Friday, November 6, 2026
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UP NEET Admission: 214 नंबर पर MBBS में दाखिला, सरकारी कॉलेज में 563 स्कोर; जानें फीस का बड़ा अंतर

By Malay Ojha | Published: 02 November 2026 | 12:45 PM

NEET UG 2027 की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पिछले साल के एडमिशन ट्रेंड को समझना जरूरी है। यूपी में 2026 की काउंसलिंग में सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 563 स्कोर तक सीट मिली। वहीं एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 214 अंक पाने वाले उम्मीदवार ने भी MBBS में दाखिला लिया।

सरकारी और प्राइवेट कॉलेज में बड़ा फर्क
कम स्कोर पर सीट मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर साल वही कॉलेज और वही कटऑफ रहेगी। सीटों की संख्या, उम्मीदवारों की पसंद, कैटेगरी और काउंसलिंग राउंड के आधार पर तस्वीर बदलती रहती है। लेकिन 2026 का ट्रेंड NEET UG 2027 के उम्मीदवारों को कॉलेज और फीस का अंदाजा जरूर दे सकता है।

NEET स्कोर के अलावा ये फैक्टर भी तय करते हैं एडमिशन
MBBS और BDS में दाखिले के लिए उसी साल का NEET UG स्कोर जरूरी होता है। परीक्षा का आयोजन NTA कराता है। इसके बाद मेडिकल सीटों पर एडमिशन मुख्य रूप से ऑल इंडिया और स्टेट काउंसलिंग के जरिए होता है।

15 फीसदी सीटें ऑल इंडिया कोटे से
राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों की 15 फीसदी सीटें ऑल इंडिया कोटा यानी AIQ के तहत भरी जाती हैं। इसके अलावा कुछ केंद्रीय संस्थानों की सीटों के लिए भी केंद्रीय स्तर पर काउंसलिंग होती है।

85 फीसदी सीटों पर राज्य का कोटा
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बाकी 85 फीसदी सीटों पर संबंधित राज्य की काउंसलिंग के जरिए एडमिशन होता है। इसके साथ ही EWS, OBC, SC, ST और PwD समेत अलग-अलग आरक्षण नियम भी मेरिट और सीट आवंटन में अहम भूमिका निभाते हैं।

यूपी के सरकारी कॉलेज में सबसे कम स्कोर पर MBBS
NEET एक्सपर्ट नबीन कार्की के अनुसार, 2026 के एडमिशन ट्रेंड में ASMC सोनभद्र उन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शामिल रहा, जहां सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को सबसे कम स्कोर पर MBBS सीट मिली। स्टेट कोटा के तहत 563 अंक पाने वाले उम्मीदवार को यहां दाखिला मिला।

BDS में KGMU का आंकड़ा भी चौंकाने वाला
BDS एडमिशन की बात करें तो KGMU डेंटल कॉलेज, लखनऊ में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 557 स्कोर पर स्टेट कोटा से सीट मिली। यह 2026 के ट्रेंड में कम स्कोर पर सरकारी BDS सीट मिलने के प्रमुख मामलों में शामिल रहा।

AIQ से सिद्धार्थनगर में 558 स्कोर पर सीट
ऑल इंडिया कोटा के तहत ASMC सिद्धार्थनगर में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 558 अंक पर MBBS सीट मिली। यह यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में AIQ के जरिए कम स्कोर पर हुए एडमिशन के उल्लेखनीय आंकड़ों में शामिल है।

प्राइवेट MBBS कॉलेज में 214 स्कोर पर दाखिला
सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के एडमिशन ट्रेंड में सबसे बड़ा अंतर यहीं नजर आता है। 2026 में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 214 NEET स्कोर पर MBBS में एडमिशन मिला।

BDS में 177 नंबर तक पहुंचा एडमिशन
प्राइवेट डेंटल कॉलेजों में कम स्कोर का आंकड़ा और नीचे गया। डेंटल कॉलेज, आजमगढ़ में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 177 स्कोर पर BDS में दाखिला मिलने की जानकारी सामने आई। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटों का एडमिशन सरकारी कॉलेजों की तरह ऑल इंडिया कोटा व्यवस्था के तहत नहीं होता।

कम स्कोर की सीट और फीस में जमीन-आसमान का अंतर
कम स्कोर पर सीट मिलने के साथ फीस का गणित भी समझना जरूरी है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में जहां MBBS की पढ़ाई अपेक्षाकृत बेहद कम खर्च में पूरी हो सकती है, वहीं प्राइवेट कॉलेज में यही कोर्स एक करोड़ रुपये से ज्यादा का पड़ सकता है।

ASMC सोनभद्र में कितनी है फीस?
ASMC सोनभद्र में MBBS की वार्षिक ट्यूशन फीस करीब 36 हजार रुपये बताई गई है। इस हिसाब से साढ़े पांच साल के MBBS कोर्स की ट्यूशन फीस दो लाख रुपये से कम रह सकती है।

