Monday, August 24, 2026
spot_img

National

UP में 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की भर्ती से पहले बड़ा फैसला, 15 दिन में तय होगी डिग्री की योग्यता

By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 | 11:59 AM

उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भर्ती से पहले एक अहम फैसला लिया गया है। प्रदेश के 330 सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में खाली 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों** पर भर्ती शुरू करने से पहले अलग-अलग विषयों की डिग्री और दूसरी शैक्षणिक योग्यताओं की समानता तय की जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित समिति यह तय करेगी कि अलग-अलग विषयों में हासिल की गई किन डिग्रियों और शैक्षणिक योग्यताओं को असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए निर्धारित योग्यता के बराबर माना जा सकता है। इसका मकसद भर्ती का विज्ञापन जारी होने से पहले ही योग्यता को लेकर स्थिति साफ करना है, ताकि बाद में अभ्यर्थियों के बीच किसी तरह का भ्रम पैदा न हो।

15 दिन में देनी होगी पूरी रिपोर्ट
समिति को अपनी सिफारिशों के साथ पूरी रिपोर्ट प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को सौंपनी होगी। इसके लिए उसे 15 दिन का समय दिया गया है। रिपोर्ट में अलग-अलग विषयों से जुड़ी डिग्री और विशेष शैक्षणिक योग्यताओं की समकक्षता के बारे में स्पष्ट सिफारिश की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया में किन योग्यताओं को मान्य किया जाएगा, इसे लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।

समिति में कौन-कौन शामिल होंगे
इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह करेंगे। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से नामित अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी भी समिति में शामिल हैं।

शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिकारी भी रहेंगे
समिति में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव की ओर से नामित अधिकारी और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से नामित अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है। इस तरह समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्च शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है।

समकक्ष डिग्री को लेकर क्यों लिया गया फैसला
दरअसल, अलग-अलग विषयों में कई ऐसी शैक्षणिक योग्यताएं होती हैं जिनकी पढ़ाई और विषय-वस्तु एक-दूसरे से मिलती-जुलती होती है। ऐसे मामलों में यह सवाल उठ सकता है कि किसी खास डिग्री को भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता के बराबर माना जाए या नहीं। इसी वजह से इस बार भर्ती का विज्ञापन जारी होने से पहले ही इस स्थिति को स्पष्ट करने की कवायद शुरू की गई है।

पुराने निर्देशों का भी दिया गया हवाला
समकक्ष योग्यता तय करने का फैसला कार्मिक विभाग की ओर से वर्ष 2021 में जारी निर्देशों के आधार पर लिया गया है। इन निर्देशों में कहा गया था कि जहां भर्ती नियमों में किसी दूसरी योग्यता को निर्धारित योग्यता के समकक्ष मानने का प्रावधान है, वहां चयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले उसकी स्थिति स्पष्ट कर ली जानी चाहिए।

आयोग ने शासन से मांगी थी स्थिति साफ करने की मांग
इसी व्यवस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से भर्ती का विज्ञापन जारी करने से पहले शासन से समकक्ष योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया था। आयोग की कोशिश है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता को लेकर कोई नया विवाद खड़ा न हो और अभ्यर्थियों को आवेदन के समय ही स्पष्ट जानकारी मिल सके।

भर्ती में विवाद और कानूनी अड़चन घटने की उम्मीद
योग्यता पहले से स्पष्ट होने का सीधा फायदा भर्ती प्रक्रिया को मिल सकता है। अगर किसी डिग्री को लेकर बाद में सवाल उठता है तो चयन प्रक्रिया पर विवाद की स्थिति बन सकती है। कई बार ऐसी आपत्तियां कानूनी प्रक्रिया तक भी पहुंच जाती हैं। समिति की रिपोर्ट आने के बाद इन संभावित विवादों को शुरुआत में ही दूर करने की कोशिश की जाएगी।

330 महाविद्यालयों में खाली हैं पद
प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2107 पद खाली बताए गए हैं। इन पदों पर भर्ती का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले योग्यता संबंधी स्थिति साफ करने के लिए उठाया गया यह कदम अभ्यर्थियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद
अब सबसे ज्यादा नजर समिति की रिपोर्ट पर है। अगर तय समय के भीतर रिपोर्ट शासन को मिल जाती है और उसमें सभी प्रमुख विषयों की समकक्ष योग्यताओं को लेकर स्पष्ट सिफारिशें रहती हैं, तो इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्ट के आधार पर विज्ञापन की तैयारी और आवेदन प्रक्रिया शुरू किए जाने की उम्मीद है।

अभ्यर्थियों को अब किस बात का इंतजार
अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि 2107 पदों की भर्ती का विज्ञापन कब जारी होता है और उसमें किन-किन डिग्रियों को मान्य योग्यता के रूप में शामिल किया जाता है। समिति की रिपोर्ट इसी सवाल का आधार तैयार करेगी। इसलिए अगले 15 दिनों में होने वाली कार्रवाई पर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।

भर्ती शुरू होने से पहले ही दूर होगा बड़ा असमंजस
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती से पहले योग्यता का विवाद दूर करने की तैयारी शुरू हो गई है। पांच सदस्यीय समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद समकक्ष डिग्री और शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग भर्ती विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।

