Friday, June 12, 2026
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रविवार को वॉशिंग मशीन चलाने पर भी लग सकता है जुर्माना! इस देश के सख्त नियम जानकर रह जाएंगे हैरान

By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 | 05:50 PM

दुनिया के कई देशों में रविवार छुट्टी का दिन होता है, लेकिन एक ऐसा देश भी है जहां इस दिन शांति भंग करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। जर्मनी में रविवार को आराम और सुकून का दिन माना जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति तेज आवाज में संगीत बजाता है, वॉशिंग मशीन चलाता है या पड़ोसियों को परेशान करने वाला शोर करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो सकती है। कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया जाता है।

जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि रविवार परिवार, आराम और मानसिक शांति के लिए सुरक्षित रखा जाए। इसी सोच के तहत कई स्थानीय कानून बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को अनावश्यक शोर से बचाना है। वहां रहने वाले लोगों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने घर में बिना किसी बाधा के सुकून का माहौल पा सकें।

तेज संगीत और टीवी बन सकते हैं परेशानी की वजह
रविवार के दिन अगर कोई व्यक्ति बहुत तेज आवाज में संगीत बजाता है या टीवी की आवाज जरूरत से ज्यादा रखता है तो पड़ोसी इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन या पुलिस मामले की जांच कर सकती है। यदि यह साबित हो जाए कि शोर की वजह से आसपास के लोगों को परेशानी हुई है तो चेतावनी से लेकर जुर्माने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

वॉशिंग मशीन चलाने पर भी उठ सकते हैं सवाल
कई बहुमंजिला आवासीय इमारतों में वॉशिंग मशीन को भी शोर पैदा करने वाले उपकरणों की श्रेणी में रखा जाता है। मशीन के घूमने और कंपन की वजह से आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। इसी कारण कुछ आवासीय परिसरों में रविवार या तय शांत समय के दौरान ऐसी मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है। हालांकि यह नियम हर इलाके और हर इमारत में अलग-अलग हो सकता है।

सिर्फ कपड़े धोना ही नहीं, इन कामों पर भी नजर
नियम केवल वॉशिंग मशीन या संगीत तक सीमित नहीं हैं। कई क्षेत्रों में लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे रविवार को घास काटने वाली मशीन का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा दीवारों में छेद करने, हथौड़ा चलाने, कार धोने या कांच की बोतलों को रीसाइक्लिंग कंटेनरों में डालने जैसी गतिविधियों से भी बचने की सलाह दी जाती है। इन कामों से होने वाला शोर पड़ोसियों के लिए परेशानी बन सकता है।

शिकायत के बाद क्या होती है कार्रवाई?
अधिकतर मामलों में शुरुआत पड़ोसियों की शिकायत से होती है। पहले संबंधित व्यक्ति को समझाया या चेतावनी दी जाती है। यदि इसके बावजूद नियमों की अनदेखी जारी रहती है तो प्रशासन जुर्माना लगा सकता है। जर्मनी में शोर संबंधी नियमों के उल्लंघन पर करीब 50 यूरो से 2500 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि मामले की गंभीरता और नियम तोड़ने की संख्या पर निर्भर करती है।

बार-बार गलती करने वालों पर और सख्ती
यदि कोई व्यक्ति लगातार शिकायतों के बावजूद नियमों का पालन नहीं करता तो मामला और गंभीर हो सकता है। ऐसी स्थिति में मकान मालिक या आवास प्रबंधन संस्था किराएदारी से जुड़े कदम उठा सकती है। कुछ मामलों में आवासीय समझौता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

शांति बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं नियम
इन नियमों का मकसद लोगों को परेशान करना नहीं बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में सभी को शांत वातावरण उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि जर्मनी जैसे देशों में रविवार को आराम और सुकून के दिन के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। वहां रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ छुट्टी नहीं बल्कि शांति का अधिकार भी माना जाता है।

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रविवार को वॉशिंग मशीन चलाने पर भी लग सकता है जुर्माना! इस देश के सख्त नियम जानकर रह जाएंगे हैरान

By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 | 05:50 PM

दुनिया के कई देशों में रविवार छुट्टी का दिन होता है, लेकिन एक ऐसा देश भी है जहां इस दिन शांति भंग करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। जर्मनी में रविवार को आराम और सुकून का दिन माना जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति तेज आवाज में संगीत बजाता है, वॉशिंग मशीन चलाता है या पड़ोसियों को परेशान करने वाला शोर करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो सकती है। कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया जाता है।

जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि रविवार परिवार, आराम और मानसिक शांति के लिए सुरक्षित रखा जाए। इसी सोच के तहत कई स्थानीय कानून बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को अनावश्यक शोर से बचाना है। वहां रहने वाले लोगों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने घर में बिना किसी बाधा के सुकून का माहौल पा सकें।

तेज संगीत और टीवी बन सकते हैं परेशानी की वजह
रविवार के दिन अगर कोई व्यक्ति बहुत तेज आवाज में संगीत बजाता है या टीवी की आवाज जरूरत से ज्यादा रखता है तो पड़ोसी इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन या पुलिस मामले की जांच कर सकती है। यदि यह साबित हो जाए कि शोर की वजह से आसपास के लोगों को परेशानी हुई है तो चेतावनी से लेकर जुर्माने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

वॉशिंग मशीन चलाने पर भी उठ सकते हैं सवाल
कई बहुमंजिला आवासीय इमारतों में वॉशिंग मशीन को भी शोर पैदा करने वाले उपकरणों की श्रेणी में रखा जाता है। मशीन के घूमने और कंपन की वजह से आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। इसी कारण कुछ आवासीय परिसरों में रविवार या तय शांत समय के दौरान ऐसी मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है। हालांकि यह नियम हर इलाके और हर इमारत में अलग-अलग हो सकता है।

सिर्फ कपड़े धोना ही नहीं, इन कामों पर भी नजर
नियम केवल वॉशिंग मशीन या संगीत तक सीमित नहीं हैं। कई क्षेत्रों में लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे रविवार को घास काटने वाली मशीन का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा दीवारों में छेद करने, हथौड़ा चलाने, कार धोने या कांच की बोतलों को रीसाइक्लिंग कंटेनरों में डालने जैसी गतिविधियों से भी बचने की सलाह दी जाती है। इन कामों से होने वाला शोर पड़ोसियों के लिए परेशानी बन सकता है।

शिकायत के बाद क्या होती है कार्रवाई?
अधिकतर मामलों में शुरुआत पड़ोसियों की शिकायत से होती है। पहले संबंधित व्यक्ति को समझाया या चेतावनी दी जाती है। यदि इसके बावजूद नियमों की अनदेखी जारी रहती है तो प्रशासन जुर्माना लगा सकता है। जर्मनी में शोर संबंधी नियमों के उल्लंघन पर करीब 50 यूरो से 2500 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि मामले की गंभीरता और नियम तोड़ने की संख्या पर निर्भर करती है।

बार-बार गलती करने वालों पर और सख्ती
यदि कोई व्यक्ति लगातार शिकायतों के बावजूद नियमों का पालन नहीं करता तो मामला और गंभीर हो सकता है। ऐसी स्थिति में मकान मालिक या आवास प्रबंधन संस्था किराएदारी से जुड़े कदम उठा सकती है। कुछ मामलों में आवासीय समझौता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

शांति बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं नियम
इन नियमों का मकसद लोगों को परेशान करना नहीं बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में सभी को शांत वातावरण उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि जर्मनी जैसे देशों में रविवार को आराम और सुकून के दिन के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। वहां रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ छुट्टी नहीं बल्कि शांति का अधिकार भी माना जाता है।

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