Friday, October 23, 2026
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अग्निवीरों के लिए खुशखबरी! उत्तराखंड सरकार ने 2 अग्निवीरों की सीधी नियुक्ति को दी मंजूरी

By Malay Ojha | Published: 17 October 2026 | 10:11 AM

उत्तराखंड सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) में रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने से पहले आया यह फैसला दूसरे सरकारी विभागों में उनके रोजगार के अवसरों को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में किया जाएगा समायोजित
उत्तराखंड सरकार की ओर से शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी गई। सरकार के मुताबिक, केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव ने पूर्व अग्निवीरों के समायोजन को लेकर पत्र भेजा था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। दोनों अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।

अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने की तैयारी
अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल निर्धारित है। इस व्यवस्था में 75 फीसदी अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें सेवामुक्त किया जाता है, जबकि 25 फीसदी को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। ऐसे में पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के साथ उनके लिए दूसरी नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना सरकारों के सामने अहम मुद्दा बन गया है।

तीनों सेनाएं रिटेंशन बढ़ाने पर कर रही विचार
अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने का अनुपात बढ़ाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीनों सेनाएं इस पर विचार कर रही हैं। पहले बैच की सेवा अवधि पूरी होने के बाद इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है। हालांकि, रिटेंशन बढ़ाने को लेकर किसी अंतिम फैसले की पुष्टि जरूरी है।

CAPF और असम राइफल्स में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण
पूर्व अग्निवीरों को दोबारा रोजगार देने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में भी भर्ती संबंधी प्रावधान किए गए हैं। इनके तहत कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। भर्ती नियमों के अनुसार, इन पदों के लिए पूर्व अग्निवीरों की अलग श्रेणी भी बनाई गई है।

फिजिकल टेस्ट और लिखित परीक्षा में छूट का प्रावधान
पूर्व अग्निवीरों को संबंधित भर्ती नियमों के तहत शारीरिक मानक परीक्षा (PST), शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दिए जाने का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि, इन छूटों की वास्तविक पात्रता और लागू शर्तों की पुष्टि संबंधित बल की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना से की जानी चाहिए।

कई राज्य भी दे चुके हैं नौकरी में आरक्षण और आयु सीमा में छूट
केंद्र के साथ कई राज्य सरकारें भी पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में अवसर देने के लिए कदम उठा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पदों पर आरक्षण या आयु सीमा में छूट से जुड़े प्रावधानों की घोषणाएं की गई हैं। इनका लाभ संबंधित राज्य की नीति और भर्ती नियमों के अनुसार मिलता है।

पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण, आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का उद्देश्य चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उनके रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उत्तराखंड में दो अग्निवीरों के समायोजन को मिली मंजूरी इसी दिशा में एक अहम कदम है।

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अग्निवीरों के लिए खुशखबरी! उत्तराखंड सरकार ने 2 अग्निवीरों की सीधी नियुक्ति को दी मंजूरी

By Malay Ojha | Published: 17 October 2026 | 10:11 AM

उत्तराखंड सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) में रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने से पहले आया यह फैसला दूसरे सरकारी विभागों में उनके रोजगार के अवसरों को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में किया जाएगा समायोजित
उत्तराखंड सरकार की ओर से शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी गई। सरकार के मुताबिक, केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव ने पूर्व अग्निवीरों के समायोजन को लेकर पत्र भेजा था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। दोनों अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी PAC में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।

अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने की तैयारी
अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल निर्धारित है। इस व्यवस्था में 75 फीसदी अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें सेवामुक्त किया जाता है, जबकि 25 फीसदी को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। ऐसे में पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के साथ उनके लिए दूसरी नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना सरकारों के सामने अहम मुद्दा बन गया है।

तीनों सेनाएं रिटेंशन बढ़ाने पर कर रही विचार
अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने का अनुपात बढ़ाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीनों सेनाएं इस पर विचार कर रही हैं। पहले बैच की सेवा अवधि पूरी होने के बाद इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है। हालांकि, रिटेंशन बढ़ाने को लेकर किसी अंतिम फैसले की पुष्टि जरूरी है।

CAPF और असम राइफल्स में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण
पूर्व अग्निवीरों को दोबारा रोजगार देने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में भी भर्ती संबंधी प्रावधान किए गए हैं। इनके तहत कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। भर्ती नियमों के अनुसार, इन पदों के लिए पूर्व अग्निवीरों की अलग श्रेणी भी बनाई गई है।

फिजिकल टेस्ट और लिखित परीक्षा में छूट का प्रावधान
पूर्व अग्निवीरों को संबंधित भर्ती नियमों के तहत शारीरिक मानक परीक्षा (PST), शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दिए जाने का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि, इन छूटों की वास्तविक पात्रता और लागू शर्तों की पुष्टि संबंधित बल की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना से की जानी चाहिए।

कई राज्य भी दे चुके हैं नौकरी में आरक्षण और आयु सीमा में छूट
केंद्र के साथ कई राज्य सरकारें भी पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में अवसर देने के लिए कदम उठा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पदों पर आरक्षण या आयु सीमा में छूट से जुड़े प्रावधानों की घोषणाएं की गई हैं। इनका लाभ संबंधित राज्य की नीति और भर्ती नियमों के अनुसार मिलता है।

पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण, आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का उद्देश्य चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उनके रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उत्तराखंड में दो अग्निवीरों के समायोजन को मिली मंजूरी इसी दिशा में एक अहम कदम है।

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