By Malay Ojha | Published: 01 June 2026 | 10:43 AM
देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम घोषित हो चुका है। परिणाम जारी होते ही एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गया। बिहार के गया जिले के रहने वाले शुभम कुमार ने परीक्षा में ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
शुभम कुमार का परिवार किसी बड़े शहर या संपन्न पृष्ठभूमि से नहीं जुड़ा है। उनके पिता शिव कुमार हार्डवेयर का व्यवसाय करते हैं, जबकि माता कंचन देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि आज परिवार की मेहनत और त्याग का परिणाम पूरे देश के सामने है।
कितने अंक लाकर बने देश के टॉपर?
जेईई एडवांस्ड 2026 में शुभम कुमार ने 360 में से 330 अंक प्राप्त किए। यह स्कोर उन्हें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों से आगे ले गया। परिणाम घोषित होते ही शिक्षा जगत में उनकी सफलता की चर्चा शुरू हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन हाल के वर्षों के सबसे शानदार परिणामों में गिना जाएगा।
पहले भी दिखा चुके थे अपनी प्रतिभा
शुभम की यह सफलता अचानक नहीं आई है। इससे पहले जेईई मेन 2026 के दोनों चरणों में उन्होंने शत-प्रतिशत अंक हासिल किए थे। खास बात यह रही कि बिहार से वह एकमात्र छात्र थे जिन्होंने दोनों चरणों में यह उपलब्धि अपने नाम की। तभी से उन्हें संभावित टॉपरों में गिना जाने लगा था।
बचपन से पढ़ाई में रहे अव्वल
शुभम की शुरुआती शिक्षा गया स्थित नाजरथ अकादमी में हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दसवीं कक्षा तक उन्होंने किसी निजी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया। शुरुआती वर्षों में उनकी मां ने पढ़ाई में मार्गदर्शन किया, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी स्वयं संभाल ली। यही आत्मनिर्भरता आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
आत्मविश्वास और अनुशासन बना सफलता की कुंजी
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान शुभम ने नियमित दिनचर्या का पालन किया। कोचिंग कक्षाओं के अलावा वह प्रतिदिन लगभग आठ घंटे स्वयं अध्ययन करते थे। उनका मानना है कि किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ना ही जरूरी नहीं, बल्कि सही रणनीति और निरंतर अभ्यास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दो वर्षों तक कोटा में की तैयारी
बेहतर माहौल और प्रतियोगी वातावरण के लिए शुभम पिछले दो वर्षों से कोटा में रहकर तैयारी कर रहे थे। ग्यारहवीं कक्षा में उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई शुरू की थी। बाद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें छात्रवृत्ति मिली, जिसके बाद उन्होंने ऑफलाइन तैयारी का विकल्प चुना। कोटा में बिताए गए इन वर्षों ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी।
परिवार में पहले से मौजूद है शिक्षा का मजबूत माहौल
शुभम की बड़ी बहन प्रिया कुमारी भी तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना में कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार में शिक्षा के प्रति यही सकारात्मक माहौल शुभम के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
अब क्या है शुभम का अगला लक्ष्य?
देशभर में पहला स्थान हासिल करने के बाद शुभम की नजर अब अपने अगले सपने पर है। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। उनका कहना है कि तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़कर वह देश के लिए कुछ नया करना चाहते हैं।
लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी
शुभम कुमार की सफलता यह साबित करती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। एक छोटे शहर से निकलकर देश का शीर्ष स्थान हासिल करना उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।



