By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 | 06:53 PM
नीट यूजी 2026 के नतीजे सामने आने के बाद ओएमआर उत्तर-पत्र को लेकर उठे सवाल अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। मामले में नया मोड़ तब आया, जब औरंगाबाद पीठ ने तीन अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को उनकी मूल ओएमआर उत्तर-पुस्तिकाएं अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया। अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि उनके ओएमआर में दर्ज उत्तरों और अंतिम परिणाम में मिले अंकों के बीच बड़ा अंतर है। एक अभ्यर्थी ने तो अदालत के सामने यह दावा किया कि ओएमआर और उत्तर कुंजी के आधार पर उसे 619 अंक मिलने की उम्मीद थी, जबकि परिणाम में उसके 280 अंक दिखाए गए।
नीट यूजी 2026 का परिणाम 16 जुलाई को जारी किया गया था। परिणाम आने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने अपने अंक को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उन्होंने परीक्षा में जो उत्तर दिए थे, उपलब्ध ओएमआर प्रति और आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर उनके अनुमानित अंक अंतिम परिणाम में मिले अंकों से मेल नहीं खाते। इसी कथित अंतर को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से शिकायत की और बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने मांगी मूल ओएमआर शीट
मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में हुई। न्यायमूर्ति नितिन सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति अबासाहेब शिंदे की खंडपीठ ने तीन अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को नोटिस जारी किया। अदालत ने एजेंसी को संबंधित अभ्यर्थियों की मूल उत्तर-पत्रिकाएं पेश करने का निर्देश भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को सूचीबद्ध की गई थी।
एक अभ्यर्थी ने 619 की जगह 280 अंक मिलने का दावा किया
मामले में सामने आए दावों में सबसे बड़ा अंतर एक अभ्यर्थी के अंकों को लेकर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थी ने दावा किया कि उसे 15 जुलाई को अपनी ओएमआर शीट देखने का अवसर मिला था। उसने आधिकारिक उत्तर कुंजी के साथ अपने उत्तरों का मिलान किया और अनुमान लगाया कि उसके करीब 619 अंक बन सकते हैं। लेकिन उसी दिन उसे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से एक अन्य ओएमआर प्रति मिली, जिसे उसकी वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताया गया। इस प्रति के आधार पर उसके अनुमानित अंक करीब 280 बताए गए। इसी अंतर को लेकर उसने अदालत में सवाल उठाया।
तीन अभ्यर्थियों ने परिणाम पर जताई आपत्ति
अदालत में जिन तीन अभ्यर्थियों की याचिकाओं का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है, उनमें हृचा देशपांडे, सोहम गावते और अथर्व जगताप के नाम सामने आए हैं। इन अभ्यर्थियों ने अपने परिणाम में कथित गड़बड़ी और ओएमआर उत्तरों से जुड़े अंतर का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर उनके अनुमानित अंक और परिणाम में जारी अंक एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। हालांकि, इन दावों की अंतिम सच्चाई अदालत के सामने मूल रिकॉर्ड और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब मूल रिकॉर्ड से साफ होगी तस्वीर
अदालत के निर्देश के बाद इस मामले में सबसे अहम दस्तावेज अब मूल ओएमआर उत्तर-पत्र होंगे। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर यह देखा जा सकेगा कि अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान वास्तव में कौन से विकल्प चुने थे और उनकी उत्तर-पत्रिका का मूल्यांकन किस तरह हुआ। इसके साथ ही अदालत यह भी देख सकती है कि अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई गई ओएमआर प्रति और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के रिकॉर्ड में कोई अंतर है या नहीं।
सोशल मीडिया पर भी ओएमआर को लेकर दावे
नीट यूजी 2026 के ओएमआर उत्तर-पत्र को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई तरह के दावे सामने आए हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर अपनी ओएमआर शीट में बदलाव या गलत उत्तर दर्ज होने की बात कही। ऐसे दावों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ओएमआर उत्तर-पत्रों को लेकर फैलाए जा रहे दावों से संबंधित सार्वजनिक सूचना भी जारी की है। एजेंसी की वेबसाइट पर फर्जी, बदली हुई या कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए गए नीट दस्तावेजों को लेकर भी अलग सूचना उपलब्ध है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभ्यर्थियों को किया आगाह
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर नीट यूजी 2026 से जुड़े ओएमआर उत्तर-पत्रों के बारे में प्रसारित दावों पर सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। इसके अलावा एजेंसी ने फर्जी या बदले हुए दस्तावेजों से संबंधित चेतावनी भी दी है। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए जरूरी है कि वे ओएमआर और परिणाम से जुड़ी किसी भी जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक माध्यम से करें और सोशल मीडिया पर वायरल किसी तस्वीर या दस्तावेज को तुरंत सही न मानें।
शिकायत के लिए तय प्रक्रिया का इस्तेमाल जरूरी
नीट जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षा में ओएमआर उत्तर-पत्र और दर्ज उत्तरों को लेकर आपत्ति उठाने के लिए परीक्षा एजेंसी की ओर से तय प्रक्रिया होती है। अभ्यर्थियों को पहले उसी प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायत दर्ज करनी होती है। इसके बाद भी यदि उन्हें लगता है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है, तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। मौजूदा मामले में भी अदालत के सामने यह बात महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित अभ्यर्थियों ने पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के सामने किस तरह की आपत्ति दर्ज की थी और उस पर एजेंसी ने क्या जवाब दिया था।
अदालत के फैसले से पहले निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने मूल ओएमआर उत्तर-पत्र मंगाए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की गलती या ओएमआर में किसी तरह की छेड़छाड़ को सही मान लिया है। अदालत अब उपलब्ध मूल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले को देखेगी। इसलिए जब तक न्यायालय की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक ओएमआर में बदलाव या मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोपों को केवल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
20 हजार रुपये जुर्माने का दावा अभी सत्यापित नहीं
आपके मूल ड्राफ्ट में चार अभ्यर्थियों पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, 30 जुलाई 2026 तक मुझे उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में इस दावे की पुष्टि नहीं मिली। इसके विपरीत, 23 जुलाई की प्रकाशित रिपोर्टों में तीन अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर अदालत द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से मूल ओएमआर उत्तर-पत्र पेश करने को कहे जाने की जानकारी है। इसलिए इस समय चार अभ्यर्थियों की याचिका खारिज होने और प्रत्येक पर 5 हजार रुपये जुर्माना लगाए जाने वाली जानकारी को खबर में तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।
अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई पर
नीट यूजी 2026 के परिणाम को लेकर उठे इस विवाद में अब अगला बड़ा कदम अदालत के सामने मूल ओएमआर उत्तर-पत्र पेश किया जाना है। इन दस्तावेजों की जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के जवाब के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामला अदालत में है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायालय की आगे की कार्यवाही का इंतजार करना होगा।



