छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई उनके पूरे भविष्य की मजबूत नींव मानी जाती है. यही वजह है कि प्री-प्राइमरी और नर्सरी कक्षाओं में पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं की भूमिका बेहद खास होती है. ये शिक्षिकाएं बच्चों को केवल पढ़ाती ही नहीं, बल्कि उन्हें स्कूल के माहौल में सहज बनाना, अच्छे संस्कार देना और आत्मविश्वास बढ़ाना भी सिखाती हैं. बच्चों के साथ मां जैसा व्यवहार करने के कारण इन्हें मदर टीचर कहा जाता है.
मदर टीचर मुख्य रूप से नर्सरी, किंडरगार्टन और प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं. छोटे बच्चों को प्यार, धैर्य और समझदारी के साथ संभालना इनके काम का अहम हिस्सा होता है. ये बच्चों को शुरुआती शिक्षा देने के साथ-साथ उनके व्यवहार और सामाजिक विकास पर भी ध्यान देती हैं.
बच्चों को खेल-खेल में सिखाई जाती हैं जरूरी बातें
मदर टीचर बच्चों को पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि खेल-खेल में पढ़ाना सिखाती हैं. अक्षरों की पहचान, गिनती, रंगों की जानकारी और सामान्य ज्ञान जैसी शुरुआती चीजें आसान तरीकों से समझाई जाती हैं. इसके अलावा बच्चों में अनुशासन, साफ-सफाई और अच्छी आदतें विकसित कराने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होती है.
इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे हैं नौकरी के मौके
पिछले कुछ वर्षों में प्ले स्कूल और प्री-स्कूल की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसके कारण प्रशिक्षित मदर टीचर्स की मांग भी बढ़ रही है. बच्चों के साथ काम करने में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए यह क्षेत्र एक बेहतर करियर विकल्प बनकर उभर रहा है.
कौन-कौन से कोर्स किए जा सकते हैं
मदर टीचर बनने के लिए कई तरह के प्रोफेशनल कोर्स उपलब्ध हैं. इनमें नर्सरी टीचर ट्रेनिंग, अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन और मॉन्टेसरी टीचर ट्रेनिंग जैसे कोर्स प्रमुख हैं. इन कोर्सों की अवधि छह महीने से लेकर दो साल तक हो सकती है. कई संस्थान बारहवीं के बाद ही प्रवेश दे देते हैं.
मदर टीचर बनने के लिए क्या योग्यता जरूरी
इस क्षेत्र में आने के लिए आमतौर पर बारहवीं पास होना जरूरी माना जाता है. कुछ संस्थानों में स्नातक के बाद भी दाखिला मिलता है. इसके अलावा बच्चों के साथ धैर्यपूर्वक काम करने की क्षमता, अच्छी बातचीत करने का तरीका और रचनात्मक सोच होना बेहद जरूरी है.
कितनी मिल सकती है सैलरी
कोर्स पूरा करने के बाद प्राइवेट स्कूल, प्ले स्कूल, डे-केयर सेंटर और प्री-स्कूल में नौकरी के अवसर मिलते हैं. शुरुआती दौर में करीब 10 हजार से 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिल सकता है. अनुभव बढ़ने और बड़े संस्थानों में काम मिलने के साथ आय में भी बढ़ोतरी होती है.



