Friday, November 6, 2026
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काशी विद्यापीठ में दीपावली उत्सव का आगाज, रंगोली के रंगों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

By tagoreeducationtimes | Published: 04 November 2026 | 07:12 PM

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बुधवार को दो दिवसीय ‘दीपावली उत्सव 2026’ की शुरुआत हुई। पहले दिन शिक्षा शास्त्र विभाग की ओर से रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए भारतीय संस्कृति और दीपावली की परंपराओं को प्रदर्शित किया।

रंगोली के जरिए दिखाई भारतीय परंपराओं की खूबसूरती
कार्यक्रम में शिक्षा शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमाकान्त सिंह ने दीपावली और रंगोली के पारंपरिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रंगोली भारतीय संस्कृति की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे मां लक्ष्मी के स्वागत के साथ सुख-समृद्धि, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

अतिथियों के स्वागत से जुड़ी है रंगोली की परंपरा
प्रो. सिंह ने बताया कि दीपावली पर घरों के प्रवेश द्वार पर बनाई जाने वाली रंग-बिरंगी रंगोलियां केवल सजावट का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए अतिथियों का स्वागत और खुशियों का इजहार भी किया जाता है। यह परंपरा आपसी सौहार्द, प्रसन्नता और उत्सव की भावना को भी दर्शाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन परंपराओं के सांस्कृतिक महत्व को समझने और भारत की समृद्ध कला विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की।

तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन
रंगोली प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शिक्षा संकाय के अध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा, समाज कार्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. वंदना सिन्हा और प्रो. शैला परवीन शामिल रहीं।

शिक्षक और विभागीय सदस्य भी रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रो. सुरेन्द्र राम, डॉ. अभिलाषा जायसवाल, डॉ. वीणा वादिनी, डॉ. राखी देव, डॉ. ध्यानेंद्र मिश्रा, डॉ. रमेश प्रजापति, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. ज्योत्सना राय, डॉ. पवन, डॉ. विनय और डॉ. वरुण सहित अन्य शिक्षक एवं विभागीय सदस्य उपस्थित रहे।

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काशी विद्यापीठ में दीपावली उत्सव का आगाज, रंगोली के रंगों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

By tagoreeducationtimes | Published: 04 November 2026 | 07:12 PM

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में बुधवार को दो दिवसीय ‘दीपावली उत्सव 2026’ की शुरुआत हुई। पहले दिन शिक्षा शास्त्र विभाग की ओर से रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए भारतीय संस्कृति और दीपावली की परंपराओं को प्रदर्शित किया।

रंगोली के जरिए दिखाई भारतीय परंपराओं की खूबसूरती
कार्यक्रम में शिक्षा शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमाकान्त सिंह ने दीपावली और रंगोली के पारंपरिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि रंगोली भारतीय संस्कृति की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे मां लक्ष्मी के स्वागत के साथ सुख-समृद्धि, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

अतिथियों के स्वागत से जुड़ी है रंगोली की परंपरा
प्रो. सिंह ने बताया कि दीपावली पर घरों के प्रवेश द्वार पर बनाई जाने वाली रंग-बिरंगी रंगोलियां केवल सजावट का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए अतिथियों का स्वागत और खुशियों का इजहार भी किया जाता है। यह परंपरा आपसी सौहार्द, प्रसन्नता और उत्सव की भावना को भी दर्शाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन परंपराओं के सांस्कृतिक महत्व को समझने और भारत की समृद्ध कला विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की।

तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन
रंगोली प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शिक्षा संकाय के अध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा, समाज कार्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. वंदना सिन्हा और प्रो. शैला परवीन शामिल रहीं।

शिक्षक और विभागीय सदस्य भी रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रो. सुरेन्द्र राम, डॉ. अभिलाषा जायसवाल, डॉ. वीणा वादिनी, डॉ. राखी देव, डॉ. ध्यानेंद्र मिश्रा, डॉ. रमेश प्रजापति, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. ज्योत्सना राय, डॉ. पवन, डॉ. विनय और डॉ. वरुण सहित अन्य शिक्षक एवं विभागीय सदस्य उपस्थित रहे।

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