Monday, June 15, 2026
spot_img

National

अयोध्या धाम के पुजारियों को हर महीने कितनी मिलती है सैलरी? जानिए वेतन और सुविधाओं का पूरा हिसाब

By Malay Ojha | Published: 14 June 2026 | 11:52 AM

अयोध्या धाम स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्र से चढ़ावे की राशि गायब होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंदिर ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद एक बार फिर राम मंदिर की व्यवस्थाओं और वहां कार्यरत पुजारियों को मिलने वाले वेतन को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।

दान पात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई राशि में गड़बड़ी की चर्चा सामने आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की गहन जांच की मांग की थी। अब सरकार की मंजूरी मिलने के बाद एसआईटी पूरे मामले की जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।

देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में शामिल है मंदिर
राम जन्मभूमि मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में मंदिर की पूजा-पाठ व्यवस्था संभालने वाले पुजारियों की जिम्मेदारी भी काफी अहम मानी जाती है।

मुख्य पुजारी को कितना मिलता है वेतन
मंदिर ट्रस्ट समय-समय पर कर्मचारियों और पुजारियों के वेतन की समीक्षा करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुख्य पुजारी को हर महीने करीब 38 हजार 500 रुपये वेतन दिया जाता है। वहीं सहायक पुजारियों को उनके अनुभव और जिम्मेदारियों के आधार पर लगभग 33 हजार से 36 हजार 300 रुपये तक मासिक भुगतान किया जाता है।

अन्य कर्मचारियों को भी मिलता है निर्धारित वेतन
मंदिर में पूजा व्यवस्था के अलावा भंडार और अन्य प्रशासनिक कामकाज देखने वाले कर्मचारियों की भी नियुक्ति होती है। इनमें कोठारी और भंडारी जैसे पद शामिल हैं। इन कर्मचारियों को लगभग 19 हजार से 24 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाता है।

वेतन के साथ मिलती हैं कई सुविधाएं
राम मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों को केवल वेतन ही नहीं मिलता, बल्कि कई अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्हें रहने की व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सहायता और अवकाश जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसका उद्देश्य यह है कि पुजारी बिना किसी अतिरिक्त चिंता के पूरी तरह धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

सीधे नियुक्ति नहीं, पहले प्रशिक्षण
राम मंदिर में पुजारी बनना आसान नहीं माना जाता। चयनित उम्मीदवारों को पहले प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। प्रशिक्षण अवधि लगभग छह महीने की होती है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को मासिक वजीफा दिया जाता है और उनके रहने तथा खाने की व्यवस्था भी ट्रस्ट की ओर से की जाती है।

कौन बन सकता है राम मंदिर का पुजारी
राम मंदिर में पुजारी पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा प्राप्त होना जरूरी है। उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल या वैदिक शिक्षण संस्थान से शिक्षा हासिल करनी चाहिए। साथ ही वैदिक ग्रंथों, पूजा-विधि और धार्मिक परंपराओं की अच्छी जानकारी होना भी आवश्यक है।

उम्र और धार्मिक योग्यता भी जरूरी
ट्रस्ट द्वारा तय मानकों के अनुसार आवेदन के समय उम्मीदवार की आयु सामान्य रूप से 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी का रामानंदी परंपरा से जुड़ा होना और वैष्णव धार्मिक परंपराओं का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मंदिर में नियुक्त होने वाले पुजारी वहां की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को अच्छी तरह समझते हों।

बढ़ी लोगों की उत्सुकता
एसआईटी जांच की मंजूरी के बाद राम मंदिर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जहां एक ओर चोरी के मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों की सैलरी, सुविधाओं और चयन प्रक्रिया को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

International

अयोध्या धाम के पुजारियों को हर महीने कितनी मिलती है सैलरी? जानिए वेतन और सुविधाओं का पूरा हिसाब

By Malay Ojha | Published: 14 June 2026 | 11:52 AM

अयोध्या धाम स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्र से चढ़ावे की राशि गायब होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंदिर ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद एक बार फिर राम मंदिर की व्यवस्थाओं और वहां कार्यरत पुजारियों को मिलने वाले वेतन को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।

दान पात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई राशि में गड़बड़ी की चर्चा सामने आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की गहन जांच की मांग की थी। अब सरकार की मंजूरी मिलने के बाद एसआईटी पूरे मामले की जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।

देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में शामिल है मंदिर
राम जन्मभूमि मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में मंदिर की पूजा-पाठ व्यवस्था संभालने वाले पुजारियों की जिम्मेदारी भी काफी अहम मानी जाती है।

मुख्य पुजारी को कितना मिलता है वेतन
मंदिर ट्रस्ट समय-समय पर कर्मचारियों और पुजारियों के वेतन की समीक्षा करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुख्य पुजारी को हर महीने करीब 38 हजार 500 रुपये वेतन दिया जाता है। वहीं सहायक पुजारियों को उनके अनुभव और जिम्मेदारियों के आधार पर लगभग 33 हजार से 36 हजार 300 रुपये तक मासिक भुगतान किया जाता है।

अन्य कर्मचारियों को भी मिलता है निर्धारित वेतन
मंदिर में पूजा व्यवस्था के अलावा भंडार और अन्य प्रशासनिक कामकाज देखने वाले कर्मचारियों की भी नियुक्ति होती है। इनमें कोठारी और भंडारी जैसे पद शामिल हैं। इन कर्मचारियों को लगभग 19 हजार से 24 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाता है।

वेतन के साथ मिलती हैं कई सुविधाएं
राम मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों को केवल वेतन ही नहीं मिलता, बल्कि कई अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्हें रहने की व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सहायता और अवकाश जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसका उद्देश्य यह है कि पुजारी बिना किसी अतिरिक्त चिंता के पूरी तरह धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

सीधे नियुक्ति नहीं, पहले प्रशिक्षण
राम मंदिर में पुजारी बनना आसान नहीं माना जाता। चयनित उम्मीदवारों को पहले प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। प्रशिक्षण अवधि लगभग छह महीने की होती है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को मासिक वजीफा दिया जाता है और उनके रहने तथा खाने की व्यवस्था भी ट्रस्ट की ओर से की जाती है।

कौन बन सकता है राम मंदिर का पुजारी
राम मंदिर में पुजारी पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा प्राप्त होना जरूरी है। उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल या वैदिक शिक्षण संस्थान से शिक्षा हासिल करनी चाहिए। साथ ही वैदिक ग्रंथों, पूजा-विधि और धार्मिक परंपराओं की अच्छी जानकारी होना भी आवश्यक है।

उम्र और धार्मिक योग्यता भी जरूरी
ट्रस्ट द्वारा तय मानकों के अनुसार आवेदन के समय उम्मीदवार की आयु सामान्य रूप से 20 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी का रामानंदी परंपरा से जुड़ा होना और वैष्णव धार्मिक परंपराओं का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मंदिर में नियुक्त होने वाले पुजारी वहां की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को अच्छी तरह समझते हों।

बढ़ी लोगों की उत्सुकता
एसआईटी जांच की मंजूरी के बाद राम मंदिर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जहां एक ओर चोरी के मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों की सैलरी, सुविधाओं और चयन प्रक्रिया को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES