Friday, November 6, 2026
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NEET UG पेपर लीक के बाद बड़ा कदम, अब कोचिंग सेंटरों पर भी होगी जांच; संसदीय समिति ने तय किया एजेंडा

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 | 12:53 PM

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अब संसद में भी गंभीरता दिखाई जा रही है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संसदीय समिति ने बड़ा कदम उठाया है। समिति अब NEET समेत राष्ट्रीय परीक्षाओं की शुचिता की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही कोचिंग सेंटरों के कामकाज, उन पर लागू नियमों और नियमों के पालन की भी जांच की जाएगी।

शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर विचार करेगी। समिति यह भी देखेगी कि कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए बनाए गए नियम जमीन पर कितने प्रभावी हैं और उनका पालन किस तरह हो रहा है।

NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बीच संसदीय समिति की यह पहल अहम मानी जा रही है। NEET UG 2026 का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस घटना ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

इससे पहले भी परीक्षा सुधारों को लेकर गठित संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में संस्थागत बदलावों की जरूरत बताई थी। समिति का मानना था कि तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द होना इस बात का संकेत है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रक्रियात्मक और संस्थागत स्तर पर बड़े सुधार करने होंगे।

एक साल के लिए गठित हुई संसदीय समिति
लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति का सितंबर 2026 में पुनर्गठन किया गया है। समिति को एक साल का कार्यकाल दिया गया है, जो सितंबर 2027 तक रहेगा।

समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों को अपनी समीक्षा के एजेंडे में शामिल किया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता, कोचिंग सेंटरों का नियमन और शिक्षा व्यवस्था में नई तकनीकों की भूमिका प्रमुख हैं।

कोचिंग सेंटरों के नियमों की भी होगी समीक्षा
संसदीय समिति कोचिंग सेंटरों के संचालन और उनकी कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा करेगी। इसके तहत यह जांचा जाएगा कि कोचिंग संस्थानों के लिए बनाए गए नियम कितने प्रभावी हैं, उनका सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं और संबंधित एजेंसियां इन नियमों को लागू कराने में कितनी सफल रही हैं।

यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोचिंग संस्थानों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में छात्रों के हितों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय करना भी समिति के सामने अहम मुद्दा होगा।

NEP 2020 से लेकर NCERT और CBSE तक की समीक्षा
संसदीय समिति केवल परीक्षा सुधारों तक सीमित नहीं रहेगी। वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का भी आकलन करेगी।

इसके अलावा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।

CBSE के मामले में समिति संबद्धता प्रक्रिया, नियमन, परीक्षा संचालन और विदेशों में बोर्ड की गतिविधियों का भी आकलन करेगी। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) की कार्यप्रणाली भी समीक्षा के दायरे में रहेगी।

छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नजर
समिति स्कूली शिक्षा में छात्रों के कल्याण और उनके लिए उपलब्ध सहायता प्रणालियों की भी जांच करेगी। इसमें छात्रों की सेहत, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसका उद्देश्य यह देखना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित माहौल और जरूरी सहायता मिल रही है या नहीं।

AI और नई तकनीक से रोजगार के अवसरों की भी समीक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए संसदीय समिति इनके प्रभाव का भी अध्ययन करेगी।

समिति यह देखेगी कि नई तकनीकें शिक्षा व्यवस्था को किस तरह बदल रही हैं और छात्रों की रोजगार क्षमता पर इनका क्या असर पड़ रहा है।

इसके अलावा उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और दिशा-निर्देशों को लागू करने की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।

NTA और परीक्षा सुधारों पर पहले से चल रही है कवायद
NEET UG पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया है। प्रधानमंत्री की ओर से गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स भी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उपायों पर काम कर रही है।

यह टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा आयोजित करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के सुझाव तैयार कर रही है। इसमें तकनीक के इस्तेमाल और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

अब संसदीय समिति की समीक्षा से परीक्षा व्यवस्था, कोचिंग सेंटरों के नियमन और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के सामने कई अहम मुद्दे आएंगे।

