By tagoreeducationtimes | Published: 18 September 2026 | 01:35 PM
APAAR ID को लेकर केंद्र सरकार ने इसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ा दिया है। शिक्षा मंत्रालय की 18 सितंबर 2026 को अपडेट हुई प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक APAAR में रखे अकादमिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल सिर्फ शिक्षण संस्थानों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि अधिकृत नियोक्ताओं के जरिए वेरिफिकेशन के लिए भी किया जा सकता है। इसमें मार्कशीट, डिग्री, सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां शामिल हैं।
नौकरी के समय रिकॉर्ड की जांच हो सकेगी
नई प्राइवेसी पॉलिसी में कहा गया है कि DigiLocker के जरिए अकादमिक जानकारी को अधिकृत थर्ड पार्टी और नियोक्ताओं के साथ वेरिफिकेशन के लिए साझा किया जा सकता है। इसका मतलब है कि भविष्य में नौकरी देने वाली संस्था किसी उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए कर सकेगी। हालांकि, APAAR की नीति व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल के लिए सहमति और लागू डेटा सुरक्षा कानूनों के पालन की बात भी कहती है। ([Apaar][1])
सुप्रीम कोर्ट ने सहमति को लेकर दिया था निर्देश
APAAR ID को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि APAAR के लिए अभिभावकों की सहमति स्पष्ट और वास्तविक होनी चाहिए। इसके लिए सहमति फॉर्म में अभिभावकों को ID बनाने से इनकार करने या ऑप्ट-आउट करने का विकल्प देने का निर्देश दिया गया। यह व्यवस्था देशभर में लागू करने को कहा गया है।
निजी डेटा शेयर करने पर भी लगी सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि APAAR के तहत जुटाई गई निजी जानकारी को किसी निजी संस्था या थर्ड पार्टी को कानून के मुताबिक अधिकृत उद्देश्य के अलावा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने डेटा के संग्रह, इस्तेमाल, स्टोरेज और शेयरिंग को Digital Personal Data Protection Act, 2023 के प्रावधानों के तहत रखने की बात कही है।
क्या है APAAR ID?
APAAR का पूरा नाम Automated Permanent Academic Account Registry है। यह केंद्र सरकार के ‘One Nation, One Student ID’ कार्यक्रम का हिस्सा है। APAAR पोर्टल के अनुसार प्रत्येक छात्र के लिए एक यूनिक ID बनाई जाती है, जिसके जरिए उसके अकादमिक रिकॉर्ड और उपलब्धियों को डिजिटल रूप में जोड़ा और सुरक्षित रखा जा सकता है। यह DigiLocker और Academic Bank of Credits जैसी व्यवस्थाओं से भी जुड़ा है।
स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक रिकॉर्ड
APAAR का उद्देश्य छात्र के अलग-अलग संस्थानों में पढ़ाई के दौरान तैयार होने वाले अकादमिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ना है। इसमें मार्कशीट, ग्रेड शीट, ट्रांसक्रिप्ट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और दूसरी शैक्षणिक उपलब्धियां शामिल हो सकती हैं। इससे संस्थान बदलने या आगे की पढ़ाई के दौरान रिकॉर्ड हासिल करने और सत्यापित करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
APAAR बनवाना और सहमति का सवाल
APAAR की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि ID बनाने की प्रक्रिया में अभिभावकों की सहमति ली जाती है और UDISE सिस्टम के जरिए ID तैयार होकर छात्र के DigiLocker खाते में भेजी जाती है। सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2026 के आदेश के बाद सहमति फॉर्म में स्पष्ट ऑप्ट-आउट/इनकार का विकल्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।
डेटा की सुरक्षा पर जोर
अपडेटेड प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार APAAR में व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी के लिए एक्सेस कंट्रोल और एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि डेटा का इस्तेमाल लागू डेटा सुरक्षा कानूनों के अनुसार किया जाएगा।



