Monday, July 27, 2026
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दिल्ली के 774 स्कूलों में मिली सुरक्षा की खामियां, प्राइवेट स्कूल सबसे आगे; अब दोबारा होगी जांच

By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 | 01:36 PM

दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। राजधानी में अब तक 1,677 स्कूलों की जांच की गई, जिनमें 774 स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियां मिली हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले निजी स्कूलों से जुड़े हैं। अधिकारियों ने कमियां मिलने वाले स्कूलों को सुधार के निर्देश दिए हैं और सुधार पूरा होने के बाद उनकी दोबारा जांच की जाएगी। यह अभियान दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों की जांच पूरी होने तक जारी रहने वाला है।

बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की यह जांच 13 से 24 जुलाई के बीच की गई। अधिकारियों के मुताबिक, स्कूलों का मूल्यांकन एक तय छात्र सुरक्षा जांच सूची के आधार पर किया गया। इस सूची को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

निजी स्कूलों में सबसे ज्यादा कमियां सामने आईं
अब तक जिन स्कूलों की जांच हुई है, उनमें 790 सरकारी स्कूल, 812 निजी स्कूल और 75 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल हैं। जांच के दौरान 270 सरकारी स्कूलों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां मिलीं। वहीं निजी स्कूलों में यह संख्या 463 रही, जबकि 41 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल भी तय सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। आंकड़ों से साफ है कि जांच किए गए स्कूलों की संख्या के अनुपात में भी निजी स्कूलों में कमियों का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।

कमियां मिलीं तो स्कूलों को मिला सुधार का निर्देश
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मकसद केवल स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करना नहीं है। जिन संस्थानों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाई गई हैं, उन्हें जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित स्कूलों को सुधार पूरा करने के बाद फिर से जांच का सामना करना होगा। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को वास्तव में दूर किया गया है या नहीं।

दोबारा जांच से तय होगी स्कूलों की जवाबदेही
अभियान में दोबारा जांच की व्यवस्था को खास महत्व दिया गया है। इसका मतलब यह है कि स्कूलों को सिर्फ कमियां दूर करने का निर्देश देकर मामला खत्म नहीं होगा। अधिकारियों की टीम दोबारा मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की स्थिति देखेगी। इससे स्कूलों पर सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू करने का दबाव बनेगा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

सरकारी से लेकर निजी स्कूल तक जांच के दायरे में
इस जांच अभियान में अलग-अलग तरह के स्कूलों को शामिल किया गया है। सरकारी स्कूलों के साथ नगर निकायों, नई दिल्ली नगर परिषद, दिल्ली छावनी क्षेत्र के स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान और निजी स्कूल भी जांच के दायरे में हैं। सरकार का लक्ष्य राजधानी के सभी 5,633 स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन करना है। जुलाई की शुरुआत में हुई समीक्षा बैठक के बाद इस दिशा में अभियान को तेज किया गया था।

6 जुलाई की बैठक के बाद तेज हुआ अभियान
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा के लिए 6 जुलाई को उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। बैठक में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू करने और उन्हें सिर्फ एक महीने के अभियान तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया था।

सभी 5,633 स्कूलों तक पहुंचेगा अभियान
दिल्ली में कुल 5,633 स्कूलों को इस व्यापक सुरक्षा अभियान के दायरे में लाने की योजना है। इनमें दिल्ली सरकार के स्कूलों के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान, नगर निकायों के स्कूल और निजी स्कूल शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी स्कूलों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

स्कूलों में बाल सुरक्षा समितियों पर भी जोर
समीक्षा बैठक में सभी स्कूलों में बाल सुरक्षा समितियों के गठन पर भी जोर दिया गया था। सरकार ने जुलाई के अंत तक राजधानी के सभी 5,633 स्कूलों में ऐसी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकारी स्कूलों में समितियां पहले से गठित होने की बात कही गई है, जबकि अब इस व्यवस्था को सरकारी सहायता प्राप्त, नगर निकाय और निजी स्कूलों तक भी विस्तार देने की योजना है।

सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी बनाने की कोशिश
सरकार की कोशिश है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम केवल किसी विशेष अभियान या जागरूकता महीने तक सीमित न रहें। स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी, कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण, बच्चों से जुड़े मामलों की शिकायत और कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था तथा सुरक्षा नियमों का पालन संस्थानों की नियमित जिम्मेदारी बने। अधिकारियों ने इसी वजह से निरीक्षण के साथ सुधार की पुष्टि करने की प्रक्रिया भी रखी है।

अभिभावकों की भूमिका भी अहम
इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों को भी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। निरीक्षण टीमों में अभिभावकों के प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और संबंधित स्कूलों के अधिकारी शामिल हैं। इससे स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को केवल सरकारी नजरिए से नहीं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी परखने की कोशिश की जा रही है।

अब अगली नजर बाकी स्कूलों पर
पहले चरण में 1,677 स्कूलों की जांच के दौरान 774 संस्थानों में कमियां मिलने के बाद अब निगाह बाकी स्कूलों पर है। खास बात यह है कि जांच के पहले चरण में ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी बड़ी संख्या में कमियां सामने आई हैं। अब अभियान आगे बढ़ने के साथ यह तस्वीर और साफ होगी कि राजधानी के बाकी स्कूल बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तय मानकों पर कितने खरे उतरते हैं।

कार्रवाई का असली असर दोबारा जांच से पता चलेगा
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 774 स्कूलों में कमियां मिली हैं, वे सुधार के निर्देशों को कितनी जल्दी लागू करते हैं। अधिकारियों ने दोबारा जांच का फैसला किया है, इसलिए अब केवल निरीक्षण की संख्या नहीं, बल्कि सुधार की वास्तविक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि कमियां समय पर दूर होती हैं और सभी 5,633 स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, तो यह अभियान बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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दिल्ली के 774 स्कूलों में मिली सुरक्षा की खामियां, प्राइवेट स्कूल सबसे आगे; अब दोबारा होगी जांच

By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 | 01:36 PM

दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। राजधानी में अब तक 1,677 स्कूलों की जांच की गई, जिनमें 774 स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियां मिली हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले निजी स्कूलों से जुड़े हैं। अधिकारियों ने कमियां मिलने वाले स्कूलों को सुधार के निर्देश दिए हैं और सुधार पूरा होने के बाद उनकी दोबारा जांच की जाएगी। यह अभियान दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों की जांच पूरी होने तक जारी रहने वाला है।

बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की यह जांच 13 से 24 जुलाई के बीच की गई। अधिकारियों के मुताबिक, स्कूलों का मूल्यांकन एक तय छात्र सुरक्षा जांच सूची के आधार पर किया गया। इस सूची को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

निजी स्कूलों में सबसे ज्यादा कमियां सामने आईं
अब तक जिन स्कूलों की जांच हुई है, उनमें 790 सरकारी स्कूल, 812 निजी स्कूल और 75 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल हैं। जांच के दौरान 270 सरकारी स्कूलों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां मिलीं। वहीं निजी स्कूलों में यह संख्या 463 रही, जबकि 41 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल भी तय सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। आंकड़ों से साफ है कि जांच किए गए स्कूलों की संख्या के अनुपात में भी निजी स्कूलों में कमियों का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।

कमियां मिलीं तो स्कूलों को मिला सुधार का निर्देश
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मकसद केवल स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करना नहीं है। जिन संस्थानों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाई गई हैं, उन्हें जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित स्कूलों को सुधार पूरा करने के बाद फिर से जांच का सामना करना होगा। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को वास्तव में दूर किया गया है या नहीं।