मुरादाबाद के प्राइवेट कॉलेज में कितना खर्च?
तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में MBBS की सालाना ट्यूशन फीस करीब 17 लाख रुपये तक है। यानी पूरे कोर्स की फीस एक करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकती है। इससे साफ है कि सिर्फ कम स्कोर पर सीट मिलना ही नहीं, कॉलेज की फीस भी एडमिशन से पहले बड़ा फैक्टर है।

यूपी में सबसे कम फीस वाले मेडिकल कॉलेज
कम फीस वाले संस्थानों की बात करें तो AIIMS गोरखपुर और AIIMS रायबरेली सबसे सस्ते विकल्पों में गिने जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां MBBS की पढ़ाई बेहद कम ट्यूशन फीस में पूरी हो सकती है।

राज्य सरकार के संस्थानों में ASMC कानपुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ कम फीस वाले मेडिकल कॉलेजों में शामिल हैं। यहां MBBS की वार्षिक फीस करीब 18 हजार रुपये बताई गई है।

प्राइवेट कॉलेज में सबसे कम फीस का विकल्प
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, बाराबंकी कम फीस वाले विकल्पों में शामिल है। यहां MBBS की वार्षिक फीस करीब 13.60 लाख रुपये बताई गई है।

यूपी में 88 मेडिकल कॉलेज और 14 हजार MBBS सीटें
NMC के 2026 सीट मैट्रिक्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 88 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें 49 सरकारी और 39 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

इन कॉलेजों में MBBS की करीब 14 हजार सीटें हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 5,700 सीटें और प्राइवेट कॉलेजों में करीब 8,300 सीटें उपलब्ध हैं।

NEET 2027 उम्मीदवारों के लिए क्या है सबसे जरूरी?
NEET UG की तैयारी कर रहे छात्रों को सिर्फ एक तय स्कोर को लक्ष्य मानकर नहीं चलना चाहिए। कॉलेज की पसंद, कैटेगरी, स्टेट या ऑल इंडिया कोटा, काउंसलिंग राउंड और सीटों की उपलब्धता जैसे कई फैक्टर एडमिशन तय करते हैं। 2026 का ट्रेंड सिर्फ एक संकेत है, 2027 में कटऑफ और कॉलेजों की स्थिति बदल सकती है।

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UP NEET Admission: 214 नंबर पर MBBS में दाखिला, सरकारी कॉलेज में 563 स्कोर; जानें फीस का बड़ा अंतर

By Malay Ojha | Published: 02 November 2026 | 12:45 PM

NEET UG 2027 की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पिछले साल के एडमिशन ट्रेंड को समझना जरूरी है। यूपी में 2026 की काउंसलिंग में सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 563 स्कोर तक सीट मिली। वहीं एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 214 अंक पाने वाले उम्मीदवार ने भी MBBS में दाखिला लिया।

सरकारी और प्राइवेट कॉलेज में बड़ा फर्क
कम स्कोर पर सीट मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर साल वही कॉलेज और वही कटऑफ रहेगी। सीटों की संख्या, उम्मीदवारों की पसंद, कैटेगरी और काउंसलिंग राउंड के आधार पर तस्वीर बदलती रहती है। लेकिन 2026 का ट्रेंड NEET UG 2027 के उम्मीदवारों को कॉलेज और फीस का अंदाजा जरूर दे सकता है।

NEET स्कोर के अलावा ये फैक्टर भी तय करते हैं एडमिशन
MBBS और BDS में दाखिले के लिए उसी साल का NEET UG स्कोर जरूरी होता है। परीक्षा का आयोजन NTA कराता है। इसके बाद मेडिकल सीटों पर एडमिशन मुख्य रूप से ऑल इंडिया और स्टेट काउंसलिंग के जरिए होता है।

15 फीसदी सीटें ऑल इंडिया कोटे से
राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों की 15 फीसदी सीटें ऑल इंडिया कोटा यानी AIQ के तहत भरी जाती हैं। इसके अलावा कुछ केंद्रीय संस्थानों की सीटों के लिए भी केंद्रीय स्तर पर काउंसलिंग होती है।

85 फीसदी सीटों पर राज्य का कोटा
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बाकी 85 फीसदी सीटों पर संबंधित राज्य की काउंसलिंग के जरिए एडमिशन होता है। इसके साथ ही EWS, OBC, SC, ST और PwD समेत अलग-अलग आरक्षण नियम भी मेरिट और सीट आवंटन में अहम भूमिका निभाते हैं।

