Friday, November 6, 2026
spot_img

National

काशीराज डॉ. विभूतिनारायण सिंह की जन्मशताब्दी पर BHU में जुटीं काशी की हस्तियां, परिवार के सदस्यों ने दी श्रद्धांजलि

By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 | 06:55 PM

वाराणसी। काशी की पहचान और उसकी गौरवशाली परंपराओं को संजोने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व काशीराज एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति डॉ. विभूतिनारायण सिंह की जन्मशताब्दी पर BHU में विशेष समारोह आयोजित किया गया। के.एन. उडुप्पा सभागार में विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कई विशिष्ट लोग शामिल हुए। इस दौरान राज परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में काशीवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

काशी की पहचान में काशीराज के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. विभूतिनारायण सिंह के जीवन और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि काशी की विशिष्ट पहचान उसकी प्राचीन परंपराओं, ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना में बसती है। काशीराज ने इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जगद्गुरु चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी ने बताई काशी की विशेषता
जंगमबाड़ी मठ के पीठाधिपति जगद्गुरु चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी जी ने आशीर्वचन देते हुए काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि काशी की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह नगरी ज्ञान, साधना, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की सदियों पुरानी परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने डॉ. विभूतिनारायण सिंह के व्यक्तित्व और काशी के प्रति उनके योगदान का भी स्मरण किया।

राज परिवार के सदस्य भी समारोह में हुए शामिल
जन्मशताब्दी समारोह में राज परिवार की महाराज कुमारी कृष्णप्रिया जी, महाराज कुमारी विष्णुप्रिया जी, महाराज कुमारी हरिप्रिया जी, कुंवरी वरदा वसु प्रिया, श्री वरद नारायण सिंह, श्री वल्लभ नारायण सिंह, कुंवर ईशान, श्री अंबु पद्मनाभनारायण सिंह और श्रीमंत माधव नारायण सिंह मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्री मनोज गुप्ता ने किया। समारोह में काशीराज डॉ. विभूतिनारायण सिंह के परिवार के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में काशीवासी भी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान काशी की ऐतिहासिक विरासत और पूर्व काशीराज के योगदान को याद किया गया।

International

काशीराज डॉ. विभूतिनारायण सिंह की जन्मशताब्दी पर BHU में जुटीं काशी की हस्तियां, परिवार के सदस्यों ने दी श्रद्धांजलि

By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 | 06:55 PM

वाराणसी। काशी की पहचान और उसकी गौरवशाली परंपराओं को संजोने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व काशीराज एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति डॉ. विभूतिनारायण सिंह की जन्मशताब्दी पर BHU में विशेष समारोह आयोजित किया गया। के.एन. उडुप्पा सभागार में विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कई विशिष्ट लोग शामिल हुए। इस दौरान राज परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में काशीवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

काशी की पहचान में काशीराज के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. विभूतिनारायण सिंह के जीवन और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि काशी की विशिष्ट पहचान उसकी प्राचीन परंपराओं, ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना में बसती है। काशीराज ने इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जगद्गुरु चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी ने बताई काशी की विशेषता
जंगमबाड़ी मठ के पीठाधिपति जगद्गुरु चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी जी ने आशीर्वचन देते हुए काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि काशी की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह नगरी ज्ञान, साधना, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की सदियों पुरानी परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने डॉ. विभूतिनारायण सिंह के व्यक्तित्व और काशी के प्रति उनके योगदान का भी स्मरण किया।

राज परिवार के सदस्य भी समारोह में हुए शामिल
जन्मशताब्दी समारोह में राज परिवार की महाराज कुमारी कृष्णप्रिया जी, महाराज कुमारी विष्णुप्रिया जी, महाराज कुमारी हरिप्रिया जी, कुंवरी वरदा वसु प्रिया, श्री वरद नारायण सिंह, श्री वल्लभ नारायण सिंह, कुंवर ईशान, श्री अंबु पद्मनाभनारायण सिंह और श्रीमंत माधव नारायण सिंह मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्री मनोज गुप्ता ने किया। समारोह में काशीराज डॉ. विभूतिनारायण सिंह के परिवार के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में काशीवासी भी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान काशी की ऐतिहासिक विरासत और पूर्व काशीराज के योगदान को याद किया गया।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES