By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 | 04:41 PM
NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पाने की बारी है। लेकिन सिर्फ नीट पास करना ही काफी नहीं है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उम्मीदवारों को काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसी प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रेशन, पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम का चयन, सीट आवंटन और फिर कॉलेज में दाखिला पूरा किया जाता है। ऐसे में नीट यूजी 2026 पास करने वाले छात्रों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि काउंसलिंग कितने स्तर पर होगी और किस चरण में उन्हें मेडिकल सीट मिल सकती है।
नीट यूजी परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार सीधे किसी मेडिकल कॉलेज में जाकर एमबीबीएस में दाखिला नहीं ले सकते। इसके लिए उन्हें संबंधित काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होना होता है। उम्मीदवारों को अपनी पात्रता के अनुसार काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है और फिर उपलब्ध मेडिकल कॉलेजों की सीटों के लिए अपनी पसंद भरनी होती है।
सीट आवंटन उम्मीदवार की नीट रैंक, कैटेगरी, भरी गई पसंद और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाता है। इसलिए नीट में अच्छी रैंक हासिल करने के साथ-साथ काउंसलिंग के दौरान कॉलेज और पाठ्यक्रम की पसंद भरना भी बेहद अहम होता है।
एमबीबीएस एडमिशन के लिए कितने तरह की काउंसलिंग होती है?
देश में एमबीबीएस सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया को मोटे तौर पर दो हिस्सों में समझा जा सकता है—ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग और स्टेट काउंसलिंग। ऑल इंडिया कोटा की काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी एमसीसी की ओर से कराई जाती है। वहीं राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी प्रक्रिया पूरी करती है।
यानी नीट यूजी 2026 पास करने वाले उम्मीदवारों को यह देखना होगा कि वे किस तरह की सीट के लिए आवेदन करना चाहते हैं। इसके बाद उन्हें संबंधित काउंसलिंग की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग में किन सीटों पर दाखिला मिलता है?
एमसीसी की ओर से कराई जाने वाली अंडरग्रेजुएट काउंसलिंग में राज्यों की 15 फीसदी ऑल इंडिया कोटा सीटें शामिल होती हैं। इसके अलावा एम्स और जेआईपीएमईआर सहित कुछ केंद्रीय संस्थानों की सीटों का आवंटन भी एमसीसी की काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। इसलिए उम्मीदवारों के लिए एमसीसी की काउंसलिंग काफी महत्वपूर्ण होती है।
एमसीसी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसकी यूजी काउंसलिंग में 15 फीसदी ऑल इंडिया कोटा सीटों के साथ एम्स की 100 फीसदी एमबीबीएस सीटें और जेआईपीएमईआर की 100 फीसदी सीटें भी शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग संस्थानों और सीटों के लिए पात्रता और नियम अलग हो सकते हैं।
स्टेट काउंसलिंग में कैसे मिलता है एमबीबीएस कॉलेज?
राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी की ओर से प्रक्रिया आयोजित की जाती है। इसमें राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संबंधित राज्य कोटा सीटों के साथ निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भी नियमों के अनुसार शामिल हो सकती हैं।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर राज्य की काउंसलिंग प्रक्रिया और पात्रता नियम एक जैसे नहीं होते। डोमिसाइल, राज्य की पात्रता शर्तें और सीटों की कैटेगरी के आधार पर नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को अपने राज्य की आधिकारिक काउंसलिंग अथॉरिटी की अधिसूचना जरूर पढ़नी चाहिए।
काउंसलिंग में कितने राउंड होते हैं?
एमबीबीएस काउंसलिंग में राउंड की संख्या हर साल और सीटों की स्थिति के अनुसार बदल सकती है। आम तौर पर प्रक्रिया में राउंड 1, राउंड 2 और राउंड 3 के बाद स्ट्रे वैकेंसी राउंड आयोजित किया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में खाली सीटों को भरने के लिए स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड भी कराया जा सकता है।
इसलिए यह मानना सही नहीं है कि हर साल एमबीबीएस एडमिशन के लिए सिर्फ चार राउंड ही होंगे। काउंसलिंग का अंतिम कार्यक्रम संबंधित साल की आधिकारिक अधिसूचना और उपलब्ध सीटों के आधार पर तय किया जाता है। एमसीसी के पिछले काउंसलिंग रिकॉर्ड में राउंड 1, राउंड 2, राउंड 3, स्ट्रे वैकेंसी और स्पेशल स्ट्रे राउंड से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम जारी किए गए हैं।
राउंड 1 में क्या होता है?
