By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 | 01:31 PM
नीट री-एग्जाम के लिए प्रवेश पत्र जारी होने के बाद छात्रों के बीच हड़कंप मच गया है। प्रवेश पत्र डाउनलोड करते समय बैंक डिटेल्स की पुष्टि का एक अतिरिक्त चरण जोड़ा गया है। इसी चरण को लेकर कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि बिना स्पष्ट जानकारी के उनका रिफंड विकल्प अपने आप खत्म हो गया।
इस पूरे मामले को लेकर छात्रों में भारी असंतोष देखा जा रहा है और सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या है रिफंड का पूरा मामला?
पहले परीक्षा एजेंसी ने पेपर विवाद के बाद नीट परीक्षा को दोबारा कराने की घोषणा की थी। इसके साथ ही लाखों छात्रों की परीक्षा शुल्क वापसी की बात भी कही गई थी। इसके लिए पहले एक अलग पोर्टल खोला गया था, जहां छात्रों को अपनी बैंक डिटेल भरनी थी।
अब जब प्रवेश पत्र डाउनलोड प्रक्रिया शुरू हुई, तो उसी दौरान बैंक डिटेल्स की पुष्टि का विकल्प फिर से सामने आ गया, जिससे छात्र भ्रमित हो गए।
छात्रों का आरोप – ‘छुपा हुआ विकल्प’
कई छात्रों का कहना है कि प्रवेश पत्र डाउनलोड करते समय पहले से भरी हुई बैंक डिटेल्स को एडिट न करने पर भी सिस्टम ने इसे ‘सहमति’ मान लिया।
कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि आगे बढ़ने पर उनका रिफंड विकल्प बंद हो सकता है। इसी वजह से कई लोग अपनी मेहनत की फीस वापस पाने का मौका खो बैठे।
सोशल मीडिया पर नाराजगी
सोशल मीडिया पर छात्रों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कई पोस्ट में इसे ‘भ्रमित करने वाला कदम’ बताया जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि अगर डिटेल पहले ही ली जा चुकी थी, तो दोबारा उसी को लेकर सहमति मांगने की जरूरत क्यों पड़ी।
परीक्षा एजेंसी की ओर से क्या कहा गया?
परीक्षा एजेंसी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि रिफंड पाने के लिए बैंक डिटेल्स की पुष्टि जरूरी है। उनका कहना है कि बिना पुष्टि के रिफंड प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि यह जानकारी प्रक्रिया में बहुत स्पष्ट तरीके से नहीं दिखाई गई।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवेश पत्र डाउनलोड करते समय छात्रों को हर चरण ध्यान से पढ़ना चाहिए। किसी भी प्रकार के विकल्प को नजरअंदाज करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में अधिक स्पष्ट निर्देश होने चाहिए ताकि छात्रों में भ्रम न फैले।



