Wednesday, July 15, 2026
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दुनिया में सबसे सस्ती बिजली कहां मिलती है? जानिए किन देशों में एक यूनिट का खर्च है बेहद कम

By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 | 05:47 PM

आज के समय में बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि हर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी की बुनियादी जरूरत बन चुकी है। हालांकि दुनिया के सभी देशों में बिजली की कीमत समान नहीं है। कुछ देशों में एक यूनिट बिजली के लिए लोगों को अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ती है, जबकि कई ऐसे भी देश हैं जहां बिजली बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीति और बिजली उत्पादन का तरीका माना जाता है।

वैश्विक स्तर पर बिजली की कीमतों का अध्ययन करने वाली संस्था की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे कम घरेलू बिजली शुल्क वाले देशों में ईरान सबसे आगे है। यहां एक यूनिट बिजली की कीमत दो सेंट अमेरिकी डॉलर से भी कम बताई गई है। देश में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार और सरकार की सब्सिडी नीति के कारण उपभोक्ताओं को बेहद कम दर पर बिजली उपलब्ध हो पाती है।

इथियोपिया में जलविद्युत से कम हुई लागत
अफ्रीकी देश इथियोपिया भी सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। यहां घरेलू उपभोक्ताओं को बहुत कम कीमत पर बिजली मिलती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश अपनी अधिकांश बिजली नदियों और बांधों से तैयार करता है। जलविद्युत उत्पादन की लागत अपेक्षाकृत कम होने से उपभोक्ताओं तक भी सस्ती बिजली पहुंचती है।

सूडान में भी आम लोगों को मिलती है राहत
सूडान में भी बिजली की दरें दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम हैं। यहां कम आय वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार बिजली पर सब्सिडी देती है। इसी कारण घरेलू उपभोक्ताओं को कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है।

चीन में सरकार तय करती है बिजली की कीमत
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन भी कम बिजली दरों वाले देशों की सूची में शामिल है। यहां सरकार बिजली की कीमतों पर नियंत्रण रखती है। इसके साथ ही देश के पास कोयले के बड़े भंडार हैं, जिससे बिजली उत्पादन की लागत नियंत्रित रहती है। यही वजह है कि आम लोगों को अपेक्षाकृत कम दर पर बिजली उपलब्ध होती है।

यूरोप में हंगरी सबसे आगे
यूरोप के अधिकांश देशों में बिजली महंगी मानी जाती है, लेकिन हंगरी इस मामले में अलग है। यहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें यूरोपीय देशों के मुकाबले काफी कम हैं। सरकार द्वारा नियंत्रित मूल्य व्यवस्था के कारण लोगों को राहत मिलती है और बिजली का खर्च सीमित रहता है।

आखिर किन वजहों से सस्ती होती है बिजली?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश में बिजली की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। जिन देशों के पास प्राकृतिक गैस, कोयला या अन्य ऊर्जा संसाधनों की भरपूर उपलब्धता होती है, वहां बिजली उत्पादन की लागत कम रहती है। वहीं जिन देशों में जलविद्युत परियोजनाएं अधिक हैं, वहां भी बिजली सस्ती पड़ती है।

सरकारी नीतियां भी निभाती हैं अहम भूमिका
कई देशों की सरकारें आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम करने के लिए बिजली पर भारी सब्सिडी देती हैं। इसके अलावा कुछ देशों में बिजली की कीमतें पूरी तरह बाजार के भरोसे नहीं छोड़ी जातीं, बल्कि सरकार स्वयं दरें तय करती है। इससे उपभोक्ताओं को स्थिर और कम कीमत पर बिजली मिलती रहती है।

भारत के लिए क्या है सीख?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली उत्पादन में सस्ती और नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाया जाए, वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए तो बिजली की लागत कम की जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ उद्योगों की लागत भी घटेगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

International

दुनिया में सबसे सस्ती बिजली कहां मिलती है? जानिए किन देशों में एक यूनिट का खर्च है बेहद कम

By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 | 05:47 PM

आज के समय में बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि हर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी की बुनियादी जरूरत बन चुकी है। हालांकि दुनिया के सभी देशों में बिजली की कीमत समान नहीं है। कुछ देशों में एक यूनिट बिजली के लिए लोगों को अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ती है, जबकि कई ऐसे भी देश हैं जहां बिजली बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीति और बिजली उत्पादन का तरीका माना जाता है।

वैश्विक स्तर पर बिजली की कीमतों का अध्ययन करने वाली संस्था की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे कम घरेलू बिजली शुल्क वाले देशों में ईरान सबसे आगे है। यहां एक यूनिट बिजली की कीमत दो सेंट अमेरिकी डॉलर से भी कम बताई गई है। देश में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार और सरकार की सब्सिडी नीति के कारण उपभोक्ताओं को बेहद कम दर पर बिजली उपलब्ध हो पाती है।

इथियोपिया में जलविद्युत से कम हुई लागत
अफ्रीकी देश इथियोपिया भी सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। यहां घरेलू उपभोक्ताओं को बहुत कम कीमत पर बिजली मिलती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश अपनी अधिकांश बिजली नदियों और बांधों से तैयार करता है। जलविद्युत उत्पादन की लागत अपेक्षाकृत कम होने से उपभोक्ताओं तक भी सस्ती बिजली पहुंचती है।

सूडान में भी आम लोगों को मिलती है राहत
सूडान में भी बिजली की दरें दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम हैं। यहां कम आय वाले परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार बिजली पर सब्सिडी देती है। इसी कारण घरेलू उपभोक्ताओं को कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है।

चीन में सरकार तय करती है बिजली की कीमत
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन भी कम बिजली दरों वाले देशों की सूची में शामिल है। यहां सरकार बिजली की कीमतों पर नियंत्रण रखती है। इसके साथ ही देश के पास कोयले के बड़े भंडार हैं, जिससे बिजली उत्पादन की लागत नियंत्रित रहती है। यही वजह है कि आम लोगों को अपेक्षाकृत कम दर पर बिजली उपलब्ध होती है।

यूरोप में हंगरी सबसे आगे
यूरोप के अधिकांश देशों में बिजली महंगी मानी जाती है, लेकिन हंगरी इस मामले में अलग है। यहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें यूरोपीय देशों के मुकाबले काफी कम हैं। सरकार द्वारा नियंत्रित मूल्य व्यवस्था के कारण लोगों को राहत मिलती है और बिजली का खर्च सीमित रहता है।

आखिर किन वजहों से सस्ती होती है बिजली?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश में बिजली की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। जिन देशों के पास प्राकृतिक गैस, कोयला या अन्य ऊर्जा संसाधनों की भरपूर उपलब्धता होती है, वहां बिजली उत्पादन की लागत कम रहती है। वहीं जिन देशों में जलविद्युत परियोजनाएं अधिक हैं, वहां भी बिजली सस्ती पड़ती है।

सरकारी नीतियां भी निभाती हैं अहम भूमिका
कई देशों की सरकारें आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम करने के लिए बिजली पर भारी सब्सिडी देती हैं। इसके अलावा कुछ देशों में बिजली की कीमतें पूरी तरह बाजार के भरोसे नहीं छोड़ी जातीं, बल्कि सरकार स्वयं दरें तय करती है। इससे उपभोक्ताओं को स्थिर और कम कीमत पर बिजली मिलती रहती है।

भारत के लिए क्या है सीख?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली उत्पादन में सस्ती और नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाया जाए, वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए तो बिजली की लागत कम की जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ उद्योगों की लागत भी घटेगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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