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NEET UG पेपर लीक के बाद बड़ा कदम, अब कोचिंग सेंटरों पर भी होगी जांच; संसदीय समिति ने तय किया एजेंडा

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 | 12:53 PM

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अब संसद में भी गंभीरता दिखाई जा रही है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संसदीय समिति ने बड़ा कदम उठाया है। समिति अब NEET समेत राष्ट्रीय परीक्षाओं की शुचिता की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही कोचिंग सेंटरों के कामकाज, उन पर लागू नियमों और नियमों के पालन की भी जांच की जाएगी।

शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर विचार करेगी। समिति यह भी देखेगी कि कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए बनाए गए नियम जमीन पर कितने प्रभावी हैं और उनका पालन किस तरह हो रहा है।

NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बीच संसदीय समिति की यह पहल अहम मानी जा रही है। NEET UG 2026 का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस घटना ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

इससे पहले भी परीक्षा सुधारों को लेकर गठित संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में संस्थागत बदलावों की जरूरत बताई थी। समिति का मानना था कि तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द होना इस बात का संकेत है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रक्रियात्मक और संस्थागत स्तर पर बड़े सुधार करने होंगे।

एक साल के लिए गठित हुई संसदीय समिति
लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति का सितंबर 2026 में पुनर्गठन किया गया है। समिति को एक साल का कार्यकाल दिया गया है, जो सितंबर 2027 तक रहेगा।

समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों को अपनी समीक्षा के एजेंडे में शामिल किया है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता, कोचिंग सेंटरों का नियमन और शिक्षा व्यवस्था में नई तकनीकों की भूमिका प्रमुख हैं।

कोचिंग सेंटरों के नियमों की भी होगी समीक्षा
संसदीय समिति कोचिंग सेंटरों के संचालन और उनकी कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा करेगी। इसके तहत यह जांचा जाएगा कि कोचिंग संस्थानों के लिए बनाए गए नियम कितने प्रभावी हैं, उनका सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं और संबंधित एजेंसियां इन नियमों को लागू कराने में कितनी सफल रही हैं।

यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोचिंग संस्थानों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में छात्रों के हितों की सुरक्षा और कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय करना भी समिति के सामने अहम मुद्दा होगा।

NEP 2020 से लेकर NCERT और CBSE तक की समीक्षा
संसदीय समिति केवल परीक्षा सुधारों तक सीमित नहीं रहेगी। वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का भी आकलन करेगी।

इसके अलावा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।

CBSE के मामले में समिति संबद्धता प्रक्रिया, नियमन, परीक्षा संचालन और विदेशों में बोर्ड की गतिविधियों का भी आकलन करेगी। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) की कार्यप्रणाली भी समीक्षा के दायरे में रहेगी।

छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नजर
समिति स्कूली शिक्षा में छात्रों के कल्याण और उनके लिए उपलब्ध सहायता प्रणालियों की भी जांच करेगी। इसमें छात्रों की सेहत, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, समावेशी शिक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसका उद्देश्य यह देखना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित माहौल और जरूरी सहायता मिल रही है या नहीं।

AI और नई तकनीक से रोजगार के अवसरों की भी समीक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए संसदीय समिति इनके प्रभाव का भी अध्ययन करेगी।

समिति यह देखेगी कि नई तकनीकें शिक्षा व्यवस्था को किस तरह बदल रही हैं और छात्रों की रोजगार क्षमता पर इनका क्या असर पड़ रहा है।

इसके अलावा उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और दिशा-निर्देशों को लागू करने की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।

NTA और परीक्षा सुधारों पर पहले से चल रही है कवायद
NEET UG पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया है। प्रधानमंत्री की ओर से गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स भी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उपायों पर काम कर रही है।

यह टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा आयोजित करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के सुझाव तैयार कर रही है। इसमें तकनीक के इस्तेमाल और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

अब संसदीय समिति की समीक्षा से परीक्षा व्यवस्था, कोचिंग सेंटरों के नियमन और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के सामने कई अहम मुद्दे आएंगे।

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