Saturday, June 27, 2026
spot_img

National

अब 10वीं के बाद बन सकेंगे आयुर्वेद डॉक्टर! यूपी में शुरू होंगे 5 नए गुरुकुल, 7.5 साल का खास कोर्स

By Malay Ojha | Published: 27 June 2026 | 11:31 AM

उत्तर प्रदेश में संस्कृत विषय से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब हाईस्कूल के बाद ही छात्रों को आयुर्वेद डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा। राज्य सरकार पांच नए आयुर्वेद गुरुकुल शुरू करने जा रही है, जहां छात्रों को सीधे इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स में दाखिला दिया जाएगा। इस पहल से संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद चिकित्सा को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में पांच नए आयुर्वेद गुरुकुल स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन संस्थानों में छात्रों को पारंपरिक गुरुकुल पद्धति के साथ आधुनिक चिकित्सा शिक्षा भी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार और करियर के नए रास्ते खुलेंगे।

10वीं के बाद सीधे मिलेगा दाखिला
इन गुरुकुलों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि छात्र हाईस्कूल पास करने के बाद सीधे इस विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा को पीएपी-नीट नाम दिया गया है।

साढ़े सात साल का होगा पूरा कोर्स
इंटीग्रेटेड बीएएमएस पाठ्यक्रम की कुल अवधि सात साल छह महीने तय की गई है। शुरुआती दो वर्षों में छात्रों को प्री-आयुर्वेद की पढ़ाई कराई जाएगी, जिसमें संस्कृत, आयुर्वेद की बुनियादी जानकारी और चिकित्सा से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके बाद साढ़े चार साल का बीएएमएस पाठ्यक्रम होगा और अंत में एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी।

पूरी तरह आवासीय होंगे गुरुकुल
सरकार की योजना के मुताबिक सभी आयुर्वेद गुरुकुल पूरी तरह आवासीय होंगे। छात्रों को परिसर में रहकर पढ़ाई करनी होगी। इससे उन्हें अनुशासित वातावरण के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय शिक्षा प्रणाली का अनुभव भी मिलेगा।

हर गुरुकुल के साथ होगा अस्पताल
इन संस्थानों के साथ अपना अस्पताल भी बनाया जाएगा। यहां छात्र मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को करीब से समझेंगे और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। चिकित्सा की पढ़ाई के दौरान उन्हें वास्तविक मरीजों के साथ काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी पेशेवर क्षमता और बेहतर होगी।

संस्कृत और आयुर्वेद का बनेगा मजबूत रिश्ता
आयुर्वेद के कई महत्वपूर्ण ग्रंथ, जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता, मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। ऐसे में संस्कृत के विद्यार्थी इन ग्रंथों को सीधे पढ़ और समझ सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं को समझने वाले कुशल चिकित्सक तैयार होंगे।

देश का पहला ऐसा बड़ा प्रयोग
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि यह योजना संस्कृत के छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां एक साथ पांच आयुर्वेद गुरुकुल शुरू किए जा रहे हैं। उनके अनुसार यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच मजबूत पुल का काम करेगी।

शिक्षा और रोजगार दोनों को मिलेगा फायदा
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से संस्कृत विषय में पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी। साथ ही, उन्हें डॉक्टर बनने का नया विकल्प मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

International

अब 10वीं के बाद बन सकेंगे आयुर्वेद डॉक्टर! यूपी में शुरू होंगे 5 नए गुरुकुल, 7.5 साल का खास कोर्स

By Malay Ojha | Published: 27 June 2026 | 11:31 AM

उत्तर प्रदेश में संस्कृत विषय से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब हाईस्कूल के बाद ही छात्रों को आयुर्वेद डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा। राज्य सरकार पांच नए आयुर्वेद गुरुकुल शुरू करने जा रही है, जहां छात्रों को सीधे इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स में दाखिला दिया जाएगा। इस पहल से संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद चिकित्सा को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में पांच नए आयुर्वेद गुरुकुल स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन संस्थानों में छात्रों को पारंपरिक गुरुकुल पद्धति के साथ आधुनिक चिकित्सा शिक्षा भी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार और करियर के नए रास्ते खुलेंगे।

10वीं के बाद सीधे मिलेगा दाखिला
इन गुरुकुलों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि छात्र हाईस्कूल पास करने के बाद सीधे इस विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा को पीएपी-नीट नाम दिया गया है।

साढ़े सात साल का होगा पूरा कोर्स
इंटीग्रेटेड बीएएमएस पाठ्यक्रम की कुल अवधि सात साल छह महीने तय की गई है। शुरुआती दो वर्षों में छात्रों को प्री-आयुर्वेद की पढ़ाई कराई जाएगी, जिसमें संस्कृत, आयुर्वेद की बुनियादी जानकारी और चिकित्सा से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके बाद साढ़े चार साल का बीएएमएस पाठ्यक्रम होगा और अंत में एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी।

पूरी तरह आवासीय होंगे गुरुकुल
सरकार की योजना के मुताबिक सभी आयुर्वेद गुरुकुल पूरी तरह आवासीय होंगे। छात्रों को परिसर में रहकर पढ़ाई करनी होगी। इससे उन्हें अनुशासित वातावरण के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय शिक्षा प्रणाली का अनुभव भी मिलेगा।

हर गुरुकुल के साथ होगा अस्पताल
इन संस्थानों के साथ अपना अस्पताल भी बनाया जाएगा। यहां छात्र मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को करीब से समझेंगे और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। चिकित्सा की पढ़ाई के दौरान उन्हें वास्तविक मरीजों के साथ काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी पेशेवर क्षमता और बेहतर होगी।

संस्कृत और आयुर्वेद का बनेगा मजबूत रिश्ता
आयुर्वेद के कई महत्वपूर्ण ग्रंथ, जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता, मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। ऐसे में संस्कृत के विद्यार्थी इन ग्रंथों को सीधे पढ़ और समझ सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं को समझने वाले कुशल चिकित्सक तैयार होंगे।

देश का पहला ऐसा बड़ा प्रयोग
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि यह योजना संस्कृत के छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां एक साथ पांच आयुर्वेद गुरुकुल शुरू किए जा रहे हैं। उनके अनुसार यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच मजबूत पुल का काम करेगी।

शिक्षा और रोजगार दोनों को मिलेगा फायदा
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से संस्कृत विषय में पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी। साथ ही, उन्हें डॉक्टर बनने का नया विकल्प मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES