By Malay Ojha | Published: 18 September 2026 | 08:51 PM
अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए पहले बैच के चार साल का कार्यकाल जनवरी 2027 में पूरा होने वाला है। इससे पहले ही अग्निवीरों की अगली नौकरी और नियमित सैन्य सेवा से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 19 हजार से ज्यादा अग्निवीरों वाले इस पहले बैच के लिए नई Exit Plan व्यवस्था तैयार की जा रही है।
अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकतम 25% अग्निवीरों को सेना के नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान है। भारतीय सेना पहले बैच के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया चला रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अलग-अलग आर्म, सर्विस और ट्रेड के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। इसका मकसद यह है कि चयनित अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद दोबारा लंबा इंतजार न करना पड़े।
बाकी अग्निवीरों के लिए रोजगार पर जोर
चार साल बाद नियमित सेना में जगह नहीं पाने वाले अग्निवीरों के लिए भी सरकारी नौकरियों के रास्ते तैयार किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस और दूसरे सरकारी विभागों में उपलब्ध अवसरों को इससे जोड़ा जा सकता है। गृह मंत्रालय ने पूर्व अग्निवीरों से जुड़े मामलों के लिए अलग विंग भी बनाई है, जो उनके आगे के रोजगार से जुड़े कामों का समन्वय करेगी।
CAPF में अब 50% तक आरक्षण
पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। गृह मंत्रालय की 21 जुलाई 2026 की जानकारी के मुताबिक कांस्टेबल GD और राइफलमैन पदों पर 50% रिक्तियां पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित की गई हैं। पहली बैच के लिए उम्र में अतिरिक्त छूट का भी प्रावधान है। साथ ही PST, PET और लिखित परीक्षा से छूट दी गई है।
रेलवे में भी रोजगार का प्रावधान
रेलवे ने भी पूर्व अग्निवीरों के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था की है। फरवरी 2026 में जारी सरकारी जानकारी के अनुसार Level-1 के पदों में 10% और Level-2 व उससे ऊपर के पदों में 5% क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए रखा गया है। रेलवे और सेना के बीच पूर्व सैनिकों व अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर सहयोग का ढांचा भी तैयार किया गया है।
4 साल बाद मिलता है सेवा निधि पैकेज
अग्निपथ योजना में अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल निर्धारित है। कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। वहीं अधिकतम 25% को संगठन की जरूरत और तय प्रक्रिया के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में शामिल किया जा सकता है। सरकार की मौजूदा तैयारी का फोकस यह है कि सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए आगे के रोजगार के विकल्प समय रहते स्पष्ट हों।



