Saturday, June 13, 2026
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक, फिर भी निर्यात में क्यों पिछड़ गया? मेक्सिको का वो राज जिसने सबको चौंका दिया

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 10:00 AM

गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास हर घर तक पहुंचने लगती है। भारत में आम केवल एक फल नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाद और परंपरा का हिस्सा माना जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा आम पैदा करने वाले देशों की बात करें तो भारत का नाम सबसे ऊपर आता है। इसके बावजूद जब आम के निर्यात की सूची सामने आती है तो कई बार भारत शीर्ष पांच देशों में भी पीछे दिखाई देता है। वहीं, भारत की तुलना में कई गुना कम उत्पादन करने वाला मेक्सिको आम निर्यात के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरता है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों है?

भारत हर वर्ष लगभग दो करोड़ टन आम का उत्पादन करता है। यह आंकड़ा दुनिया के किसी भी देश से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आम की मौजूदगी उतनी मजबूत नहीं है जितनी होनी चाहिए। दूसरी ओर मेक्सिको का उत्पादन भारत की तुलना में काफी कम है, लेकिन निर्यात के मामले में वह लगातार अग्रणी बना हुआ है। इसकी वजह केवल उत्पादन नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था और बाजार रणनीति है।

केवल खेती नहीं, पूरी व्यवस्था बनाती है विजेता
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फल का निर्यात केवल खेत में उत्पादन बढ़ाने से नहीं होता। इसके लिए मजबूत भंडारण व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण, तेज परिवहन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना जरूरी होता है। मेक्सिको ने इन सभी क्षेत्रों में वर्षों तक निवेश किया है, जिसका फायदा उसे आज वैश्विक बाजार में मिल रहा है।

अमेरिका की नजदीकी बनी सबसे बड़ी ताकत
मेक्सिको की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल अमेरिका और कनाडा उसके बेहद करीब हैं। ऐसे में मेक्सिको से भेजा गया आम बहुत कम समय में बाजार तक पहुंच जाता है। इससे फल की ताजगी बनी रहती है और खराब होने की संभावना भी कम हो जाती है। परिवहन लागत कम होने से निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

गुणवत्ता पर मेक्सिको का खास फोकस
अंतरराष्ट्रीय बाजार में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि फल का आकार, रंग, गुणवत्ता और पैकिंग भी मायने रखती है। मेक्सिको ने आम की ग्रेडिंग, पैकिंग और गुणवत्ता जांच की मजबूत व्यवस्था विकसित की है। वहां निर्यात होने वाले फलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है ताकि खरीदारों को हर खेप में एक जैसी गुणवत्ता मिल सके।

सख्त नियमों का पालन करने में आगे
कई देशों में फल आयात करने से पहले कीट, फफूंदी और अन्य जैविक जोखिमों की जांच की जाती है। इसके लिए विशेष उपचार, प्रमाणपत्र और निरीक्षण प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। मेक्सिको ने इन नियमों को बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता विकसित कर ली है। यही कारण है कि उसके आम कई देशों के बाजारों में आसानी से पहुंच जाते हैं।

बाजार की मांग के अनुसार बदलता है मेक्सिको
वैश्विक व्यापार में खरीदार केवल फल नहीं खरीदते, बल्कि भरोसा खरीदते हैं। उन्हें हर बार एक जैसी गुणवत्ता, पैकिंग और समय पर आपूर्ति चाहिए होती है। मेक्सिको ने अपने उत्पादन और निर्यात प्रणाली को इसी मांग के अनुसार ढाल लिया है। यही वजह है कि बड़े खुदरा विक्रेता लंबे समय तक उसी देश के साथ काम करना पसंद करते हैं जो लगातार एक जैसी गुणवत्ता उपलब्ध कराए।

लंबे सीजन का भी मिलता है फायदा
मेक्सिको में आम का उत्पादन लंबे समय तक होता है। वहां लगभग दस महीने तक बाजार में आम उपलब्ध रहता है। निर्यात के लिए यह एक बड़ा लाभ है, क्योंकि जब दूसरे देशों में उत्पादन कम होता है, तब मेक्सिको अपनी आपूर्ति बढ़ाकर बेहतर कीमत हासिल कर लेता है।

