By Malay Ojha | Published: 15 October 2026 | 11:11 PM
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेशनल कोर्स की फीस को लेकर अहम निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कोर्स में एडमिशन शुरू होने से पहले उसकी फीस तय होनी चाहिए और सामान्य परिस्थितियों में कोर्स की पूरी अवधि के दौरान इसमें बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इससे इंजीनियरिंग समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों और उनके परिवारों को पहले से अपने खर्च का हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।
एडमिशन से पहले तय करनी होगी पूरी फीस
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि चार या पांच साल के प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्र को शुरुआत में ही पता होना चाहिए कि पढ़ाई पूरी करने में कितना खर्च आएगा। कोर्स शुरू होने के बाद फीस बढ़ने से छात्रों और उनके परिवारों पर अचानक आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसलिए फीस निर्धारण की प्रक्रिया में पहले से योजना बनाना जरूरी है।
किन परिस्थितियों में बढ़ सकती है फीस?
सुप्रीम कोर्ट ने फीस में बदलाव की पूरी तरह मनाही नहीं की है। अदालत के मुताबिक, किसी असाधारण आर्थिक स्थिति या कानून में बदलाव के कारण अप्रत्याशित खर्च सामने आने पर फीस में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि, ऐसी छूट केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। इसे फीस का सही आकलन करने और समय रहते योजना बनाने का विकल्प नहीं माना जा सकता।
फीस तय करने वाली समितियों की भी तय की जिम्मेदारी
अदालत ने फीस निर्धारण समितियों की भूमिका पर भी जोर दिया। बेंच ने कहा कि समितियों को कोर्स की पूरी अवधि के दौरान होने वाले संभावित खर्चों और उनमें होने वाली बढ़ोतरी का पहले से आकलन करना चाहिए। उन्हें एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से काफी पहले अपनी सिफारिशें दे देनी चाहिए, ताकि संबंधित अधिकारी समय पर फीस तय कर सकें।
पूरे कोर्स के लिए फीस तय करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फीस तय करने वाली समितियों को स्थायी व्यवस्था के रूप में काम करना चाहिए। उन्हें खर्चों का अनुमान लगाने, समय-समय पर उनका मूल्यांकन करने और जरूरत के मुताबिक सही समय पर निर्णय लेने में सक्षम होना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दाखिले शुरू होने से पहले फीस तय हो जाए और जहां तक संभव हो, यह पूरे कोर्स की अवधि के लिए लागू रहे।
डॉ. बीसी रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज मामले में आया निर्देश
यह मामला डॉ. बीसी रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य निजी कॉलेजों की अपीलों से जुड़ा था। कॉलेजों ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें पहले से दाखिला ले चुके छात्रों पर बढ़ी हुई फीस लागू करने से रोक दिया गया था। इसी विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फीस निर्धारण में पारदर्शिता, समयबद्ध योजना और छात्रों को आर्थिक निश्चितता देने की जरूरत स्पष्ट की।



