By Malay Ojha | Published: 15 October 2026 | 10:42 AM
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को अब विदेश की आधुनिक शिक्षण व्यवस्था को करीब से समझने का मौका मिल सकता है। राज्य सरकार शिक्षकों के एक चयनित समूह को विदेश भेजने की तैयारी कर रही है। वहां शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई के तरीकों, क्लासरूम मैनेजमेंट और बच्चों के मूल्यांकन की व्यवस्था का अध्ययन करेंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग चयन के मानक तैयार करेगा।
छठ के बाद शुरू होगी चयन प्रक्रिया की तैयारी
शिक्षा विभाग छठ महापर्व के बाद शिक्षकों के चयन के लिए तय किए जाने वाले मानकों के प्रारूप पर काम शुरू करेगा। इसी दौरान उन देशों को भी चिह्नित किया जाएगा, जहां की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए शिक्षकों को भेजा जा सकता है। हालांकि, अभी देशों के नाम और विदेश जाने वाले शिक्षकों की संख्या स्पष्ट नहीं की गई है।
आवेदन के आधार पर चुने जाएंगे शिक्षक
इस योजना में शिक्षकों का चयन उनकी योग्यता और स्कूल में उनके काम के आधार पर किए जाने की तैयारी है। इसके लिए अंकों का एक पैमाना निर्धारित किया जाएगा। इच्छुक शिक्षकों को आवेदन करना होगा। उनकी शैक्षणिक योग्यता, स्कूल में सक्रियता और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर अंक दिए जाएंगे।
जिला शिक्षा अधिकारियों के जरिए लिए जाएंगे आवेदन
चयन प्रक्रिया के लिए सभी जिलों से जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से योग्य शिक्षकों के आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। इसके बाद तय मानकों के अनुसार आवेदनों का मूल्यांकन किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, ताकि निर्धारित मानकों के आधार पर शिक्षकों को विदेश जाने का अवसर मिल सके।
विदेश में पढ़ाई के तरीकों का करेंगे अध्ययन
विदेश जाने वाले शिक्षक वहां के स्कूलों में पढ़ाने के तरीकों और शैक्षणिक गतिविधियों को समझेंगे। वे यह अध्ययन करेंगे कि कक्षाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है और बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए किन तरीकों को अपनाया जाता है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम तैयार करने, गृहकार्य के मूल्यांकन और पढ़ाई के अलावा होने वाली गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
अभिभावकों से संवाद और बच्चों के मूल्यांकन पर भी नजर
शिक्षक यह भी देखेंगे कि विदेशों के स्कूलों में शिक्षकों और अभिभावकों के बीच किस तरह संवाद होता है। बच्चों की पढ़ाई का आकलन कैसे किया जाता है और उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कौन-सी गतिविधियां अपनाई जाती हैं, इसका भी अध्ययन किया जाएगा।
लौटने के बाद शिक्षा विभाग को सौंपेंगे रिपोर्ट
विदेश से लौटने के बाद शिक्षकों को अपने अध्ययन के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा विभाग के मुख्यालय में जमा करनी होगी। संबंधित अधिकारी रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे। इसके बाद विदेशों में अपनाए जा रहे ऐसे शिक्षण तरीकों की पहचान की जा सकेगी, जिन्हें बिहार के सरकारी स्कूलों में लागू करना उपयोगी हो सकता है।
इस योजना का उद्देश्य दूसरे देशों की शिक्षा व्यवस्था से सीख लेकर बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना है। हालांकि, योजना को लागू करने के लिए चयन के अंतिम नियम, देशों के नाम और शिक्षकों की संख्या से जुड़ी जानकारी सामने आना बाकी है।



