Wednesday, July 15, 2026
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दो महीने की छुट्टी, न होमवर्क न प्रोजेक्ट… अमेरिका के बच्चों की ये जिंदगी आपको चौंका देगी

By Malay Ojha | Published: 28 June 2026 | 02:16 PM

गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही भारत में ज्यादातर बच्चों के बैग से किताबें तो निकल जाती हैं, लेकिन उनकी जगह होमवर्क की कॉपियां, प्रोजेक्ट फाइलें और ट्यूशन की नोटबुक ले लेती हैं। वहीं दुनिया के सबसे विकसित देशों में गिने जाने वाले अमेरिका में तस्वीर कुछ अलग है। वहां गर्मी की छुट्टियों को बच्चों के आराम, खेल और नई चीजें सीखने का समय माना जाता है, न कि सिर्फ पढ़ाई का।

अमेरिका में नया शैक्षणिक सत्र आमतौर पर सितंबर में शुरू होता है और जून तक चलता है। इसके बाद बच्चों को करीब दो महीने की लंबी समर वेकेशन मिलती है। खास बात यह है कि ज्यादातर स्कूल इस दौरान बच्चों को रोजाना होमवर्क या बड़े प्रोजेक्ट नहीं देते। बच्चों को पढ़ाई से पूरी तरह ब्रेक मिलता है, ताकि वे मानसिक रूप से तरोताजा हो सकें।

छुट्टियों का मतलब सिर्फ आराम नहीं
अमेरिकी बच्चे छुट्टियों को केवल सोने और टीवी देखने में नहीं बिताते। इस दौरान बड़ी संख्या में बच्चे खेल, कला और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कोई तैराकी सीखता है तो कोई फुटबॉल, बेसबॉल, टेनिस या गोल्फ खेलना शुरू करता है। कई बच्चे संगीत, नृत्य, चित्रकला, विज्ञान शिविर, रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं।

नई स्किल सीखने पर दिया जाता है जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अपनी पसंद की गतिविधियां चुनने की आजादी मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। वे नई चीजें सीखते हैं, नए दोस्त बनाते हैं और अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान पाते हैं। यही वजह है कि कई अमेरिकी बच्चे छोटी उम्र से ही खेल, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना शुरू कर देते हैं।

सरकार और समुदाय भी करते हैं मदद
अमेरिका के कई शहरों में स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठन बच्चों के लिए विशेष समर कार्यक्रम चलाते हैं। पार्क, लाइब्रेरी, खेल मैदान और कम्युनिटी सेंटर में मुफ्त या कम शुल्क पर कई गतिविधियां कराई जाती हैं। कहीं फ्री स्विमिंग क्लास होती है तो कहीं बच्चों के लिए रीडिंग प्रोग्राम और स्पोर्ट्स कैंप आयोजित किए जाते हैं। इससे हर वर्ग के बच्चों को सीखने का अवसर मिलता है।

नई ऊर्जा के साथ स्कूल लौटते हैं बच्चे
लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद जब नया सत्र शुरू होता है तो बच्चे नई ऊर्जा और उत्साह के साथ स्कूल लौटते हैं। मानसिक तनाव कम होने से उनका ध्यान भी बेहतर तरीके से पढ़ाई में लगता है। कई शिक्षा विशेषज्ञ इसे बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी मानते हैं।

भारत की तस्वीर थोड़ी अलग
भारत में भी गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन यहां बड़ी संख्या में बच्चों को छुट्टियों में होमवर्क, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट दिए जाते हैं। कई बच्चे कोचिंग और ट्यूशन भी जाते हैं। ऐसे में छुट्टियों का बड़ा हिस्सा भी पढ़ाई में ही निकल जाता है और बच्चों को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बदलाव भी देखने को मिला है। अब कई माता-पिता बच्चों को समर कैंप, खेल, संगीत, नृत्य और दूसरी हॉबी क्लास में भेजने लगे हैं, ताकि वे पढ़ाई के साथ नई चीजें भी सीख सकें।

क्या भारत में भी बदलनी चाहिए छुट्टियों की सोच?
हर देश की शिक्षा व्यवस्था उसकी जरूरतों और संस्कृति के हिसाब से बनाई जाती है, इसलिए किसी एक मॉडल को पूरी तरह बेहतर नहीं कहा जा सकता। लेकिन अमेरिका का उदाहरण यह जरूर दिखाता है कि छुट्टियां केवल पढ़ाई से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर बच्चों को कुछ समय के लिए किताबों से दूर रखकर खेल, परिवार और नई स्किल्स सीखने का मौका दिया जाए, तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास और बेहतर हो सकता है।

अब सवाल यह है कि क्या भारत में भी समर वेकेशन के दौरान होमवर्क और प्रोजेक्ट का बोझ कम कर बच्चों को उनके बचपन का आनंद लेने का ज्यादा मौका दिया जाना चाहिए?

