By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 | 11:06 AM
करीब 51 साल बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में 1975-77 के आपातकाल को विस्तार से शामिल किया है। नई पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इस बदलाव को लेकर अब सियासी बहस भी तेज हो गई है और कांग्रेस ने सरकार पर इतिहास को अपने हिसाब से पेश करने का आरोप लगाया है।
एनसीईआरटी की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में छात्रों को आपातकाल की पूरी पृष्ठभूमि, उसके असर और लोकतंत्र पर पड़े प्रभाव के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। किताब में बताया गया है कि उस दौर में देश के कई मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और प्रेस पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी का भी जिक्र
पुस्तक में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि आपातकाल के दौरान कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। किताब के अनुसार, यह वह दौर था जब भारतीय लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की सबसे कठिन परीक्षा हुई थी।
जयप्रकाश आंदोलन और लोकतंत्र की वापसी को भी जगह
नई पुस्तक में आपातकाल की राजनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और उसके प्रभाव का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। साथ ही 1977 के आम चुनाव के बाद लोकतंत्र की बहाली और सत्ता परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में शामिल किया गया है।
एनसीईआरटी ने क्या कहा?
एनसीईआरटी का कहना है कि कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में पहली बार आपातकाल को इतने विस्तार और व्यवस्थित तरीके से शामिल किया गया है, ताकि छात्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की इस अहम घटना को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
नई किताब में आपातकाल को शामिल किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता सचिन पायलट ने कहा कि जब भी केंद्र या किसी राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होती है, तब इतिहास को अपने नजरिए से प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है।
लोकतंत्र पर खतरे को लेकर सरकार पर हमला
सचिन पायलट ने कहा कि आज लोकतंत्र के सामने जो चुनौतियां दिखाई दे रही हैं, वैसी परिस्थितियां आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया, मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनावी संस्थाओं का इस्तेमाल कर विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सियासी बहस का नया मुद्दा बना पाठ्यक्रम
एनसीईआरटी की नई किताब में किए गए इस बदलाव के बाद आपातकाल एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, क्योंकि शिक्षा और इतिहास को लेकर देश में पहले भी कई बार राजनीतिक विवाद खड़े होते रहे हैं।



