Wednesday, July 15, 2026
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CBSE का बड़ा बदलाव: 2026-27 से 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं जरूरी, जानिए नए नियम

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 | 03:10 PM

अगर आपका बच्चा अगले शैक्षणिक सत्र में नौवीं कक्षा में प्रवेश लेने जा रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सत्र 2026-27 से नई तीन-भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत नौवीं में दाखिला लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी।

सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नई भाषा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सत्र 2026-27 में नौवीं में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।

अगर कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी या कोई दूसरी विदेशी भाषा चुन सकता है। लेकिन यदि छात्र केवल एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के तौर पर किसी भारतीय भाषा को चुनना होगा।

10वीं के मौजूदा छात्रों को नहीं मिलेगा असर
सीबीएसई ने साफ किया है कि सत्र 2026-27 में जो छात्र पहले से दसवीं में पढ़ रहे हैं, उन पर यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी। वे पुराने नियमों के तहत दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे और उन्हें अतिरिक्त भाषा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली है जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बीच सत्र में किसी नए नियम से प्रभावित नहीं होना चाहते।

तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
नई नीति के तहत नौवीं में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा। जब यही छात्र अगले वर्ष दसवीं में पहुंचेंगे, तब भी इस अतिरिक्त भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

बोर्ड ने कहा है कि इस व्यवस्था का मकसद छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अलग-अलग भारतीय भाषाओं से जोड़ना है।

7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए भी बदलेंगे नियम
फिलहाल सातवीं और आठवीं में पढ़ रहे छात्रों पर भी आने वाले वर्षों में यही व्यवस्था लागू होगी। जब ये छात्र नौवीं और दसवीं में पहुंचेंगे, तब उन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।

अगर किसी छात्र ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हुई हैं, तो उसे एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी पड़ेगी। इस भाषा का मूल्यांकन स्कूल ही करेगा।

छोटे बच्चों के लिए आगे बोर्ड परीक्षा की तैयारी
सीबीएसई ने संकेत दिया है कि छठी और उससे नीचे की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भविष्य में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके लिए 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्र अपनी पसंद की भाषा आसानी से सीख सकें।

दिव्यांग और विदेश से आने वाले छात्रों को राहत
बोर्ड ने दिव्यांग छात्रों को विशेष सुविधाएं देने का फैसला किया है। इसके अलावा विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र और विदेश से भारत लौटने वाले विद्यार्थियों को तीसरी भारतीय भाषा पढ़ने से छूट मिलेगी।

यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला हो जाता है, तो वह अपनी पहले से चुनी गई भाषा व्यवस्था को जारी रख सकेगा।

स्कूलों को भी दी गई विशेष छूट
नई नीति को लागू करने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों को जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर शिक्षकों, सहोदय समूहों और ऑनलाइन तथा हाइब्रिड पढ़ाई की मदद लेने की अनुमति दी है।

बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बहुभाषी बनाना, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक और समग्र बनाना है।

क्या है नई नीति का सबसे बड़ा संदेश?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार चाहती है कि छात्र केवल एक या दो भाषाओं तक सीमित न रहें, बल्कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति से भी जुड़ें। इसी सोच के साथ सीबीएसई ने तीन-भाषा व्यवस्था को लागू करने का रोडमैप तैयार किया है।

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CBSE का बड़ा बदलाव: 2026-27 से 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं जरूरी, जानिए नए नियम

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 | 03:10 PM

अगर आपका बच्चा अगले शैक्षणिक सत्र में नौवीं कक्षा में प्रवेश लेने जा रहा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सत्र 2026-27 से नई तीन-भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत नौवीं में दाखिला लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी।

सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नई भाषा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सत्र 2026-27 में नौवीं में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।

अगर कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी या कोई दूसरी विदेशी भाषा चुन सकता है। लेकिन यदि छात्र केवल एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के तौर पर किसी भारतीय भाषा को चुनना होगा।

10वीं के मौजूदा छात्रों को नहीं मिलेगा असर
सीबीएसई ने साफ किया है कि सत्र 2026-27 में जो छात्र पहले से दसवीं में पढ़ रहे हैं, उन पर यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी। वे पुराने नियमों के तहत दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे और उन्हें अतिरिक्त भाषा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली है जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बीच सत्र में किसी नए नियम से प्रभावित नहीं होना चाहते।

तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
नई नीति के तहत नौवीं में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा। जब यही छात्र अगले वर्ष दसवीं में पहुंचेंगे, तब भी इस अतिरिक्त भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

बोर्ड ने कहा है कि इस व्यवस्था का मकसद छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अलग-अलग भारतीय भाषाओं से जोड़ना है।

7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए भी बदलेंगे नियम
फिलहाल सातवीं और आठवीं में पढ़ रहे छात्रों पर भी आने वाले वर्षों में यही व्यवस्था लागू होगी। जब ये छात्र नौवीं और दसवीं में पहुंचेंगे, तब उन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।

अगर किसी छात्र ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हुई हैं, तो उसे एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी पड़ेगी। इस भाषा का मूल्यांकन स्कूल ही करेगा।

छोटे बच्चों के लिए आगे बोर्ड परीक्षा की तैयारी
सीबीएसई ने संकेत दिया है कि छठी और उससे नीचे की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भविष्य में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके लिए 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि छात्र अपनी पसंद की भाषा आसानी से सीख सकें।

दिव्यांग और विदेश से आने वाले छात्रों को राहत
बोर्ड ने दिव्यांग छात्रों को विशेष सुविधाएं देने का फैसला किया है। इसके अलावा विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र और विदेश से भारत लौटने वाले विद्यार्थियों को तीसरी भारतीय भाषा पढ़ने से छूट मिलेगी।

यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला हो जाता है, तो वह अपनी पहले से चुनी गई भाषा व्यवस्था को जारी रख सकेगा।

स्कूलों को भी दी गई विशेष छूट
नई नीति को लागू करने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों को जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर शिक्षकों, सहोदय समूहों और ऑनलाइन तथा हाइब्रिड पढ़ाई की मदद लेने की अनुमति दी है।

बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बहुभाषी बनाना, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक और समग्र बनाना है।

क्या है नई नीति का सबसे बड़ा संदेश?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार चाहती है कि छात्र केवल एक या दो भाषाओं तक सीमित न रहें, बल्कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति से भी जुड़ें। इसी सोच के साथ सीबीएसई ने तीन-भाषा व्यवस्था को लागू करने का रोडमैप तैयार किया है।

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