Friday, May 8, 2026
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सीबीएसई 12वीं रिजल्ट से पहले बड़ा खुलासा! जानिए कैसे जुड़ते हैं ग्रेस मार्क्स और कैसे बनती है फाइनल मार्कशीट

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द जारी होने वाला है। इन दिनों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अंतिम चरण में चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि मई के तीसरे सप्ताह में परिणाम घोषित किया जा सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपनी मार्कशीट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे।

करीब 16 लाख छात्र इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। रिजल्ट से पहले छात्रों और अभिभावकों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर बोर्ड छात्रों के नंबर किस आधार पर तय करता है। खासतौर पर मॉडरेशन पॉलिसी, ग्रेस मार्क्स और ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

मॉडरेशन पॉलिसी से कैसे तय होते हैं अंक
सीबीएसई छात्रों के अंकों को तय करने के लिए मॉडरेशन पॉलिसी का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता और समानता बनाए रखना होता है। दरअसल बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र अलग-अलग सेट में तैयार किए जाते हैं और कई बार किसी सेट का स्तर कठिन तो किसी का आसान होता है।

कठिन प्रश्नपत्र में मिलता है राहत का फायदा
बोर्ड का मानना है कि सभी छात्रों को समान अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से मॉडरेशन पॉलिसी लागू की जाती है ताकि कठिन प्रश्नपत्र हल करने वाले छात्रों को नुकसान न हो। यदि किसी प्रश्नपत्र में गलत या अस्पष्ट सवाल पूछे गए हों तो छात्रों को बोनस अंक भी दिए जा सकते हैं।

मूल्यांकन प्रक्रिया में बनाए रखी जाती है समानता
सीबीएसई की मॉडरेशन नीति का मकसद अलग-अलग विषयों और वर्षों में परिणामों के स्तर को संतुलित रखना भी होता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहती है और छात्रों के बीच निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाता है।

क्या छात्रों को मिलते हैं ग्रेस मार्क्स
ग्रेस मार्क्स को लेकर भी छात्रों के बीच काफी चर्चा रहती है। कई बार विशेष परिस्थितियों में बोर्ड छात्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त अंक प्रदान करता है। हालांकि बोर्ड की ओर से इसके लिए कोई तय प्रतिशत आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।

विशेष परिस्थितियों में मिलती है अतिरिक्त राहत
पूर्व में कुछ मामलों में छात्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला चुनिंदा परिस्थितियों में ही लिया जाता है और इसका संबंध मॉडरेशन पॉलिसी से जुड़ा होता है।

ग्रेडिंग सिस्टम से भी तय होती है स्थिति
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में सिर्फ अंक ही नहीं बल्कि ग्रेड भी जारी करता है। यह ग्रेडिंग छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है। बोर्ड छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटकर उनकी स्थिति के अनुसार ग्रेड निर्धारित करता है।

ऐसे तय किए जाते हैं अलग-अलग ग्रेड
ग्रेडिंग सिस्टम के तहत सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को ए-1 ग्रेड दिया जाता है। इसके बाद क्रमशः ए-2, बी-1, बी-2, सी-1, सी-2, डी-1 और डी-2 ग्रेड निर्धारित किए जाते हैं। इससे छात्रों के प्रदर्शन का स्तर समझने में आसानी होती है।

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सीबीएसई 12वीं रिजल्ट से पहले बड़ा खुलासा! जानिए कैसे जुड़ते हैं ग्रेस मार्क्स और कैसे बनती है फाइनल मार्कशीट

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द जारी होने वाला है। इन दिनों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अंतिम चरण में चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि मई के तीसरे सप्ताह में परिणाम घोषित किया जा सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपनी मार्कशीट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे।

करीब 16 लाख छात्र इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। रिजल्ट से पहले छात्रों और अभिभावकों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर बोर्ड छात्रों के नंबर किस आधार पर तय करता है। खासतौर पर मॉडरेशन पॉलिसी, ग्रेस मार्क्स और ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

मॉडरेशन पॉलिसी से कैसे तय होते हैं अंक
सीबीएसई छात्रों के अंकों को तय करने के लिए मॉडरेशन पॉलिसी का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता और समानता बनाए रखना होता है। दरअसल बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र अलग-अलग सेट में तैयार किए जाते हैं और कई बार किसी सेट का स्तर कठिन तो किसी का आसान होता है।

कठिन प्रश्नपत्र में मिलता है राहत का फायदा
बोर्ड का मानना है कि सभी छात्रों को समान अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से मॉडरेशन पॉलिसी लागू की जाती है ताकि कठिन प्रश्नपत्र हल करने वाले छात्रों को नुकसान न हो। यदि किसी प्रश्नपत्र में गलत या अस्पष्ट सवाल पूछे गए हों तो छात्रों को बोनस अंक भी दिए जा सकते हैं।

मूल्यांकन प्रक्रिया में बनाए रखी जाती है समानता
सीबीएसई की मॉडरेशन नीति का मकसद अलग-अलग विषयों और वर्षों में परिणामों के स्तर को संतुलित रखना भी होता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहती है और छात्रों के बीच निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाता है।

क्या छात्रों को मिलते हैं ग्रेस मार्क्स
ग्रेस मार्क्स को लेकर भी छात्रों के बीच काफी चर्चा रहती है। कई बार विशेष परिस्थितियों में बोर्ड छात्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त अंक प्रदान करता है। हालांकि बोर्ड की ओर से इसके लिए कोई तय प्रतिशत आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।

विशेष परिस्थितियों में मिलती है अतिरिक्त राहत
पूर्व में कुछ मामलों में छात्रों को राहत देने के लिए अतिरिक्त अंक दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला चुनिंदा परिस्थितियों में ही लिया जाता है और इसका संबंध मॉडरेशन पॉलिसी से जुड़ा होता है।

ग्रेडिंग सिस्टम से भी तय होती है स्थिति
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में सिर्फ अंक ही नहीं बल्कि ग्रेड भी जारी करता है। यह ग्रेडिंग छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है। बोर्ड छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटकर उनकी स्थिति के अनुसार ग्रेड निर्धारित करता है।

ऐसे तय किए जाते हैं अलग-अलग ग्रेड
ग्रेडिंग सिस्टम के तहत सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को ए-1 ग्रेड दिया जाता है। इसके बाद क्रमशः ए-2, बी-1, बी-2, सी-1, सी-2, डी-1 और डी-2 ग्रेड निर्धारित किए जाते हैं। इससे छात्रों के प्रदर्शन का स्तर समझने में आसानी होती है।

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