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत में आम की मांग बेहद अधिक है। यहां आम केवल फल नहीं बल्कि गर्मियों की पहचान माना जाता है। देश के अधिकांश उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में ही हो जाती है। यही कारण है कि निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा अपेक्षाकृत सीमित रह जाती है।

एकरूपता की कमी भी बनती है बाधा
भारत में आम की दर्जनों किस्में उगाई जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और खेती की पद्धति भी अलग होती है। इसका असर फल के आकार, रंग और पकने की प्रक्रिया पर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां एक जैसी गुणवत्ता की मांग होती है, वहां यह विविधता कई बार चुनौती बन जाती है।

भंडारण और परिवहन व्यवस्था पर सवाल
आम जल्दी खराब होने वाला फल है। यदि तोड़ाई के बाद उचित तापमान, शीत भंडारण और तेज परिवहन की सुविधा न मिले तो नुकसान बढ़ जाता है। भारत में अभी भी कई क्षेत्रों में मजबूत शीत श्रृंखला की कमी महसूस की जाती है। यही वजह है कि निर्यात की संभावनाएं प्रभावित होती हैं।

हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में भारतीय आम की एक खेप को जापान से वापस भेजे जाने की खबर ने भी गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत को निर्यात बढ़ाना है तो केवल उत्पादन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए गुणवत्ता, पैकिंग, प्रमाणन और आपूर्ति व्यवस्था को भी वैश्विक स्तर का बनाना होगा।

भविष्य की राह क्या है?
भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादन, विविध किस्में और विशाल कृषि आधार मौजूद है। यदि शीत भंडारण, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात ढांचे को मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आम व्यापार में कहीं बड़ी भूमिका निभा सकता है। फिलहाल मेक्सिको ने यह साबित कर दिया है कि केवल ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि सही रणनीति और मजबूत व्यवस्था ही किसी देश को निर्यात का बादशाह बनाती है।

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक, फिर भी निर्यात में क्यों पिछड़ गया? मेक्सिको का वो राज जिसने सबको चौंका दिया

By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 | 10:00 AM

गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास हर घर तक पहुंचने लगती है। भारत में आम केवल एक फल नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाद और परंपरा का हिस्सा माना जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा आम पैदा करने वाले देशों की बात करें तो भारत का नाम सबसे ऊपर आता है। इसके बावजूद जब आम के निर्यात की सूची सामने आती है तो कई बार भारत शीर्ष पांच देशों में भी पीछे दिखाई देता है। वहीं, भारत की तुलना में कई गुना कम उत्पादन करने वाला मेक्सिको आम निर्यात के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरता है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों है?

भारत हर वर्ष लगभग दो करोड़ टन आम का उत्पादन करता है। यह आंकड़ा दुनिया के किसी भी देश से कहीं ज्यादा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आम की मौजूदगी उतनी मजबूत नहीं है जितनी होनी चाहिए। दूसरी ओर मेक्सिको का उत्पादन भारत की तुलना में काफी कम है, लेकिन निर्यात के मामले में वह लगातार अग्रणी बना हुआ है। इसकी वजह केवल उत्पादन नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था और बाजार रणनीति है।

केवल खेती नहीं, पूरी व्यवस्था बनाती है विजेता
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फल का निर्यात केवल खेत में उत्पादन बढ़ाने से नहीं होता। इसके लिए मजबूत भंडारण व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण, तेज परिवहन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना जरूरी होता है। मेक्सिको ने इन सभी क्षेत्रों में वर्षों तक निवेश किया है, जिसका फायदा उसे आज वैश्विक बाजार में मिल रहा है।

अमेरिका की नजदीकी बनी सबसे बड़ी ताकत
मेक्सिको की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल अमेरिका और कनाडा उसके बेहद करीब हैं। ऐसे में मेक्सिको से भेजा गया आम बहुत कम समय में बाजार तक पहुंच जाता है। इससे फल की ताजगी बनी रहती है और खराब होने की संभावना भी कम हो जाती है। परिवहन लागत कम होने से निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

