Saturday, May 9, 2026
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कैब चालक की बेटियों ने रचा इतिहास, एक बनी आईएएस तो दूसरी सीबीआई में चयनित

लखनऊ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने मेहनत और संकल्प की नई मिसाल पेश की है। यहां एक साधारण परिवार की बेटियों ने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर बड़ा मुकाम हासिल किया है।

उपेंद्र गुप्ता की एक बेटी पहले ही आईएएस अधिकारी बन चुकी है। अब दूसरी बेटी का चयन सीबीआई में होने से परिवार की खुशियां दोगुनी हो गई हैं।

बिना महंगी कोचिंग मिली सफलता
परिवार के अनुसार बेटियों ने बिना महंगी कोचिंग संस्थानों के सहारे आत्मअध्ययन से तैयारी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन और लगातार मेहनत से सफलता हासिल की।

पिता की आंखों में खुशी के आंसू
बेटियों की उपलब्धि पर पिता उपेंद्र गुप्ता भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि माता-पिता के लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती कि बच्चे मेहनत से जीवन में आगे बढ़ें।

गरीबी बनी चुनौती, हार नहीं
उपेंद्र गुप्ता आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्होंने तय किया कि बेटियों की शिक्षा में कोई कमी नहीं रहने देंगे।

कैब चलाकर पूरी की जिम्मेदारी
उन्होंने मेहनत मजदूरी और कैब चलाकर परिवार संभाला। दिन-रात परिश्रम कर बेटियों की पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें और अच्छा माहौल उपलब्ध कराया।

बेटियों ने बढ़ाया मान
आज जब दोनों बेटियां प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचीं, तो पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। इलाके के लोग भी इस सफलता को प्रेरणा मान रहे हैं।

युवाओं के लिए बड़ा संदेश
यह कहानी बताती है कि सफलता केवल बड़े शहरों या महंगे साधनों से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

International

कैब चालक की बेटियों ने रचा इतिहास, एक बनी आईएएस तो दूसरी सीबीआई में चयनित

लखनऊ से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने मेहनत और संकल्प की नई मिसाल पेश की है। यहां एक साधारण परिवार की बेटियों ने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर बड़ा मुकाम हासिल किया है।

उपेंद्र गुप्ता की एक बेटी पहले ही आईएएस अधिकारी बन चुकी है। अब दूसरी बेटी का चयन सीबीआई में होने से परिवार की खुशियां दोगुनी हो गई हैं।

बिना महंगी कोचिंग मिली सफलता
परिवार के अनुसार बेटियों ने बिना महंगी कोचिंग संस्थानों के सहारे आत्मअध्ययन से तैयारी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन और लगातार मेहनत से सफलता हासिल की।

पिता की आंखों में खुशी के आंसू
बेटियों की उपलब्धि पर पिता उपेंद्र गुप्ता भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि माता-पिता के लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती कि बच्चे मेहनत से जीवन में आगे बढ़ें।

गरीबी बनी चुनौती, हार नहीं
उपेंद्र गुप्ता आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्होंने तय किया कि बेटियों की शिक्षा में कोई कमी नहीं रहने देंगे।

कैब चलाकर पूरी की जिम्मेदारी
उन्होंने मेहनत मजदूरी और कैब चलाकर परिवार संभाला। दिन-रात परिश्रम कर बेटियों की पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें और अच्छा माहौल उपलब्ध कराया।

बेटियों ने बढ़ाया मान
आज जब दोनों बेटियां प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचीं, तो पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। इलाके के लोग भी इस सफलता को प्रेरणा मान रहे हैं।

युवाओं के लिए बड़ा संदेश
यह कहानी बताती है कि सफलता केवल बड़े शहरों या महंगे साधनों से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

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