दोबारा जांच से तय होगी स्कूलों की जवाबदेही
अभियान में दोबारा जांच की व्यवस्था को खास महत्व दिया गया है। इसका मतलब यह है कि स्कूलों को सिर्फ कमियां दूर करने का निर्देश देकर मामला खत्म नहीं होगा। अधिकारियों की टीम दोबारा मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की स्थिति देखेगी। इससे स्कूलों पर सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू करने का दबाव बनेगा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

सरकारी से लेकर निजी स्कूल तक जांच के दायरे में
इस जांच अभियान में अलग-अलग तरह के स्कूलों को शामिल किया गया है। सरकारी स्कूलों के साथ नगर निकायों, नई दिल्ली नगर परिषद, दिल्ली छावनी क्षेत्र के स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान और निजी स्कूल भी जांच के दायरे में हैं। सरकार का लक्ष्य राजधानी के सभी 5,633 स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन करना है। जुलाई की शुरुआत में हुई समीक्षा बैठक के बाद इस दिशा में अभियान को तेज किया गया था।

6 जुलाई की बैठक के बाद तेज हुआ अभियान
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा के लिए 6 जुलाई को उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। बैठक में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू करने और उन्हें सिर्फ एक महीने के अभियान तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया था।

सभी 5,633 स्कूलों तक पहुंचेगा अभियान
दिल्ली में कुल 5,633 स्कूलों को इस व्यापक सुरक्षा अभियान के दायरे में लाने की योजना है। इनमें दिल्ली सरकार के स्कूलों के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान, नगर निकायों के स्कूल और निजी स्कूल शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी स्कूलों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

स्कूलों में बाल सुरक्षा समितियों पर भी जोर
समीक्षा बैठक में सभी स्कूलों में बाल सुरक्षा समितियों के गठन पर भी जोर दिया गया था। सरकार ने जुलाई के अंत तक राजधानी के सभी 5,633 स्कूलों में ऐसी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकारी स्कूलों में समितियां पहले से गठित होने की बात कही गई है, जबकि अब इस व्यवस्था को सरकारी सहायता प्राप्त, नगर निकाय और निजी स्कूलों तक भी विस्तार देने की योजना है।

सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी बनाने की कोशिश
सरकार की कोशिश है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम केवल किसी विशेष अभियान या जागरूकता महीने तक सीमित न रहें। स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी, कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण, बच्चों से जुड़े मामलों की शिकायत और कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था तथा सुरक्षा नियमों का पालन संस्थानों की नियमित जिम्मेदारी बने। अधिकारियों ने इसी वजह से निरीक्षण के साथ सुधार की पुष्टि करने की प्रक्रिया भी रखी है।

अभिभावकों की भूमिका भी अहम
इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों को भी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। निरीक्षण टीमों में अभिभावकों के प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और संबंधित स्कूलों के अधिकारी शामिल हैं। इससे स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को केवल सरकारी नजरिए से नहीं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी परखने की कोशिश की जा रही है।

अब अगली नजर बाकी स्कूलों पर
पहले चरण में 1,677 स्कूलों की जांच के दौरान 774 संस्थानों में कमियां मिलने के बाद अब निगाह बाकी स्कूलों पर है। खास बात यह है कि जांच के पहले चरण में ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी बड़ी संख्या में कमियां सामने आई हैं। अब अभियान आगे बढ़ने के साथ यह तस्वीर और साफ होगी कि राजधानी के बाकी स्कूल बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तय मानकों पर कितने खरे उतरते हैं।

कार्रवाई का असली असर दोबारा जांच से पता चलेगा
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 774 स्कूलों में कमियां मिली हैं, वे सुधार के निर्देशों को कितनी जल्दी लागू करते हैं। अधिकारियों ने दोबारा जांच का फैसला किया है, इसलिए अब केवल निरीक्षण की संख्या नहीं, बल्कि सुधार की वास्तविक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि कमियां समय पर दूर होती हैं और सभी 5,633 स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, तो यह अभियान बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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