By Malay Ojha | Published: 08 August 2026 | 08:42 PM
उत्तर प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए योगी सरकार ने करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर नई पहल शुरू की है। अब जिलों में तैनात युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी हर महीने कम से कम एक स्कूल में जाकर छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान अधिकारी बच्चों के सवालों का जवाब देंगे और उन्हें यूपीएससी, यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, एनडीए, जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं की तैयारी और आगे के करियर को लेकर जरूरी जानकारी देंगे।
सरकार के निर्देश के मुताबिक जिलाधिकारी अपने जिले में हर महीने कम से कम एक स्कूल में किसी युवा आईएएस, आईपीएस या आईएफएस अधिकारी के दौरे की व्यवस्था करेंगे। इसके लिए सरकारी स्कूल के साथ निजी स्कूल को भी चुना जा सकता है। मकसद सिर्फ अधिकारियों का स्कूल दौरा कराना नहीं, बल्कि छात्रों को उनके साथ सीधे बातचीत का मौका देना है।
छात्रों के सवालों पर अफसर देंगे जवाब
स्कूल में अधिकारी छात्रों के साथ संवाद और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। छात्र पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरी और भविष्य के करियर को लेकर अपने सवाल सीधे अधिकारियों से पूछ सकेंगे। इससे उन बच्चों को भी सही दिशा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और अलग-अलग करियर विकल्पों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती।
यूपीएससी से लेकर जेईई-नीट तक की तैयारी पर चर्चा
अधिकारियों के संवाद में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रमुख जगह दी जाएगी। छात्रों को बताया जाएगा कि कौन सी परीक्षा किस स्तर पर होती है, उसके लिए किस तरह की तैयारी करनी चाहिए और पढ़ाई के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। यूपीएससी, यूपीपीएससी और यूपीएसएसएससी के अलावा एनडीए, जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।
परीक्षा के साथ करियर चुनने में भी मिलेगी मदद
कई बार छात्र किसी परीक्षा या नौकरी की तैयारी तो शुरू कर देते हैं, लेकिन उन्हें यह साफ नहीं होता कि वह उनके लिए सही विकल्प है या नहीं। ऐसे में अधिकारियों से बातचीत छात्रों को अलग-अलग क्षेत्रों को समझने में मदद कर सकती है। उन्हें बताया जाएगा कि स्कूली पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के कौन-कौन से रास्ते खुले हैं और अलग-अलग विषयों के आधार पर आगे क्या किया जा सकता है।
सरकारी नौकरी ही नहीं, रोजगार पर भी बात
इस पहल का दायरा केवल सरकारी नौकरी की तैयारी तक सीमित नहीं रहेगा। छात्रों को रोजगार के बदलते अवसरों, कौशल विकास, स्वरोजगार और अपना काम शुरू करने से जुड़े विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी। सरकार चाहती है कि विद्यार्थी केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के हिसाब से दूसरे रास्तों पर भी विचार करें।
छात्रों को सरकारी योजनाओं की भी जानकारी
अधिकारी केंद्र और राज्य सरकार की छात्र हित से जुड़ी योजनाओं के बारे में भी जानकारी देंगे। इसका उद्देश्य यह है कि पात्र छात्र उन योजनाओं का लाभ उठा सकें, जिनकी जानकारी के अभाव में वे अक्सर वंचित रह जाते हैं। छात्रवृत्ति, शिक्षा और आगे की पढ़ाई से जुड़ी योजनाओं के बारे में भी संवाद के दौरान जानकारी दी जा सकती है।
छोटे शहरों और जिलों के छात्रों को फायदा
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर बड़े शहरों में रहने वाले छात्रों को अक्सर ज्यादा जानकारी और मार्गदर्शन मिल जाता है। इसके मुकाबले छोटे शहरों और जिलों के कई छात्रों को परीक्षा की तैयारी, सही विषय चुनने और करियर के विकल्प समझने के लिए सीमित संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में स्कूल स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों से सीधा संवाद उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
अफसरों के अनुभव से छात्रों को मिलेगा आत्मविश्वास
आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी खुद कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरकर प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचे हैं। ऐसे अधिकारियों से बातचीत में छात्रों को किताबों की जानकारी के साथ तैयारी के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा। अधिकारी अपने अनुभव, पढ़ाई के तरीके, समय प्रबंधन और लक्ष्य तय करने जैसी बातों पर भी छात्रों से चर्चा कर सकते हैं।
स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर बनेगा कार्यक्रम
अधिकारियों के स्कूल पहुंचने से पहले स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर संवाद का कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसमें छात्रों के लिए प्रश्नोत्तरी और खुली बातचीत रखी जा सकती है, ताकि वे अपनी जिज्ञासाओं को सीधे अधिकारियों के सामने रख सकें। इस व्यवस्था में जिलाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें हर महीने कम से कम एक स्कूल में ऐसे कार्यक्रम की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
केवल भाषण नहीं, सवाल-जवाब पर रहेगा जोर
सरकार की इस पहल का सबसे अहम हिस्सा छात्रों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद है। यानी कार्यक्रम केवल औपचारिक भाषण तक सीमित रखने के बजाय बच्चों को सवाल पूछने का मौका देने पर जोर रहेगा। इससे छात्रों को अपनी वास्तविक समस्याओं और उलझनों पर अधिकारियों से जवाब लेने का अवसर मिलेगा।
करियर को लेकर सही समय पर मिलेगी दिशा
स्कूल के वर्षों में ही छात्रों के सामने आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर कई सवाल खड़े होने लगते हैं। कौन सा विषय चुना जाए, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कब शुरू की जाए और सरकारी नौकरी के अलावा कौन से विकल्प मौजूद हैं, ऐसे सवालों का जवाब उन्हें समय पर मिलना जरूरी है। सरकार को उम्मीद है कि अधिकारियों के साथ नियमित संवाद से छात्रों को अपने भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
यूपी के छात्रों को स्कूल से ही करियर मार्गदर्शन देने की कोशिश
दरअसल, सरकार की इस पहल का मकसद स्कूल और प्रशासन के बीच संवाद को बढ़ाने के साथ छात्रों को करियर की सही जानकारी देना है। अधिकारियों की मौजूदगी से बच्चों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी बड़े पद या प्रतियोगी परीक्षा तक पहुंचने के लिए सिर्फ सपना देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए सही दिशा, नियमित पढ़ाई और लगातार मेहनत जरूरी है।
आने वाले समय में इस पहल का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जिलों में इन कार्यक्रमों को कितनी नियमितता और गंभीरता से लागू किया जाता है। अगर छात्रों को हर महीने अधिकारियों से खुलकर सवाल पूछने और अपने करियर को लेकर स्पष्ट जानकारी लेने का अवसर मिलता है, तो यह व्यवस्था खासकर उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अभी अपने भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं।



