दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी स्कूलों में मौजूद अव्यवस्थाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सभी सरकारी स्कूलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा। इस जांच के तहत स्कूल भवनों की मजबूती, सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
सरकार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय, साफ-सफाई और फायर सेफ्टी जैसी जरूरी व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया जाएगा। स्कूलों में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
छात्रों से सीधे बातचीत कर जानी समस्याएं
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को रूपनगर नंबर चार स्थित राजकीय सर्वोदय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल परिसर का जायजा लिया और कई कक्षाओं में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत की। मुख्यमंत्री ने छात्रों से पानी, साफ-सफाई, फायर सेफ्टी और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर जानकारी ली।
खराब पड़े वाटर कूलर और आरओ सिस्टम
निरीक्षण के दौरान छात्रों ने बताया कि स्कूल में स्वच्छ पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर और आरओ मशीन लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिसकी वजह से अधिकतर छात्र नल का पानी पीने को मजबूर हैं।
शौचालयों की खराब स्थिति पर जताई नाराजगी
छात्रों ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि स्कूल के शौचालयों की हालत बेहद खराब है। कई टॉयलेट्स के दरवाजे टूटे हुए हैं और नियमित सफाई नहीं होती। इसके अलावा पानी की सप्लाई भी सही तरीके से नहीं हो रही है।
फायर सेफ्टी में लापरवाही पर अधिकारियों को फटकार
मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान पाया कि स्कूल का फायर सेफ्टी सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। इस पर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्कूलों में सुधार के लिए जल्द होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूल शिक्षा के मंदिर होते हैं और छात्रों को बेहतर माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा और जहां कमी मिलेगी, वहां तुरंत सुधार कराया जाएगा।
पिछली सरकार पर भी साधा निशाना
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मॉडल का प्रचार तो खूब किया गया, लेकिन जमीन पर जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने का काम नहीं हुआ।