गुणवत्ता पर मेक्सिको का खास फोकस
अंतरराष्ट्रीय बाजार में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि फल का आकार, रंग, गुणवत्ता और पैकिंग भी मायने रखती है। मेक्सिको ने आम की ग्रेडिंग, पैकिंग और गुणवत्ता जांच की मजबूत व्यवस्था विकसित की है। वहां निर्यात होने वाले फलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है ताकि खरीदारों को हर खेप में एक जैसी गुणवत्ता मिल सके।

सख्त नियमों का पालन करने में आगे
कई देशों में फल आयात करने से पहले कीट, फफूंदी और अन्य जैविक जोखिमों की जांच की जाती है। इसके लिए विशेष उपचार, प्रमाणपत्र और निरीक्षण प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। मेक्सिको ने इन नियमों को बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता विकसित कर ली है। यही कारण है कि उसके आम कई देशों के बाजारों में आसानी से पहुंच जाते हैं।

बाजार की मांग के अनुसार बदलता है मेक्सिको
वैश्विक व्यापार में खरीदार केवल फल नहीं खरीदते, बल्कि भरोसा खरीदते हैं। उन्हें हर बार एक जैसी गुणवत्ता, पैकिंग और समय पर आपूर्ति चाहिए होती है। मेक्सिको ने अपने उत्पादन और निर्यात प्रणाली को इसी मांग के अनुसार ढाल लिया है। यही वजह है कि बड़े खुदरा विक्रेता लंबे समय तक उसी देश के साथ काम करना पसंद करते हैं जो लगातार एक जैसी गुणवत्ता उपलब्ध कराए।

लंबे सीजन का भी मिलता है फायदा
मेक्सिको में आम का उत्पादन लंबे समय तक होता है। वहां लगभग दस महीने तक बाजार में आम उपलब्ध रहता है। निर्यात के लिए यह एक बड़ा लाभ है, क्योंकि जब दूसरे देशों में उत्पादन कम होता है, तब मेक्सिको अपनी आपूर्ति बढ़ाकर बेहतर कीमत हासिल कर लेता है।

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत में आम की मांग बेहद अधिक है। यहां आम केवल फल नहीं बल्कि गर्मियों की पहचान माना जाता है। देश के अधिकांश उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में ही हो जाती है। यही कारण है कि निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा अपेक्षाकृत सीमित रह जाती है।

एकरूपता की कमी भी बनती है बाधा
भारत में आम की दर्जनों किस्में उगाई जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और खेती की पद्धति भी अलग होती है। इसका असर फल के आकार, रंग और पकने की प्रक्रिया पर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां एक जैसी गुणवत्ता की मांग होती है, वहां यह विविधता कई बार चुनौती बन जाती है।

भंडारण और परिवहन व्यवस्था पर सवाल
आम जल्दी खराब होने वाला फल है। यदि तोड़ाई के बाद उचित तापमान, शीत भंडारण और तेज परिवहन की सुविधा न मिले तो नुकसान बढ़ जाता है। भारत में अभी भी कई क्षेत्रों में मजबूत शीत श्रृंखला की कमी महसूस की जाती है। यही वजह है कि निर्यात की संभावनाएं प्रभावित होती हैं।

हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में भारतीय आम की एक खेप को जापान से वापस भेजे जाने की खबर ने भी गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत को निर्यात बढ़ाना है तो केवल उत्पादन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए गुणवत्ता, पैकिंग, प्रमाणन और आपूर्ति व्यवस्था को भी वैश्विक स्तर का बनाना होगा।

भविष्य की राह क्या है?
भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादन, विविध किस्में और विशाल कृषि आधार मौजूद है। यदि शीत भंडारण, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात ढांचे को मजबूत किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक आम व्यापार में कहीं बड़ी भूमिका निभा सकता है। फिलहाल मेक्सिको ने यह साबित कर दिया है कि केवल ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि सही रणनीति और मजबूत व्यवस्था ही किसी देश को निर्यात का बादशाह बनाती है।

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