By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 | 02:55 PM
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी अब केवल इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। कई आईआईटी अपने छात्रों के साथ कामकाजी लोगों और आम अभ्यर्थियों के लिए भी फ्रेंच, जर्मन, जापानी, मंदारिन और संस्कृत जैसी भाषाएं सीखने का मौका दे रहे हैं। खास बात यह है कि कुछ संस्थानों में इन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई ऑनलाइन भी की जा सकती है, जबकि कई जगह कक्षाएं संस्थान परिसर में चलती हैं।
इन पाठ्यक्रमों के जरिए छात्रों को सिर्फ किसी नई भाषा की जानकारी देने पर जोर नहीं है। इसका मकसद उन्हें दूसरी संस्कृतियों को समझने, विदेशों में पढ़ाई और रोजगार के अवसरों से जुड़ने तथा अलग-अलग देशों के लोगों के साथ बेहतर संवाद के लिए तैयार करना भी है। अलग-अलग आईआईटी में भाषा सीखने के लिए शुरुआती से लेकर उन्नत स्तर तक के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
आईआईटी कानपुर में फ्रेंच, जर्मन और जापानी
आईआईटी कानपुर में विदेशी भाषा कार्यक्रम के तहत फ्रेंच, जर्मन और जापानी भाषा सीखने का अवसर दिया जाता है। इन भाषाओं के लिए शुरुआती और आगे के स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। यहां सिर्फ आईआईटी के छात्र ही नहीं, बल्कि संस्थान के कर्मचारी और बाहरी अभ्यर्थी भी इन कार्यक्रमों से जुड़ सकते हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से पढ़ाई
आईआईटी कानपुर के भाषा कार्यक्रम की एक खास बात यह है कि इसमें पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प मिलते हैं। इससे उन लोगों के लिए भी भाषा सीखना आसान हो जाता है, जो किसी दूसरे शहर में रहते हैं या नियमित रूप से संस्थान पहुंचने की स्थिति में नहीं हैं। पाठ्यक्रम पूरा करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए जाने का प्रावधान भी है।
आईआईटी दिल्ली में भी विदेशी भाषाओं की पढ़ाई
आईआईटी दिल्ली में भारतीय और विदेशी भाषा सीखने से जुड़ा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यहां फ्रेंच, जर्मन और जापानी भाषा के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इस कार्यक्रम का दायरा केवल संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है।
छात्रों से लेकर बाहरी लोगों तक के लिए मौका
आईआईटी दिल्ली के भाषा सीखने वाले कार्यक्रम में छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और पूर्व छात्र शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और बाहरी अभ्यर्थियों को भी इसमें शामिल होने का अवसर दिया गया है। इस तरह आईआईटी परिसर से बाहर के लोग भी प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़कर भाषा सीखने का लाभ उठा सकते हैं।
आईआईटी बॉम्बे में सबसे ज्यादा विकल्प
भाषाओं के विकल्प की बात करें तो आईआईटी बॉम्बे भी इस दिशा में आगे है। यहां फ्रेंच, जर्मन और जापानी के साथ मंदारिन यानी चीनी भाषा और संस्कृत सीखने के पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं। इन कक्षाओं का आयोजन आमतौर पर शाम के समय किया जाता है, जिससे पढ़ाई या नौकरी करने वाले लोगों के लिए भी इनमें शामिल होना आसान हो सके।
हर स्तर पूरा करने पर प्रमाणपत्र
आईआईटी बॉम्बे के भाषा कार्यक्रमों में अलग-अलग स्तर या मॉड्यूल के आधार पर पढ़ाई कराई जाती है। प्रत्येक मॉड्यूल पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिया जाता है। इससे भाषा सीखने वाले लोगों को अपने कौशल को आगे की पढ़ाई या नौकरी के दौरान प्रमाणित करने में मदद मिल सकती है।
घर बैठे जर्मन सीखने का विकल्प
जो लोग किसी आईआईटी परिसर में जाकर भाषा सीखने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं। आईआईटी मद्रास की ओर से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी उन्नत शिक्षण कार्यक्रम और स्वयं मंच के जरिए जर्मन भाषा के अलग-अलग स्तरों के ऑनलाइन पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं।
नामांकन मुफ्त, प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा
आईआईटी मद्रास से जुड़े इन ऑनलाइन जर्मन भाषा पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, जो विद्यार्थी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रमाणपत्र हासिल करना चाहते हैं, उन्हें निगरानी वाली परीक्षा में शामिल होना पड़ता है। इसके लिए निर्धारित शुल्क देना होता है। इस तरह विद्यार्थी पहले मुफ्त में पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर सकते हैं और बाद में परीक्षा के जरिए प्रमाणपत्र हासिल कर सकते हैं।
आईआईटी खड़गपुर में जर्मन और संस्कृत
आईआईटी खड़गपुर में भी भाषा शिक्षा को तकनीकी पढ़ाई के साथ जोड़ा गया है। संस्थान में छात्रों को जर्मन भाषा पढ़ने का विकल्प मिलता है। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी उन्नत शिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बोलचाल की संस्कृत से जुड़ा ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है।
बिना पहले ज्ञान के भी संस्कृत सीखने का मौका
आईआईटी हैदराबाद ने संस्कृत भाषा की पढ़ाई के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के साथ मिलकर शुरुआती प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पाठ्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें दाखिला लेने के लिए संस्कृत भाषा का पहले से ज्ञान होना जरूरी नहीं है। यानी जो लोग बिल्कुल शुरुआत से भाषा सीखना चाहते हैं, वे भी इस तरह के कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।
भाषा सीखना अब करियर का हिस्सा भी
आज के समय में किसी विदेशी भाषा का ज्ञान केवल एक अतिरिक्त योग्यता नहीं रह गया है। वैश्विक कंपनियों में काम करने वाले युवाओं, विदेश में उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले पेशेवरों के लिए भाषा का ज्ञान काफी उपयोगी हो सकता है। इससे अलग-अलग देशों के लोगों के साथ संवाद करने और वहां की संस्कृति को समझने में भी मदद मिलती है।
इंजीनियरिंग के साथ बहुभाषी कौशल पर जोर
आईआईटी में इस तरह के भाषा पाठ्यक्रम शुरू होना उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप की ओर भी इशारा करता है। तकनीकी शिक्षा के साथ अब संचार कौशल, सांस्कृतिक समझ और दूसरे देशों के साथ संवाद की क्षमता को भी महत्व दिया जा रहा है। यही वजह है कि आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थानों में भाषा सीखने के विकल्प छात्रों को अपनी पढ़ाई से आगे एक व्यापक दुनिया से जोड़ रहे हैं।
छात्रों के लिए खुल रहे नए अवसर
फ्रेंच, जर्मन, जापानी या मंदारिन जैसी भाषाओं का ज्ञान छात्रों को विदेशों में पढ़ाई, शोध और नौकरी के अवसर तलाशने में मदद कर सकता है। वहीं संस्कृत जैसी भारतीय भाषा के पाठ्यक्रम भारतीय संस्कृति और विरासत को समझने का अवसर देते हैं। ऐसे में आईआईटी के भाषा कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा और वैश्विक संवाद के बीच एक नया रास्ता तैयार कर रहे हैं।



