Friday, June 12, 2026
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22 साल की उम्र में बनीं आईएएस, गांव वालों ने कहा था ‘शादी कर लो’, सुलोचना मीणा ने ऐसे बदल दी किस्मत

By Malay Ojha | Published: 10 June 2026 | 03:42 PM

देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर साल हजारों अभ्यर्थी कई-कई वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पहले ही प्रयास में सफलता का झंडा गाड़ देते हैं। राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर आईएएस अधिकारी बनीं सुलोचना मीणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने महज 22 वर्ष की उम्र में अपने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के अदलवाड़ा गांव में जन्मी सुलोचना मीणा आज झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उनकी सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जाती, बल्कि यह उस पूरे इलाके के लिए प्रेरणा का विषय बन गई, जहां से पहले कभी कोई आईएएस अधिकारी नहीं बना था। कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें अपने जिले की सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में शामिल कर दिया।

पहले प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी
सुलोचना मीणा ने वर्ष 2021 में यूपीएससी परीक्षा दी थी। जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 415वीं रैंक हासिल की। अनुसूचित जनजाति वर्ग में उन्हें छठा स्थान मिला। खास बात यह रही कि यह सफलता उन्हें पहले ही प्रयास में मिली। आमतौर पर अभ्यर्थियों को कई बार परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन सुलोचना ने अपनी रणनीति और मेहनत के दम पर पहली कोशिश में ही मंजिल हासिल कर ली।

आर्थिक कठिनाइयों के बीच पूरा किया सपना
सुलोचना का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता खेती करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी। हालांकि गांव के कुछ लोग अक्सर उन्हें पढ़ाई छोड़कर शादी करने की सलाह देते थे। जब सुलोचना अपने आईएएस बनने के सपने का जिक्र करती थीं तो कई लोग इसे अव्यावहारिक बताते थे, लेकिन उन्होंने दूसरों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।

12वीं के बाद बदली दिशा
स्कूल शिक्षा के दौरान सुलोचना ने शानदार प्रदर्शन किया। बारहवीं कक्षा में अच्छे अंक आने के बाद उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजा। यहां भी आर्थिक सीमाएं उनके सामने थीं। महंगी कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने स्व-अध्ययन को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। पुस्तकों, नोट्स और नियमित अभ्यास के जरिए उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया।

अखबार पढ़ना बना सफलता का बड़ा मंत्र
सुलोचना मीणा कई मंचों पर बता चुकी हैं कि समसामयिक घटनाओं की जानकारी यूपीएससी की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यही वजह थी कि उन्होंने नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत विकसित की। उनका अधिकांश समय देश-दुनिया की घटनाओं को समझने, नोट्स तैयार करने और विश्लेषण करने में गुजरता था। इससे सामान्य अध्ययन और साक्षात्कार दोनों चरणों में उन्हें काफी मदद मिली।

रोजाना कई घंटे करती थीं पढ़ाई
यूपीएससी जैसी परीक्षा में निरंतरता को सबसे अहम माना जाता है। सुलोचना भी इसी सिद्धांत पर काम करती थीं। वह रोजाना कई घंटे पढ़ाई करती थीं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देती थीं। उनकी तैयारी का केंद्र सिर्फ अधिक घंटे पढ़ना नहीं था, बल्कि पढ़े हुए विषय को बेहतर तरीके से समझना और दोहराना भी था। यही रणनीति उनके लिए सफलता का आधार बनी।

युवाओं को देती हैं खास संदेश
सुलोचना मीणा का मानना है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं। उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरित करती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

प्रेरणा बन चुकी है सुलोचना की कहानी
एक छोटे से गांव की बेटी से आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन सुलोचना मीणा ने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। यदि मेहनत ईमानदार हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी आज भी हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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22 साल की उम्र में बनीं आईएएस, गांव वालों ने कहा था ‘शादी कर लो’, सुलोचना मीणा ने ऐसे बदल दी किस्मत

By Malay Ojha | Published: 10 June 2026 | 03:42 PM

देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर साल हजारों अभ्यर्थी कई-कई वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पहले ही प्रयास में सफलता का झंडा गाड़ देते हैं। राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर आईएएस अधिकारी बनीं सुलोचना मीणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने महज 22 वर्ष की उम्र में अपने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के अदलवाड़ा गांव में जन्मी सुलोचना मीणा आज झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उनकी सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जाती, बल्कि यह उस पूरे इलाके के लिए प्रेरणा का विषय बन गई, जहां से पहले कभी कोई आईएएस अधिकारी नहीं बना था। कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें अपने जिले की सबसे युवा आईएएस अधिकारियों में शामिल कर दिया।

पहले प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी
सुलोचना मीणा ने वर्ष 2021 में यूपीएससी परीक्षा दी थी। जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 415वीं रैंक हासिल की। अनुसूचित जनजाति वर्ग में उन्हें छठा स्थान मिला। खास बात यह रही कि यह सफलता उन्हें पहले ही प्रयास में मिली। आमतौर पर अभ्यर्थियों को कई बार परीक्षा देनी पड़ती है, लेकिन सुलोचना ने अपनी रणनीति और मेहनत के दम पर पहली कोशिश में ही मंजिल हासिल कर ली।

आर्थिक कठिनाइयों के बीच पूरा किया सपना
सुलोचना का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता खेती करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी। हालांकि गांव के कुछ लोग अक्सर उन्हें पढ़ाई छोड़कर शादी करने की सलाह देते थे। जब सुलोचना अपने आईएएस बनने के सपने का जिक्र करती थीं तो कई लोग इसे अव्यावहारिक बताते थे, लेकिन उन्होंने दूसरों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।

12वीं के बाद बदली दिशा
स्कूल शिक्षा के दौरान सुलोचना ने शानदार प्रदर्शन किया। बारहवीं कक्षा में अच्छे अंक आने के बाद उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजा। यहां भी आर्थिक सीमाएं उनके सामने थीं। महंगी कोचिंग का खर्च उठाना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने स्व-अध्ययन को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। पुस्तकों, नोट्स और नियमित अभ्यास के जरिए उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया।

अखबार पढ़ना बना सफलता का बड़ा मंत्र
सुलोचना मीणा कई मंचों पर बता चुकी हैं कि समसामयिक घटनाओं की जानकारी यूपीएससी की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यही वजह थी कि उन्होंने नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत विकसित की। उनका अधिकांश समय देश-दुनिया की घटनाओं को समझने, नोट्स तैयार करने और विश्लेषण करने में गुजरता था। इससे सामान्य अध्ययन और साक्षात्कार दोनों चरणों में उन्हें काफी मदद मिली।

रोजाना कई घंटे करती थीं पढ़ाई
यूपीएससी जैसी परीक्षा में निरंतरता को सबसे अहम माना जाता है। सुलोचना भी इसी सिद्धांत पर काम करती थीं। वह रोजाना कई घंटे पढ़ाई करती थीं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देती थीं। उनकी तैयारी का केंद्र सिर्फ अधिक घंटे पढ़ना नहीं था, बल्कि पढ़े हुए विषय को बेहतर तरीके से समझना और दोहराना भी था। यही रणनीति उनके लिए सफलता का आधार बनी।

युवाओं को देती हैं खास संदेश
सुलोचना मीणा का मानना है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं। उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरित करती है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

प्रेरणा बन चुकी है सुलोचना की कहानी
एक छोटे से गांव की बेटी से आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन सुलोचना मीणा ने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। यदि मेहनत ईमानदार हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी आज भी हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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