International

UP में 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की भर्ती से पहले बड़ा फैसला, 15 दिन में तय होगी डिग्री की योग्यता

By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 | 11:59 AM

उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भर्ती से पहले एक अहम फैसला लिया गया है। प्रदेश के 330 सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में खाली 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों** पर भर्ती शुरू करने से पहले अलग-अलग विषयों की डिग्री और दूसरी शैक्षणिक योग्यताओं की समानता तय की जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित समिति यह तय करेगी कि अलग-अलग विषयों में हासिल की गई किन डिग्रियों और शैक्षणिक योग्यताओं को असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए निर्धारित योग्यता के बराबर माना जा सकता है। इसका मकसद भर्ती का विज्ञापन जारी होने से पहले ही योग्यता को लेकर स्थिति साफ करना है, ताकि बाद में अभ्यर्थियों के बीच किसी तरह का भ्रम पैदा न हो।

15 दिन में देनी होगी पूरी रिपोर्ट
समिति को अपनी सिफारिशों के साथ पूरी रिपोर्ट प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को सौंपनी होगी। इसके लिए उसे 15 दिन का समय दिया गया है। रिपोर्ट में अलग-अलग विषयों से जुड़ी डिग्री और विशेष शैक्षणिक योग्यताओं की समकक्षता के बारे में स्पष्ट सिफारिश की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया में किन योग्यताओं को मान्य किया जाएगा, इसे लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।

समिति में कौन-कौन शामिल होंगे
इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह करेंगे। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से नामित अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी भी समिति में शामिल हैं।

शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिकारी भी रहेंगे
समिति में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव की ओर से नामित अधिकारी और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से नामित अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है। इस तरह समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्च शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है।

समकक्ष डिग्री को लेकर क्यों लिया गया फैसला
दरअसल, अलग-अलग विषयों में कई ऐसी शैक्षणिक योग्यताएं होती हैं जिनकी पढ़ाई और विषय-वस्तु एक-दूसरे से मिलती-जुलती होती है। ऐसे मामलों में यह सवाल उठ सकता है कि किसी खास डिग्री को भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता के बराबर माना जाए या नहीं। इसी वजह से इस बार भर्ती का विज्ञापन जारी होने से पहले ही इस स्थिति को स्पष्ट करने की कवायद शुरू की गई है।

पुराने निर्देशों का भी दिया गया हवाला
समकक्ष योग्यता तय करने का फैसला कार्मिक विभाग की ओर से वर्ष 2021 में जारी निर्देशों के आधार पर लिया गया है। इन निर्देशों में कहा गया था कि जहां भर्ती नियमों में किसी दूसरी योग्यता को निर्धारित योग्यता के समकक्ष मानने का प्रावधान है, वहां चयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले उसकी स्थिति स्पष्ट कर ली जानी चाहिए।

आयोग ने शासन से मांगी थी स्थिति साफ करने की मांग
इसी व्यवस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से भर्ती का विज्ञापन जारी करने से पहले शासन से समकक्ष योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया था। आयोग की कोशिश है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता को लेकर कोई नया विवाद खड़ा न हो और अभ्यर्थियों को आवेदन के समय ही स्पष्ट जानकारी मिल सके।

भर्ती में विवाद और कानूनी अड़चन घटने की उम्मीद
योग्यता पहले से स्पष्ट होने का सीधा फायदा भर्ती प्रक्रिया को मिल सकता है। अगर किसी डिग्री को लेकर बाद में सवाल उठता है तो चयन प्रक्रिया पर विवाद की स्थिति बन सकती है। कई बार ऐसी आपत्तियां कानूनी प्रक्रिया तक भी पहुंच जाती हैं। समिति की रिपोर्ट आने के बाद इन संभावित विवादों को शुरुआत में ही दूर करने की कोशिश की जाएगी।

330 महाविद्यालयों में खाली हैं पद
प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 2107 पद खाली बताए गए हैं। इन पदों पर भर्ती का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले योग्यता संबंधी स्थिति साफ करने के लिए उठाया गया यह कदम अभ्यर्थियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद
अब सबसे ज्यादा नजर समिति की रिपोर्ट पर है। अगर तय समय के भीतर रिपोर्ट शासन को मिल जाती है और उसमें सभी प्रमुख विषयों की समकक्ष योग्यताओं को लेकर स्पष्ट सिफारिशें रहती हैं, तो इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्ट के आधार पर विज्ञापन की तैयारी और आवेदन प्रक्रिया शुरू किए जाने की उम्मीद है।

अभ्यर्थियों को अब किस बात का इंतजार
अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि 2107 पदों की भर्ती का विज्ञापन कब जारी होता है और उसमें किन-किन डिग्रियों को मान्य योग्यता के रूप में शामिल किया जाता है। समिति की रिपोर्ट इसी सवाल का आधार तैयार करेगी। इसलिए अगले 15 दिनों में होने वाली कार्रवाई पर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।

भर्ती शुरू होने से पहले ही दूर होगा बड़ा असमंजस
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती से पहले योग्यता का विवाद दूर करने की तैयारी शुरू हो गई है। पांच सदस्यीय समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद समकक्ष डिग्री और शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग भर्ती विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES