By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 | 08:28 PM
वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों की नजर अक्सर ट्रेन की रफ्तार, आधुनिक सुविधाओं और आरामदायक कोच पर रहती है, लेकिन इस ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने वाले लोको पायलटों की भूमिका भी उतनी ही अहम है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या वंदे भारत के लोको पायलट बनने के लिए रेलवे अलग से भर्ती निकालता है? दरअसल, वंदे भारत के लिए अलग से कोई सामान्य सीधी भर्ती प्रक्रिया नहीं होती। लोको पायलट बनने का रास्ता रेलवे भर्ती बोर्ड की सहायक लोको पायलट भर्ती से शुरू होता है और आगे अनुभव, पदोन्नति, योग्यता तथा विभागीय जरूरतों के आधार पर जिम्मेदारियां बढ़ती हैं।
भारतीय रेलवे में लोको पायलट बनने की शुरुआती सीढ़ी सहायक लोको पायलट यानी एएलपी का पद है। रेलवे भर्ती बोर्ड समय-समय पर एएलपी के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित करता है। चयनित उम्मीदवार जरूरी प्रशिक्षण और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद रेलवे के लोको रनिंग स्टाफ का हिस्सा बनते हैं।
इसके बाद किसी कर्मचारी को किस तरह की ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी, यह केवल भर्ती के समय तय नहीं होता। अनुभव, पद, सेवा रिकॉर्ड, मेडिकल फिटनेस, दक्षता और रेलवे की परिचालन जरूरतों जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए वंदे भारत जैसी आधुनिक और महत्वपूर्ण ट्रेनों के संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और उपयुक्त कर्मचारियों को दी जा सकती है।
वंदे भारत के लिए क्यों जरूरी है अनुभव?
वंदे भारत एक्सप्रेस सामान्य यात्री ट्रेन से अलग ट्रेनसेट तकनीक पर आधारित है। इसके संचालन के लिए लोको पायलट को ट्रेन की तकनीकी व्यवस्था, नियंत्रण प्रणाली और संबंधित परिचालन नियमों की जानकारी होना जरूरी है। इसी वजह से वंदे भारत जैसी ट्रेनों के संचालन से जुड़े कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण और परिचय कराया जाता है।
यानी अगर किसी युवा का सपना वंदे भारत चलाने का है, तो वह सीधे वंदे भारत लोको पायलट के पद पर नियुक्त होने की उम्मीद नहीं कर सकता। उसे पहले रेलवे की निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के जरिए लोको रनिंग सेवा में प्रवेश करना होगा। आगे की सेवा यात्रा में अनुभव और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर उसे अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनों के संचालन का मौका मिल सकता है।
लोको पायलट बनने की शुरुआत कहां से होती है?
लोको पायलट बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सबसे अहम शुरुआती भर्ती सहायक लोको पायलट यानी एएलपी की होती है। इसकी भर्ती रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार की जाती है। हालांकि, हर भर्ती में पदों की संख्या, उम्र सीमा और अन्य शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से पहले संबंधित आधिकारिक अधिसूचना ध्यान से पढ़नी चाहिए।
एएलपी पद के लिए सामान्य तौर पर उम्मीदवार के पास दसवीं कक्षा के साथ निर्धारित ट्रेड में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई की योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा अधिसूचना में निर्धारित विषयों में इंजीनियरिंग डिप्लोमा या कुछ मामलों में संबंधित इंजीनियरिंग डिग्री भी स्वीकार की जा सकती है। रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, निर्धारित योग्यता ही मान्य होती है और हर तरह की सामान्य या समकक्ष योग्यता अपने आप स्वीकार नहीं की जाती। ([RRB CDG][1])
सिर्फ पढ़ाई नहीं, मेडिकल फिटनेस भी जरूरी
लोको पायलट की नौकरी में केवल शैक्षणिक योग्यता पूरी करना पर्याप्त नहीं है। यह जिम्मेदारी सीधे रेल परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसलिए उम्मीदवार को रेलवे के निर्धारित मेडिकल मानकों को भी पूरा करना पड़ता है।
दृष्टि और अन्य स्वास्थ्य मानकों से जुड़े नियम इस भर्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेडिकल परीक्षण में निर्धारित मानकों को पूरा करना जरूरी होता है। इसलिए एएलपी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के साथ-साथ भर्ती की मेडिकल शर्तों की जानकारी भी पहले से रखनी चाहिए।
एएलपी भर्ती में कैसे होता है चयन?
सहायक लोको पायलट की भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सामान्य तौर पर इसमें कंप्यूटर आधारित पहली परीक्षा, दूसरी कंप्यूटर आधारित परीक्षा, कंप्यूटर आधारित योग्यता परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण शामिल होते हैं।
पहले चरण में उम्मीदवारों की प्रारंभिक कंप्यूटर आधारित परीक्षा होती है। इसके बाद सफल उम्मीदवार अगले चरण में पहुंचते हैं। आगे की प्रक्रिया में तकनीकी ज्ञान और संबंधित योग्यता की जांच की जाती है। लोको पायलट की जिम्मेदारी को देखते हुए कंप्यूटर आधारित योग्यता परीक्षा भी अहम चरण है।
इसके बाद सफल उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की जाती है और निर्धारित मेडिकल परीक्षण कराया जाता है। सभी जरूरी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उम्मीदवार की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। हालांकि, चयन प्रक्रिया के चरण और उनके नियम संबंधित भर्ती अधिसूचना के अनुसार देखना जरूरी है।
एएलपी से सीधे वंदे भारत तक पहुंचना आसान नहीं
यहां एक बात समझना जरूरी है कि एएलपी की भर्ती का मतलब सीधे वंदे भारत का लोको पायलट बन जाना नहीं है। रेलवे में लोको रनिंग स्टाफ के लिए पद और जिम्मेदारियां अनुभव तथा पदोन्नति के साथ आगे बढ़ती हैं।
रेलवे के उपलब्ध पदक्रम संबंधी दस्तावेजों में एएलपी से वरिष्ठ सहायक लोको पायलट और आगे अलग-अलग श्रेणी के लोको पायलट पदों तक बढ़ने का रास्ता दिखता है। मालगाड़ी, यात्री और मेल-एक्सप्रेस जैसी सेवाओं में जिम्मेदारियां अनुभव और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर बढ़ सकती हैं।
यही वजह है कि वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन के संचालन को एक अलग शुरुआती सरकारी नौकरी के रूप में देखना सही नहीं होगा। पहले रेलवे में प्रवेश, फिर प्रशिक्षण, अनुभव और आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद ऐसी महत्वपूर्ण ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी मिल सकती है।
वंदे भारत के लोको पायलट की सैलरी कितनी होती है?
अब बात उस सवाल की, जिसे लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता रहती है। वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने वाले लोको पायलट के लिए कोई अलग से एक तय वेतनमान घोषित होने की बात सामान्य भर्ती नियमों में नहीं मिलती। उनकी आय संबंधित पद, वेतन स्तर, सेवा अवधि और मिलने वाले भत्तों के आधार पर तय होती है।
लोको पायलटों की कमाई में मूल वेतन के अलावा कई तरह के भत्ते भी शामिल हो सकते हैं। इनमें महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और परिवहन से जुड़े भत्तों के साथ रनिंग स्टाफ के लिए लागू भत्ते भी महत्वपूर्ण होते हैं। ड्यूटी की दूरी और काम की प्रकृति के आधार पर मिलने वाला किलोमीटर भत्ता भी कुल आय को प्रभावित कर सकता है।
मार्च 2026 में रेलवे ने रनिंग स्टाफ के लिए किलोमीटर भत्ता और उसके बदले मिलने वाले भत्ते की दरों में संशोधन की जानकारी दी थी। इससे यह साफ होता है कि लोको पायलट की कुल कमाई केवल मूल वेतन देखकर तय नहीं की जा सकती।
क्या वंदे भारत चलाने पर अलग से ज्यादा वेतन मिलता है?
इस सवाल का जवाब थोड़ा सावधानी से समझना जरूरी है। किसी लोको पायलट को वंदे भारत जैसी ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसके लिए एक अलग सरकारी वेतनमान तय है। उसकी कुल आय उसके मूल पद, वेतन स्तर, अनुभव और लागू भत्तों पर निर्भर करती है।
हालांकि, प्रीमियम ट्रेनों के संचालन में अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और रनिंग ड्यूटी से जुड़े भत्ते उनकी कुल मासिक आय को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इंटरनेट पर बताई जाने वाली कोई एक निश्चित रकम हर वंदे भारत लोको पायलट पर लागू नहीं की जा सकती। अलग-अलग कर्मचारी की आय उनकी पोस्टिंग, ड्यूटी, दूरी और भत्तों के हिसाब से अलग हो सकती है।
युवाओं के लिए क्या है सही रास्ता?
अगर किसी युवा का सपना वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का है, तो उसे सबसे पहले रेलवे की सहायक लोको पायलट भर्ती की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए निर्धारित तकनीकी योग्यता हासिल करना, भर्ती परीक्षा की तैयारी करना और मेडिकल मानकों को पूरा करना जरूरी है।
रेलवे में नौकरी मिलने के बाद प्रशिक्षण और अनुभव के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। समय के साथ कर्मचारी की जिम्मेदारी बढ़ सकती है और विभागीय प्रक्रिया के तहत वह लोको पायलट की अलग-अलग श्रेणियों में आगे बढ़ सकता है। इसके बाद अनुभव और आवश्यक मानकों के आधार पर वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन की जिम्मेदारी मिलने का रास्ता खुल सकता है।
इसलिए वंदे भारत में लोको पायलट बनने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे किसी अलग ‘वंदे भारत भर्ती’ का इंतजार करने के बजाय रेलवे भर्ती बोर्ड की सहायक लोको पायलट भर्ती और उसकी आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर रखें। सही शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा की तैयारी, मेडिकल फिटनेस और रेलवे सेवा में अनुभव इस सफर की अहम सीढ़ियां हैं।



