By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 | 07:40 PM
केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव करते हुए उन 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने का फैसला किया है, जिन्हें चार साल बाद सेना से बाहर होना था। केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब ये अग्निवीर कुल छह साल तक सशस्त्र बलों में सेवा दे सकेंगे। सबसे अहम बात यह है कि छह साल की सेवा पूरी होने के बाद उन्हें नियमित सैनिक बनने का भी मौका मिलेगा।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 4 नवंबर को कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले चार साल की सेवा के बाद 25 फीसदी अग्निवीरों को मेरिट के आधार पर नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान बरकरार रहेगा। वहीं, बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया जाएगा।
छह साल बाद भी सेना में रहने का रास्ता खुलेगा
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी करने के बाद सभी इच्छुक अग्निवीरों को नियमित सैनिक के तौर पर शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उन्हें सेना की निर्धारित चयन प्रक्रिया और जरूरी मानकों को पूरा करना होगा। यानी छह साल की नौकरी के बाद स्थायी भर्ती का रास्ता जरूर खुलेगा, लेकिन यह अपने आप मिलने वाली नौकरी नहीं होगी।
खराब प्रदर्शन और अनुशासनहीनता पड़ सकती है भारी
नियमित सैनिक के तौर पर चयन के लिए अग्निवीरों के प्रदर्शन और सेवा रिकॉर्ड को अहमियत दी जाएगी। शारीरिक फिटनेस, काम के प्रति क्षमता, अनुशासन और सेना की जरूरतों के मुताबिक प्रदर्शन जैसे पहलुओं का मूल्यांकन होगा। जिन जवानों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उन्हें नियमित सेवा में जगह मिलना मुश्किल होगा। इस तरह छह साल की अतिरिक्त सेवा के बाद भी अंतिम फैसला चयन प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अब पहले बैच के करीब 18 हजार जवानों को राहत
अग्निपथ योजना जून 2022 में शुरू की गई थी। इसके तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को अग्निवीर नाम दिया गया। योजना के शुरुआती प्रावधानों के मुताबिक, चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल किया जाना था। बाकी 75 फीसदी जवानों को सेवा से बाहर होना पड़ता।
योजना के चार साल पूरे होने के साथ ही पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि समाप्त होने वाली थी। करीब 18,300 जवानों को इस साल के अंत तक चरणबद्ध तरीके से सेना छोड़नी पड़ सकती थी। लेकिन इससे पहले कैबिनेट के फैसले ने इन जवानों के सामने दो साल तक सेवा जारी रखने और आगे नियमित भर्ती में शामिल होने का नया विकल्प खोल दिया है।
अतिरिक्त सेवा के दौरान बढ़ेगा वेतन और सेवा निधि
सरकार के मुताबिक, दो साल की दूसरी सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को पहले की तुलना में अधिक पारिश्रमिक मिलेगा। इसके साथ ही उनकी सेवा निधि में भी बढ़ोतरी की जाएगी। नए प्रावधान में वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, संशोधित सेवा निधि की अंतिम राशि को लेकर अलग से आधिकारिक विवरण देखना जरूरी होगा।
CAPF और असम राइफल्स में भी मिलेगा 50 फीसदी आरक्षण
सेना में नियमित भर्ती का मौका नहीं मिलने पर अग्निवीरों के लिए दूसरे सरकारी सुरक्षा बलों में भी रोजगार के अवसर मौजूद रहेंगे। केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में कांस्टेबल जीडी और राइफलमैन के पदों पर 50 फीसदी रिक्तियां आरक्षित करने का प्रावधान किया है।
इसके अलावा उन्हें निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की छूट मिलेगी। पहले बैच के उम्मीदवारों को पांच साल की अतिरिक्त आयु छूट देने का भी प्रावधान है। सरकार ने इन भर्तियों में शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा से छूट देने का फैसला भी किया है।
क्या बदल गई पूरी अग्निपथ योजना?
सरकार ने अग्निपथ योजना को समाप्त नहीं किया है, बल्कि चार साल की सेवा के बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए दो साल का अतिरिक्त सेवा चरण जोड़ा है। पहले 25 फीसदी जवानों को मेरिट के आधार पर नियमित करने की व्यवस्था जारी रहेगी। बाकी जवानों को भी अब छह साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। इस फैसले से अग्निवीरों के सामने सेना में लंबे समय तक सेवा करने और स्थायी नौकरी पाने की संभावना पहले से ज्यादा बढ़ गई है।