काउंसलिंग के पहले राउंड में उम्मीदवार को सबसे पहले संबंधित काउंसलिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद वह अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और पाठ्यक्रम की चॉइस भरता है। उम्मीदवार को चॉइस भरते समय अपनी पसंद का क्रम बहुत सोच-समझकर तय करना चाहिए, क्योंकि सीट आवंटन इसी प्राथमिकता और उसकी रैंक समेत अन्य नियमों के आधार पर किया जाता है।
राउंड 1 के परिणाम में अगर उम्मीदवार को सीट मिल जाती है तो उसे तय समय के भीतर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें कॉलेज में रिपोर्ट करना, जरूरी दस्तावेज जमा करना और दाखिले से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करना शामिल हो सकता है। अगर काउंसलिंग के नियमों के तहत विकल्प उपलब्ध हो तो उम्मीदवार आगे के राउंड में बेहतर सीट के लिए अपग्रेडेशन का विकल्प भी चुन सकता है।
राउंड 2 में क्या होता है?
राउंड 2 में उन सीटों पर भी आवंटन किया जाता है जो पहले राउंड के बाद खाली रह गई हों या उम्मीदवारों के सीट छोड़ने अथवा अपग्रेड होने के कारण उपलब्ध हुई हों। इस चरण में उम्मीदवारों को दोबारा अपनी पसंद भरने या पहले से भरी चॉइस को लेकर लागू नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।
राउंड 2 उन छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है जिन्हें पहले राउंड में सीट नहीं मिली या जो अपनी मौजूदा सीट से बेहतर विकल्प की तलाश में हैं। हालांकि, सीट स्वीकार करने और आगे की काउंसलिंग में शामिल होने के नियम संबंधित काउंसलिंग की अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकते हैं।
राउंड 3 में क्या मौका मिलता है?
राउंड 3 में भी उपलब्ध खाली सीटों के लिए सीट आवंटन किया जाता है। इस चरण तक पहुंचने पर उम्मीदवारों को काउंसलिंग के नियमों को ध्यान से समझना चाहिए, क्योंकि एक बार सीट आवंटित होने के बाद उसे स्वीकार करने, छोड़ने या आगे की प्रक्रिया में शामिल होने से जुड़े नियम पहले के राउंड से अलग हो सकते हैं।
एमसीसी की पिछली यूजी काउंसलिंग में राउंड 3 के लिए अलग सीट मैट्रिक्स और सीट आवंटन परिणाम जारी किए गए हैं। इससे साफ है कि सीटों की उपलब्धता के अनुसार राउंड 3 तक भी उम्मीदवारों को मेडिकल कॉलेज हासिल करने का मौका मिल सकता है।
स्ट्रे वैकेंसी राउंड कब होता है?
स्ट्रे वैकेंसी राउंड काउंसलिंग प्रक्रिया का अंतिम महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें पिछले राउंड के बाद बची हुई सीटों को भरने की कोशिश की जाती है। इस चरण में उपलब्ध सीटों की संख्या काफी कम हो सकती है और कॉलेज तथा पाठ्यक्रम के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं।
हालांकि, उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सीट मिलना पूरी तरह उपलब्ध सीटों और लागू पात्रता नियमों पर निर्भर करता है। इसे कम अंक पर एमबीबीएस सीट मिलने की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। पिछले वर्षों में एमसीसी की ओर से स्ट्रे और स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए अलग-अलग सीट मैट्रिक्स और परिणाम जारी किए गए हैं।
नीट यूजी 2026 उम्मीदवारों को क्या करना चाहिए?
नीट यूजी 2026 का परिणाम आने के बाद उम्मीदवारों को अब काउंसलिंग की आधिकारिक तारीखों का इंतजार करना होगा। इस दौरान उन्हें अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए और यह तय कर लेना चाहिए कि वे किन मेडिकल कॉलेजों और पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि उम्मीदवार केवल सोशल मीडिया या अनधिकृत वेबसाइटों पर दी गई जानकारी के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी न करें। ऑल इंडिया कोटा के लिए एमसीसी और राज्य कोटे के लिए संबंधित राज्य की आधिकारिक काउंसलिंग अथॉरिटी की वेबसाइट पर जारी सूचना को ही अंतिम मानें।
कुल मिलाकर, नीट यूजी 2026 पास करना मेडिकल कॉलेज में दाखिले की दिशा में पहला बड़ा कदम है। इसके बाद असली चुनौती सही काउंसलिंग में समय पर रजिस्ट्रेशन, कॉलेजों की पसंद भरने और सीट आवंटन की प्रक्रिया को समझने की है। उम्मीदवारों को हर राउंड की अधिसूचना ध्यान से पढ़नी चाहिए, क्योंकि सीटों की संख्या, पात्रता, रिपोर्टिंग और अगले राउंड में शामिल होने के नियम काउंसलिंग के दौरान जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार तय होते हैं। एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर यूजी काउंसलिंग से जुड़ी अधिसूचनाएं, कार्यक्रम, सीट मैट्रिक्स और सीट आवंटन परिणाम जारी किए जाते हैं।



