देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजस्थान पुलिस की विशेष अभियान समूह जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि कथित गेस पेपर के 120 सवाल मुख्य परीक्षा से मेल खाते हैं। हालांकि जांच एजेंसी ने अब तक आधिकारिक तौर पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सवाल मिलने से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा से करीब एक महीने पहले कुछ अभ्यर्थियों के पास एक कथित गेस पेपर मौजूद था। दावा किया जा रहा है कि इसी गेस पेपर के 120 सवाल मुख्य परीक्षा में पूछे गए।
हालांकि अलग-अलग प्रश्न पत्र सेट होने के कारण किसी एक छात्र को अधिकतम 45 सवाल तक का सीधा फायदा मिल सकता है, जो कुल 180 अंकों के बराबर होता है।
नीट यूजी में कुल कितने सवाल पूछे जाते हैं?
नीट यूजी परीक्षा कुल 720 अंकों की होती है। इसमें 180 बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं। प्रत्येक सही जवाब पर 4 अंक मिलते हैं, जबकि गलत उत्तर देने पर 1 अंक काट लिया जाता है।
परीक्षा पैटर्न के अनुसार जीव विज्ञान से 90 सवाल, जबकि भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान से 45-45 सवाल पूछे जाते हैं।
एक-एक नंबर तय करता है मेडिकल कॉलेज
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हर अंक की बेहद अहम भूमिका होती है। कई बार केवल एक नंबर के अंतर से सरकारी मेडिकल कॉलेज और निजी मेडिकल कॉलेज के बीच अंतर तय हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी छात्र को कथित तौर पर 180 अंकों तक का अतिरिक्त फायदा मिला हो तो इसका असर सीधे मेरिट सूची और सीट आवंटन पर पड़ सकता है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पाना क्यों कठिन?
हर वर्ष करीब 22 लाख छात्र नीट यूजी परीक्षा में शामिल होते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र एमबीबीएस में दाखिला लेने का लक्ष्य रखते हैं।
देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 700 से अधिक है, लेकिन एमबीबीएस की कुल सीटें लगभग 1 लाख 30 हजार ही हैं। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें करीब 60 हजार मानी जाती हैं।
एक सीट के लिए 17 छात्रों में मुकाबला
आंकड़ों के अनुसार एमबीबीएस की एक सीट के लिए औसतन 17 छात्र आवेदन करते हैं। ऐसे में थोड़े से अंकों का अंतर भी किसी छात्र का भविष्य बदल सकता है।
इसी कारण परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी और निजी कॉलेज की फीस में बड़ा अंतर
देश के शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बहुत कम फीस पर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की जा सकती है। कई सरकारी संस्थानों में पूरी पढ़ाई की फीस कुछ हजार से लेकर चालीस हजार रुपये तक होती है।
वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस 40 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि अधिकतर छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
जांच जारी, छात्रों में बढ़ी चिंता
राजस्थान पुलिस की विशेष अभियान समूह फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है। हालांकि अब तक पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गेस पेपर और मुख्य परीक्षा के सवालों में कथित समानता ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।



