी होगी। इसका उद्देश्य फीस तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और अभिभावकों की शिकायतों को व्यवस्था के भीतर जगह देना है।
स्कूलों को 14 दिन में देना होगा फीस का प्रस्ताव
समिति के गठन के बाद स्कूल प्रबंधन को 14 दिनों के भीतर अगले तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए अपनी प्रस्तावित फीस का पूरा ढांचा समिति के सामने रखना होगा। यह अवधि 2026-27 से शुरू होकर 2028-29 तक चलेगी। समिति प्रस्ताव की जांच करेगी और कानून में तय प्रावधानों के आधार पर फीस तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
फीस पर तब तक रोक, जब तक नई दर तय नहीं
माता-पिता के लिए इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फीस की अंतरिम व्यवस्था है। जब तक 2026-27 से 2028-29 के लिए नई फीस तय और मंजूर नहीं हो जाती, तब तक स्कूल 1 अप्रैल 2025 को लागू शुल्क से अधिक फीस नहीं ले सकेंगे। यानी नई फीस व्यवस्था लागू होने तक पुराने शुल्क को आधार बनाया जाएगा।
ज्यादा फीस वसूली गई तो बाद में हिसाब होगा
अगर नई फीस तय होने से पहले किसी स्कूल ने निर्धारित सीमा से ज्यादा शुल्क वसूला है, तो उस अतिरिक्त राशि को अंतिम रूप से तय होने वाली फीस के साथ समायोजित किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहले से वसूली गई अतिरिक्त रकम को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। सरकार ने अंतरिम अवधि के लिए इसी तरह की व्यवस्था रखी है ताकि फीस को लेकर माता-पिता और स्कूलों के बीच विवाद कम हो।
शिकायत के लिए जिला स्तर पर बनेगी अलग समिति
फीस को लेकर विवाद होने पर माता-पिता के पास शिकायत और अपील का रास्ता भी रहेगा। आदेश के मुताबिक शिक्षा विभाग के हर शिक्षा जिले में जिला शुल्क अपीलीय समिति बनाई जाएगी। इन समितियों के गठन के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। यह व्यवस्था उन मामलों में अहम होगी, जहां माता-पिता या अन्य संबंधित पक्ष स्कूल द्वारा तय शुल्क से संतुष्ट नहीं होंगे।
तीन साल के लिए एक साथ तय होगी फीस
नई व्यवस्था में फीस हर साल मनमाने तरीके से बदलने के बजाय तीन शैक्षणिक वर्षों के एक चक्र के लिए तय की जाएगी। पहला चक्र 2026-27 से शुरू होकर 2028-29 तक चलेगा। इससे स्कूलों और माता-पिता दोनों को पहले से यह पता रहेगा कि शुल्क निर्धारण किस प्रक्रिया से होगा और किस अवधि के लिए लागू रहेगा।
पुराने नियमों से अलग क्यों करनी पड़ी नई व्यवस्था?
दरअसल, दिल्ली स्कूल शिक्षा में फीस की पारदर्शिता और नियमन से जुड़ा नया कानून 10 दिसंबर 2025 को लागू हुआ था। कानून के तहत स्कूल स्तर और जिला स्तर पर अलग-अलग समितियां बनाने का प्रावधान किया गया। लेकिन कानून लागू होने का समय शैक्षणिक सत्र के बीच में था। इस वजह से उस सत्र के लिए कानून में बताई गई मूल समय-सारिणी के मुताबिक समितियां बनाना और फीस की पूरी प्रक्रिया शुरू करना आसान नहीं था।
सरकार ने इसी दिक्कत को दूर करने के लिए जारी किया आदेश
सरकार ने इसी व्यावहारिक परेशानी को देखते हुए कठिनाइयों को दूर करने की अपनी कानूनी शक्ति का इस्तेमाल किया और नई समय-सारिणी तय की। आदेश का मकसद कानून को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे ऐसे समय पर लागू करने का रास्ता बनाना है जब स्कूलों की फीस तय करने की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके।
माता-पिता के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद फीस बढ़ाने का फैसला केवल स्कूल प्रबंधन की इच्छा पर निर्भर नहीं रहेगा। फीस प्रस्ताव की जांच होगी, समिति के स्तर पर उस पर विचार किया जाएगा और विवाद की स्थिति में जिला स्तर पर अपील का रास्ता भी मौजूद रहेगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि नई फीस तय होने तक 1 अप्रैल 2025 के शुल्क स्तर से ज्यादा वसूली नहीं की जा सकेगी।
आगे भी जारी रहेगा फीस नियमन का ढांचा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 से 2028-29 के लिए तय की गई यह व्यवस्था शुरुआती तीन साल के शुल्क चक्र के लिए विशेष तौर पर बनाई गई है। इसके बाद फीस तय करने की प्रक्रिया कानून और उससे जुड़े नियमों में पहले से तय समय-सारिणी के मुताबिक चलेगी। यानी यह आदेश मुख्य रूप से नए कानून को जमीन पर लागू करने के दौरान आई शुरुआती दिक्कतों का समाधान करने के लिए है।
स्कूल फीस को लेकर विवाद में अब शिकायत का रास्ता
दिल्ली सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा असर उन माता-पिता पर पड़ सकता है, जो हर साल अचानक बढ़ने वाली स्कूल फीस को लेकर परेशान रहते हैं। नई व्यवस्था में फीस तय करने की प्रक्रिया को नियमों और समितियों के दायरे में लाने की कोशिश की गई है। हालांकि, इस कानून को लेकर निजी स्कूलों की ओर से कानूनी आपत्तियां भी सामने आई हैं और इसके लागू होने को लेकर अदालतों में मामला उठा है। इसलिए आगे की स्थिति पर भी नजर बनी रहेगी।
अब फीस बढ़ोतरी पर नजर रखना आसान होगा
कुल मिलाकर दिल्ली सरकार का नया आदेश स्कूल फीस के मामले में एक तय प्रक्रिया बनाने की कोशिश है। 2026-27 से शुरू होने वाले तीन साल के शुल्क चक्र के लिए स्कूलों को समिति के सामने फीस का प्रस्ताव रखना होगा, नई फीस तय होने तक पुराने शुल्क स्तर से अधिक वसूली पर रोक रहेगी और विवाद की स्थिति में जिला स्तर पर अपील की व्यवस्था होगी। ऐसे में माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि स्कूल की ओर से मांगी जा रही फीस को नई व्यवस्था के तहत तय शुल्क से मिलाकर देखा जा सकेगा।