यूपी के सरकारी कॉलेज में सबसे कम स्कोर पर MBBS
NEET एक्सपर्ट नबीन कार्की के अनुसार, 2026 के एडमिशन ट्रेंड में ASMC सोनभद्र उन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शामिल रहा, जहां सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को सबसे कम स्कोर पर MBBS सीट मिली। स्टेट कोटा के तहत 563 अंक पाने वाले उम्मीदवार को यहां दाखिला मिला।

BDS में KGMU का आंकड़ा भी चौंकाने वाला
BDS एडमिशन की बात करें तो KGMU डेंटल कॉलेज, लखनऊ में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 557 स्कोर पर स्टेट कोटा से सीट मिली। यह 2026 के ट्रेंड में कम स्कोर पर सरकारी BDS सीट मिलने के प्रमुख मामलों में शामिल रहा।

AIQ से सिद्धार्थनगर में 558 स्कोर पर सीट
ऑल इंडिया कोटा के तहत ASMC सिद्धार्थनगर में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 558 अंक पर MBBS सीट मिली। यह यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में AIQ के जरिए कम स्कोर पर हुए एडमिशन के उल्लेखनीय आंकड़ों में शामिल है।

प्राइवेट MBBS कॉलेज में 214 स्कोर पर दाखिला
सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के एडमिशन ट्रेंड में सबसे बड़ा अंतर यहीं नजर आता है। 2026 में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 214 NEET स्कोर पर MBBS में एडमिशन मिला।

BDS में 177 नंबर तक पहुंचा एडमिशन
प्राइवेट डेंटल कॉलेजों में कम स्कोर का आंकड़ा और नीचे गया। डेंटल कॉलेज, आजमगढ़ में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 177 स्कोर पर BDS में दाखिला मिलने की जानकारी सामने आई। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटों का एडमिशन सरकारी कॉलेजों की तरह ऑल इंडिया कोटा व्यवस्था के तहत नहीं होता।

कम स्कोर की सीट और फीस में जमीन-आसमान का अंतर
कम स्कोर पर सीट मिलने के साथ फीस का गणित भी समझना जरूरी है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में जहां MBBS की पढ़ाई अपेक्षाकृत बेहद कम खर्च में पूरी हो सकती है, वहीं प्राइवेट कॉलेज में यही कोर्स एक करोड़ रुपये से ज्यादा का पड़ सकता है।

ASMC सोनभद्र में कितनी है फीस?
ASMC सोनभद्र में MBBS की वार्षिक ट्यूशन फीस करीब 36 हजार रुपये बताई गई है। इस हिसाब से साढ़े पांच साल के MBBS कोर्स की ट्यूशन फीस दो लाख रुपये से कम रह सकती है।

मुरादाबाद के प्राइवेट कॉलेज में कितना खर्च?
तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में MBBS की सालाना ट्यूशन फीस करीब 17 लाख रुपये तक है। यानी पूरे कोर्स की फीस एक करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकती है। इससे साफ है कि सिर्फ कम स्कोर पर सीट मिलना ही नहीं, कॉलेज की फीस भी एडमिशन से पहले बड़ा फैक्टर है।

यूपी में सबसे कम फीस वाले मेडिकल कॉलेज
कम फीस वाले संस्थानों की बात करें तो AIIMS गोरखपुर और AIIMS रायबरेली सबसे सस्ते विकल्पों में गिने जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां MBBS की पढ़ाई बेहद कम ट्यूशन फीस में पूरी हो सकती है।

राज्य सरकार के संस्थानों में ASMC कानपुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ कम फीस वाले मेडिकल कॉलेजों में शामिल हैं। यहां MBBS की वार्षिक फीस करीब 18 हजार रुपये बताई गई है।

प्राइवेट कॉलेज में सबसे कम फीस का विकल्प
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, बाराबंकी कम फीस वाले विकल्पों में शामिल है। यहां MBBS की वार्षिक फीस करीब 13.60 लाख रुपये बताई गई है।

यूपी में 88 मेडिकल कॉलेज और 14 हजार MBBS सीटें
NMC के 2026 सीट मैट्रिक्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 88 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें 49 सरकारी और 39 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

इन कॉलेजों में MBBS की करीब 14 हजार सीटें हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 5,700 सीटें और प्राइवेट कॉलेजों में करीब 8,300 सीटें उपलब्ध हैं।

NEET 2027 उम्मीदवारों के लिए क्या है सबसे जरूरी?
NEET UG की तैयारी कर रहे छात्रों को सिर्फ एक तय स्कोर को लक्ष्य मानकर नहीं चलना चाहिए। कॉलेज की पसंद, कैटेगरी, स्टेट या ऑल इंडिया कोटा, काउंसलिंग राउंड और सीटों की उपलब्धता जैसे कई फैक्टर एडमिशन तय करते हैं। 2026 का ट्रेंड सिर्फ एक संकेत है, 2027 में कटऑफ और कॉलेजों की स्थिति बदल सकती है।

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