By Malay Ojha | Published: 04 November 2026 | 12:29 AM
भारत की यूनिवर्सिटीज की संख्या भले ही QS Asia Ranking 2027 में बढ़ गई हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर उनकी रैंकिंग में गिरावट चिंता बढ़ाने वाली है। एशिया की टॉप-200 यूनिवर्सिटीज में भारत के 21 संस्थानों ने जगह बनाई है। इनमें IIT दिल्ली देश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान रहा है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले IIT दिल्ली समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग नीचे आई है।
IIT दिल्ली एशिया में 66वें स्थान पर
क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS) की जारी एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली को भारत में पहला स्थान मिला है। संस्थान एशिया में 66वें नंबर पर है। इसके बाद IISc बेंगलुरु 79वें, IIT बॉम्बे 83वें और IIT मद्रास 85वें स्थान पर हैं।
इस बार भारत के कुल 325 विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को रैंकिंग में जगह मिली है। पिछले साल के मुकाबले 34 नए भारतीय संस्थान इस सूची में शामिल हुए हैं। इसके बावजूद भारतीय संस्थानों के प्रदर्शन का दूसरा पहलू यह है कि करीब 71 फीसदी संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है।
टॉप-200 में भारत की 21 यूनिवर्सिटी
QS Asia Ranking 2027 में कुल 1,722 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। इनमें 195 संस्थान पहली बार रैंकिंग का हिस्सा बने हैं। एशिया के शीर्ष 200 संस्थानों में भारत की 21 यूनिवर्सिटी और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। पिछले साल यह संख्या 20 थी। यानी इस बार भारत को एक अतिरिक्त जगह मिली है।
QS Asia Ranking 2027: टॉप-200 में शामिल सभी 21 भारतीय संस्थान
भारत के जिन 21 संस्थानों ने एशिया की टॉप-200 यूनिवर्सिटी में जगह बनाई है, उनकी रैंकिंग इस प्रकार है।
QS Asia Ranking 2027 में भारत के 21 विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने एशिया की टॉप-200 सूची में जगह बनाई है। इनमें IIT दिल्ली 66वीं रैंक के साथ सबसे आगे है। इसके बाद IISc बेंगलुरु को 79वां, IIT बॉम्बे को 83वां, IIT मद्रास को 85वां, IIT खड़गपुर को 90वां और IIT कानपुर को 97वां स्थान मिला है। वहीं पंजाब की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी 104वें, दिल्ली यूनिवर्सिटी 106वें, IIT गुवाहाटी 120वें, IIT रुड़की 124वें और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी 128वें स्थान पर है।
इसके अलावा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को 154वीं, VIT वेल्लोर को 156वीं, BITS पिलानी को 161वीं और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को 165वीं रैंक मिली है। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी 175वें, शूलिनी यूनिवर्सिटी 177वें, एमिटी यूनिवर्सिटी 181वें, जामिया मिलिया इस्लामिया और UPES दोनों 183वें स्थान पर हैं। वहीं मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन ने 195वीं रैंक हासिल कर टॉप-200 में अपनी जगह बनाई है।
IIT दिल्ली से लेकर IIT कानपुर तक सभी की रैंकिंग गिरी
QS Asia Ranking 2027 में भारत के छह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। IIT दिल्ली पिछले साल 59वें स्थान पर था, जो इस बार सात पायदान नीचे आकर 66वें नंबर पर पहुंच गया है।
IISc बेंगलुरु की रैंकिंग 64 से गिरकर 79 हो गई है। इसी तरह IIT बॉम्बे 71वें से 83वें, IIT मद्रास 70वें से 85वें और IIT खड़गपुर 77वें से 90वें स्थान पर पहुंच गया है। IIT कानपुर को भी बड़ा झटका लगा है। इसकी रैंकिंग 77वें से गिरकर 97वें स्थान पर आ गई है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी भी एशिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटी से बाहर हो गई है। पिछले साल यह 95वें स्थान पर थी, जबकि इस बार इसे 106वीं रैंक मिली है। IIT गुवाहाटी की रैंकिंग 115 से गिरकर 120 और IIT रुड़की की 114 से 124 हो गई है।
कुछ भारतीय यूनिवर्सिटी ने रैंकिंग में लगाई छलांग
एक तरफ जहां देश के कई बड़े संस्थानों की रैंकिंग गिरी है, वहीं कुछ यूनिवर्सिटी ने बेहतर प्रदर्शन भी किया है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पिछले साल 109वें स्थान पर थी, जो इस बार 104वें नंबर पर पहुंच गई है।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने 33 स्थानों की छलांग लगाई है। यह 187वें से 154वें स्थान पर पहुंच गई है। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग भी 200 से सुधरकर 175 हो गई है। जामिया मिलिया इस्लामिया 197वें से 183वें और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी 130वें से 128वें स्थान पर पहुंच गई है।
वाराणसी के IIT (BHU) ने भी अपनी स्थिति बेहतर की है। संस्थान पिछले साल 237वें स्थान पर था, जबकि इस बार 219वीं रैंक हासिल की है। यानी इसकी रैंकिंग में 18 स्थान का सुधार हुआ है। हालांकि, IIT (BHU) टॉप-200 में जगह नहीं बना सका।
महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में 202 स्थान की गिरावट
भारतीय संस्थानों में सबसे बड़ी गिरावट केरल की महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, कोट्टायम की रैंकिंग में दर्ज की गई है। यह संस्थान पिछले साल 495वें स्थान पर था, जबकि QS Asia Ranking 2027 में इसे 697वीं रैंक मिली है। इस तरह एक साल में इसकी रैंकिंग 202 स्थान नीचे चली गई।
इसके अलावा ओस्मानिया यूनिवर्सिटी की रैंकिंग 470 से गिरकर 650 और मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी की 458 से गिरकर 631 हो गई है। IIT कानपुर और UPES भी टॉप-200 में शामिल संस्थानों में सबसे ज्यादा 20-20 स्थान नीचे आए हैं।
71% संस्थानों की रैंकिंग गिरने का क्या है मतलब?
QS के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में जिन भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में बदलाव हुआ, उनमें 71 फीसदी नीचे गए, 18 फीसदी ने सुधार किया और 11 फीसदी की स्थिति लगभग स्थिर रही। हालांकि, 71 फीसदी का आंकड़ा यह नहीं बताता कि भारतीय यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता में 71 फीसदी गिरावट आई है। यह पिछले साल भी रैंकिंग में शामिल रहे 291 भारतीय संस्थानों में से नीचे जाने वाले संस्थानों का अनुपात है।
QS के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर के मुताबिक, रैंकिंग में नीचे आने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संस्थान का प्रदर्शन कमजोर हुआ है। रैंकिंग में नीचे जाने वाले करीब दो-तिहाई भारतीय संस्थानों के कुल स्कोर में वास्तव में सुधार हुआ है। ऐसे में एशिया के दूसरे संस्थानों के बेहतर प्रदर्शन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी असर पड़ा है।
रैंकिंग के संकेतकों में अकादमिक प्रतिष्ठा, नियोक्ताओं के बीच संस्थान की पहचान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों की भागीदारी जैसे पहलू भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय संस्थानों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। वहीं रिसर्च पेपर और फैकल्टी के अनुपात के मामले में भारत के संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।



