टैगोर एजुकेशन टाइम्स टीम | Published: 27 May 2026 | 07:32 PM
देशभर में हर साल लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखते हैं. यह परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है, इसलिए अधिकतर अभ्यर्थी महंगी कोचिंग और लंबे समय तक तैयारी का सहारा लेते हैं. हालांकि कुछ उम्मीदवार अपनी मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति के दम पर बिना कोचिंग भी सफलता हासिल कर लेते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आईएएस वंदना मीणा की है.
वंदना मीणा मूल रूप से राजस्थान के सवाई माधोपुर की रहने वाली हैं. बचपन का कुछ समय उन्होंने गांव में बिताया, लेकिन बाद में उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया. उनके पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे. परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां सामान्य थीं, लेकिन वंदना के सपने हमेशा बड़े रहे.
पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था लक्ष्य
वंदना ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है और देश के लिए काम करना है.
बिना कोचिंग शुरू की यूपीएससी की तैयारी
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वंदना ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया. वह घर पर रहकर सेल्फ स्टडी करती थीं और इंटरनेट के जरिए पढ़ाई करती रहीं. तैयारी के दौरान उन्होंने यूट्यूब लेक्चर, ऑनलाइन नोट्स और डिजिटल स्टडी मटेरियल का खूब इस्तेमाल किया.
रोजाना 15 से 16 घंटे तक करती थीं पढ़ाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वंदना मीणा अपनी तैयारी के दौरान रोज करीब 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करती थीं. उन्होंने तैयारी में लगातार अनुशासन बनाए रखा और समय का सही इस्तेमाल किया. यही वजह रही कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.
साल 2021 में हासिल की ऑल इंडिया रैंक
कड़ी मेहनत और सही रणनीति के दम पर वंदना मीणा ने साल 2021 की यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 330वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उनका चयन आईएएस अधिकारी के रूप में हुआ. वर्तमान में वह गुजरात के जूनागढ़ जिले के केसोड़ क्षेत्र में एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं वंदना मीणा
वंदना मीणा की कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरणा देती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो बिना कोचिंग भी यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता पाई जा सकती है.



