By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 | 05:31 PM
अगर आप भी हर महीने सैलरी मिलने के बाद इनकम टैक्स की कटौती से परेशान हो जाते हैं, तो दुनिया के कुछ देशों के बारे में जानकर हैरान रह जाएंगे। ऐसे कई देश हैं, जहां नौकरी करने वालों की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं लिया जाता। यानी जितनी सैलरी मिलेगी, उतनी ही आपके खाते में पहुंचेगी। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वहां की सरकारों की कमाई बंद हो जाती है। इन देशों ने आमदनी के दूसरे मजबूत स्रोत तैयार कर रखे हैं, जिनसे पूरा सरकारी तंत्र चलता है।
दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत आय पर इनकम टैक्स लगाने की व्यवस्था ही नहीं रखी है। सबसे ज्यादा ऐसे देश खाड़ी क्षेत्र में हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। यहां काम करने वाले लोगों की सैलरी से इनकम टैक्स नहीं काटा जाता।
इसी तरह बहामास, केमैन द्वीप, बरमूडा और ब्रिटिश वर्जिन द्वीप जैसे पर्यटन आधारित देशों में भी व्यक्तिगत आय पर टैक्स नहीं लगता। यूरोप का छोटा लेकिन बेहद समृद्ध देश मोनाको भी उन देशों में शामिल है, जहां स्थानीय निवासियों को अपनी कमाई पर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
फिर सरकारों का खर्च कैसे चलता है?
जब किसी देश में लोगों की कमाई पर टैक्स नहीं लिया जाता, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर सरकार अपनी आय कहां से जुटाती है। इसका जवाब हर देश की अर्थव्यवस्था में छिपा है।
खाड़ी देशों की बात करें तो वहां की सरकारों की सबसे बड़ी कमाई तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात से होती है। इसी वजह से उन्हें नागरिकों की सैलरी पर टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखते हुए ये देश अब आय के नए स्रोत भी विकसित कर रहे हैं।
अब दूसरे टैक्स से बढ़ाई जा रही कमाई
इनकम टैक्स नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि वहां किसी तरह का टैक्स ही नहीं लिया जाता। उदाहरण के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात ने कंपनियों के मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स लागू किया है। इसके अलावा कई खाड़ी देशों में वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर मूल्य वर्धित कर यानी वैट भी लिया जाता है।
कई देशों में यह कर पांच से पंद्रह प्रतिशत तक है। यानी सैलरी भले पूरी मिले, लेकिन खरीदारी करते समय लोगों को टैक्स चुकाना पड़ता है।
पर्यटन और आयात भी बनते हैं कमाई का बड़ा जरिया
बहामास, बरमूडा और केमैन द्वीप जैसे देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं पर आधारित है। यहां विदेशी पर्यटकों से मिलने वाला राजस्व, बैंकिंग सेवाओं की फीस और आयात पर लगाए जाने वाले शुल्क सरकार की बड़ी आय का हिस्सा होते हैं। यही वजह है कि इन देशों को नागरिकों की व्यक्तिगत कमाई पर टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
टैक्स नहीं, लेकिन रहना बेहद महंगा
पहली नजर में बिना इनकम टैक्स वाले देश किसी सपने जैसे लग सकते हैं, लेकिन वहां रहने की वास्तविकता थोड़ी अलग है। इन देशों में मकान का किराया, रोजमर्रा का सामान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और दूसरी सुविधाएं काफी महंगी होती हैं।
इसके अलावा खरीदारी पर लगने वाला वैट और कई अन्य शुल्क भी लोगों के खर्च को बढ़ा देते हैं। इसलिए सिर्फ टैक्स न होने के आधार पर इन देशों को सस्ता मान लेना सही नहीं होगा।
मोनाको में रहना हर किसी के बस की बात नहीं
मोनाको दुनिया के सबसे महंगे देशों में गिना जाता है। यहां रहने के लिए अच्छी-खासी आय होना जरूरी है। लग्जरी जीवनशैली, ऊंचे किराए और महंगे खर्चों के कारण सामान्य आय वाले लोगों के लिए वहां लंबे समय तक रहना आसान नहीं माना जाता। यही वजह है कि इनकम टैक्स न होने के बावजूद वहां बसने का फैसला करने से पहले पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना जरूरी होता है।
सिर्फ टैक्स देखकर फैसला करना ठीक नहीं
अगर आप विदेश में नौकरी करने की योजना बना रहे हैं, तो केवल यह देखकर फैसला न करें कि वहां इनकम टैक्स नहीं लगता। किसी भी देश में रहने का कुल खर्च, नौकरी के अवसर, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, आवास और जीवन स्तर जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कई बार टैक्स बचाने से ज्यादा पैसा महंगे जीवन पर खर्च हो जाता है।