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दो महीने की छुट्टी, न होमवर्क न प्रोजेक्ट… अमेरिका के बच्चों की ये जिंदगी आपको चौंका देगी

By Malay Ojha | Published: 28 June 2026 | 02:16 PM

गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही भारत में ज्यादातर बच्चों के बैग से किताबें तो निकल जाती हैं, लेकिन उनकी जगह होमवर्क की कॉपियां, प्रोजेक्ट फाइलें और ट्यूशन की नोटबुक ले लेती हैं। वहीं दुनिया के सबसे विकसित देशों में गिने जाने वाले अमेरिका में तस्वीर कुछ अलग है। वहां गर्मी की छुट्टियों को बच्चों के आराम, खेल और नई चीजें सीखने का समय माना जाता है, न कि सिर्फ पढ़ाई का।

अमेरिका में नया शैक्षणिक सत्र आमतौर पर सितंबर में शुरू होता है और जून तक चलता है। इसके बाद बच्चों को करीब दो महीने की लंबी समर वेकेशन मिलती है। खास बात यह है कि ज्यादातर स्कूल इस दौरान बच्चों को रोजाना होमवर्क या बड़े प्रोजेक्ट नहीं देते। बच्चों को पढ़ाई से पूरी तरह ब्रेक मिलता है, ताकि वे मानसिक रूप से तरोताजा हो सकें।

छुट्टियों का मतलब सिर्फ आराम नहीं
अमेरिकी बच्चे छुट्टियों को केवल सोने और टीवी देखने में नहीं बिताते। इस दौरान बड़ी संख्या में बच्चे खेल, कला और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कोई तैराकी सीखता है तो कोई फुटबॉल, बेसबॉल, टेनिस या गोल्फ खेलना शुरू करता है। कई बच्चे संगीत, नृत्य, चित्रकला, विज्ञान शिविर, रोबोटिक्स और कोडिंग जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं।

नई स्किल सीखने पर दिया जाता है जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अपनी पसंद की गतिविधियां चुनने की आजादी मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। वे नई चीजें सीखते हैं, नए दोस्त बनाते हैं और अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान पाते हैं। यही वजह है कि कई अमेरिकी बच्चे छोटी उम्र से ही खेल, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना शुरू कर देते हैं।

सरकार और समुदाय भी करते हैं मदद
अमेरिका के कई शहरों में स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठन बच्चों के लिए विशेष समर कार्यक्रम चलाते हैं। पार्क, लाइब्रेरी, खेल मैदान और कम्युनिटी सेंटर में मुफ्त या कम शुल्क पर कई गतिविधियां कराई जाती हैं। कहीं फ्री स्विमिंग क्लास होती है तो कहीं बच्चों के लिए रीडिंग प्रोग्राम और स्पोर्ट्स कैंप आयोजित किए जाते हैं। इससे हर वर्ग के बच्चों को सीखने का अवसर मिलता है।

नई ऊर्जा के साथ स्कूल लौटते हैं बच्चे
लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद जब नया सत्र शुरू होता है तो बच्चे नई ऊर्जा और उत्साह के साथ स्कूल लौटते हैं। मानसिक तनाव कम होने से उनका ध्यान भी बेहतर तरीके से पढ़ाई में लगता है। कई शिक्षा विशेषज्ञ इसे बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी मानते हैं।

भारत की तस्वीर थोड़ी अलग
भारत में भी गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन यहां बड़ी संख्या में बच्चों को छुट्टियों में होमवर्क, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट दिए जाते हैं। कई बच्चे कोचिंग और ट्यूशन भी जाते हैं। ऐसे में छुट्टियों का बड़ा हिस्सा भी पढ़ाई में ही निकल जाता है और बच्चों को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बदलाव भी देखने को मिला है। अब कई माता-पिता बच्चों को समर कैंप, खेल, संगीत, नृत्य और दूसरी हॉबी क्लास में भेजने लगे हैं, ताकि वे पढ़ाई के साथ नई चीजें भी सीख सकें।

क्या भारत में भी बदलनी चाहिए छुट्टियों की सोच?
हर देश की शिक्षा व्यवस्था उसकी जरूरतों और संस्कृति के हिसाब से बनाई जाती है, इसलिए किसी एक मॉडल को पूरी तरह बेहतर नहीं कहा जा सकता। लेकिन अमेरिका का उदाहरण यह जरूर दिखाता है कि छुट्टियां केवल पढ़ाई से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर बच्चों को कुछ समय के लिए किताबों से दूर रखकर खेल, परिवार और नई स्किल्स सीखने का मौका दिया जाए, तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास और बेहतर हो सकता है।

अब सवाल यह है कि क्या भारत में भी समर वेकेशन के दौरान होमवर्क और प्रोजेक्ट का बोझ कम कर बच्चों को उनके बचपन का आनंद लेने का ज्यादा मौका दिया जाना चाहिए?

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