Sunday, May 31, 2026
spot_img

National

पत्नी साल भर मायके में रहे तो क्या पति को मिल सकता है तलाक? कानून का यह सच चौंका देगा!

टैगोर एजुकेशन टाइम्स टीम | Published: 31 May 2026 | 02:35 PM

शादी केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का भी भावनात्मक जुड़ाव माना जाता है। लेकिन जब आपसी मतभेद गहराने लगते हैं तो कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि पत्नी अपने मायके चली जाती है और लंबे समय तक वापस नहीं लौटती। ऐसे में पति के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल अलग रहने के आधार पर विवाह को कानूनी रूप से समाप्त किया जा सकता है।

भारतीय वैवाहिक कानून के अनुसार यदि कोई जीवनसाथी बिना किसी उचित कारण के दूसरे साथी का साथ छोड़कर लंबे समय तक अलग रहता है तो उसे परित्याग माना जाता है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यदि यह अलगाव लगातार एक वर्ष या उससे अधिक समय तक बना रहे तो पीड़ित पक्ष न्यायालय में तलाक की अर्जी दे सकता है।

क्या यह मानसिक क्रूरता भी मानी जा सकती है
कई मामलों में न्यायालय यह भी मानता है कि बिना उचित कारण के जीवनसाथी को वैवाहिक साथ से वंचित रखना मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है। यदि पति यह साबित कर देता है कि पत्नी के इस व्यवहार से उसकी मानसिक शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, तो अदालत इसे क्रूरता का आधार मान सकती है और तलाक की अनुमति दे सकती है।

वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना का विकल्प
विवाद की स्थिति में पति के पास केवल तलाक का विकल्प ही नहीं होता। वह न्यायालय से वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना की मांग भी कर सकता है। इस प्रक्रिया में अदालत पत्नी को वैवाहिक जीवन में वापस लौटने का निर्देश दे सकती है। यदि इस आदेश के बाद भी पत्नी वापस नहीं आती तो यह स्थिति पति के पक्ष को और मजबूत कर देती है।

न्यायालयों की दृष्टि और आवश्यक शर्तें
विभिन्न मामलों में उच्चतम न्यायालय सहित कई अदालतों ने यह स्पष्ट किया है कि यदि वैवाहिक संबंध पूरी तरह से टूट चुका हो और लंबे समय से दोनों अलग रह रहे हों, तो तलाक दिया जा सकता है। हालांकि यह भी आवश्यक है कि विवाह को कम से कम एक वर्ष पूरा हो चुका हो, तभी तलाक की याचिका स्वीकार की जाती है।

हर विवाद का समाधान कानून और संवाद में
ऐसे संवेदनशील मामलों में केवल कानूनी लड़ाई ही अंतिम रास्ता नहीं होता। कई बार संवाद और समझदारी से भी रिश्तों को बचाया जा सकता है। लेकिन यदि स्थिति सुधारने के सभी प्रयास विफल हो जाएं और अलगाव लंबा खिंच जाए, तो कानून पीड़ित पक्ष को उचित अधिकार देता है।

International

पत्नी साल भर मायके में रहे तो क्या पति को मिल सकता है तलाक? कानून का यह सच चौंका देगा!

टैगोर एजुकेशन टाइम्स टीम | Published: 31 May 2026 | 02:35 PM

शादी केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का भी भावनात्मक जुड़ाव माना जाता है। लेकिन जब आपसी मतभेद गहराने लगते हैं तो कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि पत्नी अपने मायके चली जाती है और लंबे समय तक वापस नहीं लौटती। ऐसे में पति के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल अलग रहने के आधार पर विवाह को कानूनी रूप से समाप्त किया जा सकता है।

भारतीय वैवाहिक कानून के अनुसार यदि कोई जीवनसाथी बिना किसी उचित कारण के दूसरे साथी का साथ छोड़कर लंबे समय तक अलग रहता है तो उसे परित्याग माना जाता है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यदि यह अलगाव लगातार एक वर्ष या उससे अधिक समय तक बना रहे तो पीड़ित पक्ष न्यायालय में तलाक की अर्जी दे सकता है।

क्या यह मानसिक क्रूरता भी मानी जा सकती है
कई मामलों में न्यायालय यह भी मानता है कि बिना उचित कारण के जीवनसाथी को वैवाहिक साथ से वंचित रखना मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है। यदि पति यह साबित कर देता है कि पत्नी के इस व्यवहार से उसकी मानसिक शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, तो अदालत इसे क्रूरता का आधार मान सकती है और तलाक की अनुमति दे सकती है।

वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना का विकल्प
विवाद की स्थिति में पति के पास केवल तलाक का विकल्प ही नहीं होता। वह न्यायालय से वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना की मांग भी कर सकता है। इस प्रक्रिया में अदालत पत्नी को वैवाहिक जीवन में वापस लौटने का निर्देश दे सकती है। यदि इस आदेश के बाद भी पत्नी वापस नहीं आती तो यह स्थिति पति के पक्ष को और मजबूत कर देती है।

न्यायालयों की दृष्टि और आवश्यक शर्तें
विभिन्न मामलों में उच्चतम न्यायालय सहित कई अदालतों ने यह स्पष्ट किया है कि यदि वैवाहिक संबंध पूरी तरह से टूट चुका हो और लंबे समय से दोनों अलग रह रहे हों, तो तलाक दिया जा सकता है। हालांकि यह भी आवश्यक है कि विवाह को कम से कम एक वर्ष पूरा हो चुका हो, तभी तलाक की याचिका स्वीकार की जाती है।

हर विवाद का समाधान कानून और संवाद में
ऐसे संवेदनशील मामलों में केवल कानूनी लड़ाई ही अंतिम रास्ता नहीं होता। कई बार संवाद और समझदारी से भी रिश्तों को बचाया जा सकता है। लेकिन यदि स्थिति सुधारने के सभी प्रयास विफल हो जाएं और अलगाव लंबा खिंच जाए, तो कानून पीड़ित पक्ष को उचित अधिकार देता है।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES