By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 | 06:46 PM
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गुरुवार को सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े तीन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिक्षाशास्त्र विभाग में दो दिवसीय दीपावली उत्सव का समापन नाट्य प्रस्तुतियों और संगीत कार्यक्रम के साथ हुआ। वहीं महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ ने सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। मनोविज्ञान विभाग में युवाओं को डिजिटल एडिक्शन से बचाने और नशामुक्त समाज का संदेश देने के लिए संगीत चिकित्सा पर प्रशिक्षण दिया गया।
नाटक और संगीत के जरिए विद्यार्थियों ने उठाए सामाजिक मुद्दे
शिक्षाशास्त्र विभाग के दीपावली उत्सव 2026 के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने अलग-अलग विषयों पर नाट्य प्रस्तुतियां देकर सामाजिक और शैक्षिक संदेश दिया। ‘रावण हमारे अंदर’, ‘शिक्षा का दीप’, ‘एक दिया देश के नाम’ और ‘दीपावली: तब और अब’ जैसे विषयों पर प्रस्तुत नाटकों ने कार्यक्रम को खास बनाया।
मुख्य अतिथि समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह ने कहा कि संगीत और नाटक पढ़ाई को अधिक रोचक, रचनात्मक और संवादात्मक बनाने के प्रभावशाली माध्यम हैं। इनके जरिए विद्यार्थी विषयों को बेहतर तरीके से समझने के साथ अपनी अभिव्यक्ति की क्षमता भी विकसित कर सकते हैं।
लोकगीत, गजल और देशभक्ति गीतों ने बांधा समां
कार्यक्रम में लोकगीत, गजल, भजन, राष्ट्रगीत और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियां भी हुईं। इस दौरान दीपावली उत्सव के पहले दिन आयोजित रंगोली प्रतियोगिता के विजेता समूहों को सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. रमाकान्त सिंह ने कहा कि भावी शिक्षकों के लिए नाटक, कला और रचनात्मक गतिविधियों की समझ जरूरी है। इससे कक्षा में पढ़ाई को प्रभावी बनाने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी मदद मिलती है।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अभिलाषा जायसवाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पवन कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर डॉ. राखी देब, डॉ. वीणा वादिनि अर्याल, डॉ. रमेश कुमार और डॉ. विनय सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण और बचाव के बारे में दी जानकारी
काशी विद्यापीठ के महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ और अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग की ओर से सर्वाइकल कैंसर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता मंगेश ने छात्राओं और महिलाओं को इस बीमारी से जुड़ी जरूरी जानकारी दी।
उन्होंने सर्वाइकल कैंसर के लक्षण, कारण, जोखिम कारक और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने और बिना संकोच स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर बात करने के लिए भी प्रेरित किया।
डिजिटल एडिक्शन से बचने के लिए संगीत चिकित्सा का तरीका समझाया
मनोविज्ञान विभाग में ‘नशामुक्त ज्योति-युवा’ अभियान के तहत डिजिटल जागरूकता एवं संगीत चिकित्सा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें विद्यार्थियों को इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के फायदे के साथ उनके बढ़ते इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. रश्मि सिंह ने डिजिटल एडिक्शन के दुष्प्रभाव और इससे बचने के व्यावहारिक तरीके साझा किए। कार्यक्रम संयोजक डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि संगीत चिकित्सा के जरिए डिजिटल निर्भरता को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने संगीत के माध्यम से युवाओं में सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और काम के प्रति एकाग्रता बढ़ाने की संभावनाओं को उदाहरणों के साथ समझाया।
इस अवसर पर डॉ. पूनम सिंह, डॉ. दीपमाला सिंह बघेल, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. मुकेश कुमार पंथ, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव, डॉ. कंचन शुक्ला, डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा, डॉ. रविकांत और जान्हवी तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



