By Malay Ojha | Published: 24 June 2026 | 09:51 PM
पटना स्थित टी.पी.एस. कॉलेज में भू-जल संरक्षण को लेकर बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने साफ कहा कि अगर अभी से पानी के इस्तेमाल और संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। कार्यक्रम में देश के भू-जल विशेषज्ञों ने बिहार में गिरते जल स्तर, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक तरीकों से पानी बचाने पर विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने एक सुर में कहा कि भू-जल का अंधाधुंध दोहन रोकना अब बेहद जरूरी हो गया है।
टी.पी.एस. कॉलेज में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भू-जल संरक्षण को लेकर चिंता जताई गई। प्राचार्य ने कहा कि जल संकट आज की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है, जिसे केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि समाज की भागीदारी से ही रोका जा सकता है।
पानी बचाने की जरूरत पर सबसे बड़ा जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भू-जल की स्थिति, उसकी लगातार गिरती मात्रा और भविष्य के खतरे पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पानी का सही उपयोग, वर्षा जल को संग्रहित करना और जमीन के अंदर पानी को वापस पहुंचाने की तकनीकें अपनाना अब जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों ने बताए पानी बचाने के आधुनिक उपाय
विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में भू-जल निगरानी, डेटा विश्लेषण, जल गुणवत्ता परीक्षण, भूमिगत जल संरचना और कृत्रिम पुनर्भरण जैसी तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि किस तरह गांव और शहर मिलकर जल संरक्षण अभियान को आगे बढ़ा सकते हैं।
गांव से शहर तक जल संरक्षण की जरूरत
कार्यक्रम का आयोजन रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। आयोजन में विभागाध्यक्ष और अन्य शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों ने कहा कि छात्रों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संदेश के साथ
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तरी और प्रतिक्रिया सत्र आयोजित किया गया। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए। उपस्थित लोगों ने इसे बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया और जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।



