Wednesday, July 15, 2026
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CBSE की कॉपी जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब; ऑन स्क्रीन मार्किंग की खामियों पर उठे बड़े सवाल

By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 | 03:17 PM

नई दिल्ली: सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था में सामने आई तकनीकी खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से पूछा है कि मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर निराश हैं और उनकी शिकायतों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। अदालत ने माना कि परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

व्यवस्था में खामियां दूर करने पर जोर
पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने भी कहा कि मूल्यांकन व्यवस्था में कुछ ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें समय रहते दूर करना आवश्यक है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया में किए जा रहे सुधारों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए ताकि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके।

छात्र की शिकायत पर सुनवाई के दौरान मिली जानकारी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिका दायर करने वाले छात्र की व्यक्तिगत शिकायत का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे मामले की जांच और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है।

पूर्व वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति
सरकार ने अदालत को बताया कि पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में गठित समिति ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की तकनीकी कमियों की जांच कर रही है। समिति यह भी देख रही है कि जिन कारणों से मूल्यांकन में दिक्कतें आईं, उन्हें भविष्य में कैसे रोका जा सकता है।

खरीद प्रक्रिया और टेंडर की भी होगी समीक्षा
जांच समिति का दायरा केवल तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है। उसे ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की खरीद प्रक्रिया, टेंडर की शर्तों और पूरी व्यवस्था की समीक्षा का भी जिम्मा सौंपा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में परीक्षा मूल्यांकन के दौरान ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

विवाद के बाद बोर्ड में हुआ प्रशासनिक बदलाव
मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में प्रशासनिक स्तर पर भी कई बदलाव किए गए थे। कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया गया, ताकि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह पूरा मामला और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार को रिपोर्ट पेश करने का मिला समय
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अनुरोध किया कि जांच समिति की प्रगति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कुछ समय दिया जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय कर दी। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार और बोर्ड को मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार से जुड़े विस्तृत कदमों की जानकारी देनी होगी।

लाखों छात्रों पर पड़ेगा फैसले का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जाता है तो इससे भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकेगा कि सरकार और सीबीएसई इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठा रहे हैं।

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CBSE की कॉपी जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब; ऑन स्क्रीन मार्किंग की खामियों पर उठे बड़े सवाल

By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 | 03:17 PM

नई दिल्ली: सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था में सामने आई तकनीकी खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से पूछा है कि मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर निराश हैं और उनकी शिकायतों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। अदालत ने माना कि परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

व्यवस्था में खामियां दूर करने पर जोर
पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने भी कहा कि मूल्यांकन व्यवस्था में कुछ ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें समय रहते दूर करना आवश्यक है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया में किए जा रहे सुधारों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए ताकि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके।

छात्र की शिकायत पर सुनवाई के दौरान मिली जानकारी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि याचिका दायर करने वाले छात्र की व्यक्तिगत शिकायत का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे मामले की जांच और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है।

पूर्व वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में बनी जांच समिति
सरकार ने अदालत को बताया कि पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में गठित समिति ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की तकनीकी कमियों की जांच कर रही है। समिति यह भी देख रही है कि जिन कारणों से मूल्यांकन में दिक्कतें आईं, उन्हें भविष्य में कैसे रोका जा सकता है।

खरीद प्रक्रिया और टेंडर की भी होगी समीक्षा
जांच समिति का दायरा केवल तकनीकी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है। उसे ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की खरीद प्रक्रिया, टेंडर की शर्तों और पूरी व्यवस्था की समीक्षा का भी जिम्मा सौंपा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में परीक्षा मूल्यांकन के दौरान ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

विवाद के बाद बोर्ड में हुआ प्रशासनिक बदलाव
मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में प्रशासनिक स्तर पर भी कई बदलाव किए गए थे। कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया गया, ताकि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह पूरा मामला और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार को रिपोर्ट पेश करने का मिला समय
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अनुरोध किया कि जांच समिति की प्रगति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कुछ समय दिया जाए। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय कर दी। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार और बोर्ड को मूल्यांकन व्यवस्था में सुधार से जुड़े विस्तृत कदमों की जानकारी देनी होगी।

लाखों छात्रों पर पड़ेगा फैसले का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जाता है तो इससे भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकेगा कि सरकार और सीबीएसई इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठा रहे हैं।

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