By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 | 02:56 PM
हवाई जहाज उड़ाने वाले पायलटों के लिए छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि उड़ान के दौरान उनकी सेहत और मानसिक स्थिति को लेकर कई सख्त नियम बनाए गए हैं। हाल ही में फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान के पायलट के नशीले पदार्थ की जांच में दूसरी बार भी गांजा मिलने की खबर के बाद विमानन सुरक्षा से जुड़े ये नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। जांच के दौरान पायलट के नमूने में गांजा पाए जाने की पुष्टि हुई है।
यह मामला 4 अगस्त 2026 को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़ा है। उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में यात्रियों और चालक दल के कई सदस्य घायल हुए। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या को लेकर अंतर है, जबकि जांच एजेंसियां अभी घटना के पूरे कारणों की पड़ताल कर रही हैं। विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया था।
जांच में पायलट के नशे की बात सामने आई
घटना के बाद विमान में मौजूद दोनों पायलटों की नशीले पदार्थों से जुड़ी जांच की गई। रिपोर्टों के मुताबिक विमान के मुख्य पायलट की पहली जांच के बाद नमूना पुष्टि के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। अब पुष्टि वाली जांच में भी गांजा पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि विमान के अचानक नीचे आने और पायलट की जांच के नतीजे के बीच सीधा संबंध जांच पूरी होने से पहले मान लेना उचित नहीं होगा। दुर्घटना जांच ब्यूरो ने भी लोगों और मीडिया से जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की है।
आखिर पायलटों के खाने का नियम इतना खास क्यों है?
अब सवाल यह है कि पायलटों के खाने को लेकर भी अलग नियम क्यों बनाए जाते हैं? दरअसल, उड़ान के दौरान अगर दोनों पायलट एक ही दूषित खाना खा लें और उसकी वजह से दोनों की तबीयत खराब हो जाए तो विमान को संभालना बेहद मुश्किल हो सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए कई विमानन कंपनियां पायलटों के लिए अलग भोजन या अलग समय पर भोजन की व्यवस्था करती हैं।
एक ही खाना दोनों पायलटों को न देने के पीछे पुरानी घटना
इस व्यवस्था का उल्लेख 3 फरवरी 1975 की जापान एयरलाइंस की एक चर्चित घटना के संदर्भ में मिलता है। उस उड़ान में दूषित भोजन खाने के बाद बड़ी संख्या में यात्रियों की तबीयत खराब हो गई थी। जांच में भोजन में स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया से बने विषैले तत्व पाए गए थे। गनीमत रही कि पायलटों ने वह भोजन नहीं खाया और विमान को सुरक्षित तरीके से संभाला जा सका।
दोनों पायलटों को एक जैसा खाना क्यों नहीं दिया जाता?
इस घटना के बाद विमानन क्षेत्र में यह समझ और मजबूत हुई कि पायलटों को ऐसा भोजन देने से बचना चाहिए जिससे दोनों की तबीयत एक साथ खराब होने का खतरा हो। हालांकि इसे हर विमान और हर एयरलाइन पर लागू होने वाला एक जैसा कानूनी नियम समझना सही नहीं है। अलग-अलग विमानन कंपनियों की अपनी सुरक्षा प्रक्रियाएं हो सकती हैं। मूल उद्देश्य एक ही है—अगर भोजन की वजह से एक पायलट बीमार पड़ भी जाए तो दूसरा पायलट पूरी तरह सक्षम रहे और विमान को सुरक्षित तरीके से उतार सके।
उड़ान से पहले शराब पीने पर 12 घंटे का नियम
पायलटों की सुरक्षा केवल खाने तक सीमित नहीं है। शराब और दूसरे नशीले पदार्थों को लेकर भी कड़े नियम हैं। भारत में विमान नियम, 1937 के नियम 24 के तहत विमान के संचालन से जुड़े पायलट और चालक दल के सदस्य उड़ान शुरू होने से 12 घंटे पहले तक शराब, नशीली दवा, नींद लाने वाली दवा या ऐसी दूसरी चीज का सेवन नहीं कर सकते जिससे उनकी क्षमता प्रभावित हो। नियम उड़ान के दौरान ऐसे पदार्थों के सेवन पर भी रोक लगाता है।
सिर्फ 12 घंटे का अंतर ही काफी नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि नियम का मतलब केवल इतना नहीं है कि पायलट ने शराब पीने के बाद 12 घंटे इंतजार कर लिया तो वह उड़ान भर सकता है। नियम के मुताबिक उसके शरीर में शराब का पता चलना भी स्वीकार्य नहीं है और वह ऐसी स्थिति में नहीं होना चाहिए जिसमें नशे या किसी अन्य पदार्थ के कारण विमान सुरक्षित तरीके से उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो। उड़ान से पहले चालक दल की सांस की जांच भी की जाती है।
जांच में नशा मिलने पर क्या कार्रवाई होती है?
विमानन नियमों में नशे से जुड़े उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। डीजीसीए के अनुसार उड़ान से पहले शराब की जांच में पहली बार नमूना सकारात्मक आने पर लाइसेंस या मंजूरी को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। दूसरी बार ऐसा होने पर तीन साल का निलंबन और तीसरी बार सकारात्मक पाए जाने पर लाइसेंस या मंजूरी रद्द करने का प्रावधान है।
पायलट की एक गलती से सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है
पायलट के लिए नशे से दूर रहना इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि उड़ान के दौरान कुछ ही सेकंड का गलत फैसला भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। विमान को संभालने के लिए पायलट को लगातार सही निर्णय लेना होता है, उपकरणों पर नजर रखनी होती है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती है। ऐसे में शराब या किसी नशीले पदार्थ का असर उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ना गंभीर सुरक्षा खतरा बन सकता है।
दो पायलट रखने का मकसद भी यही सुरक्षा व्यवस्था है
यात्रियों को अक्सर लगता है कि विमान में दो पायलट केवल काम बांटने के लिए होते हैं। असल में यह व्यवस्था कई संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। अगर एक पायलट अचानक बीमार हो जाए, बेहोश हो जाए या किसी अन्य कारण से विमान उड़ाने में सक्षम न रहे तो दूसरा पायलट नियंत्रण संभाल सकता है। इसी सोच के तहत भोजन, शराब, नशीले पदार्थ और पायलट की फिटनेस को लेकर अलग-अलग सुरक्षा प्रक्रियाएं बनाई गई हैं।
एयर इंडिया की घटना के बाद फिर चर्चा में विमानन सुरक्षा
फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि पायलटों की नशीले पदार्थों से जुड़ी जांच और सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत बनाया जा सकता है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और घटना के सभी पहलुओं को सामने आने में समय लग सकता है। इसलिए पायलट की जांच में नशे की पुष्टि को लेकर सामने आई जानकारी को गंभीरता से देखना जरूरी है, लेकिन इसे विमान के अचानक नीचे आने का अंतिम कारण मानना जांच पूरी होने से पहले सही नहीं होगा।



